कृषि क्षेत्र में जल संरक्षण और फसल उत्पादकता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (सूक्ष्म) बिहार के किसानों के लिए एक बड़ी राहत और नई क्रांति साबित हो रही है. इस योजना के तहत ड्रिप (टपकन) सिंचाई और स्प्रिंकलर सिंचाई पर किसानों को 90 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है. इस आधुनिक तकनीक से पारंपरिक सिंचाई की तुलना में 60 प्रतिशत कम पानी में 40 से 50 प्रतिशत तक अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है.
दरअसल, पारंपरिक सिंचाई पद्धति में पानी की भारी बर्बादी होती है और फसलों को असमान मात्रा में पानी मिलने से पैदावार पर भी असर पड़ता है. ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई इस समस्या का प्रभावी समाधान है. इसमें पानी बूंद-बूंद या सूक्ष्म कणों के रूप में सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है, जिससे न सिर्फ पानी की बचत होती है बल्कि उर्वरकों का भी 25-30 प्रतिशत तक बचत संभव है. बिहार के किसान इस सरकारी योजना का लाभ लेना चाहते हैं तो वे बिहार कृषि ऐप या विभाग की वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
योजना के अंतर्गत क्या सुविधाएं?
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (सूक्ष्म) के तहत दो प्रकार की सुविधाएं शामिल हैं:
अन्य हस्तक्षेप
निजी नलकूप, कुआं और तालाब जैसे जल स्रोतों का विकास
अनुदान की सीमा और पात्रता
वहीं, इस योजना का पूर्व में लाभ ले चुके किसानों को 7 साल के बाद ही दोबारा लाभ मिलेगा. छोटे किसान इस योजना का लाभ ले सकते हैं.
इन किसानों को मिलेगा सब्सिडी लाभ
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (सूक्ष्म) के तहत राज्य के किसानों को विभिन्न श्रेणियों के अनुसार अनुदान देने का प्रावधान सरकार द्वारा तय किया गया है. जिसमें ड्रिप सिंचाई पद्धति के तहत लघु और सीमांत किसानों को संभावित लागत का 80% तक अनुदान दिया जाएगा.
वहीं, अन्य किसानों को 70 प्रतिशत और एफआरए पट्टाधारक किसानों को 90 प्रतिशत सहायता अनुदान मिलेगा. इसके अलावा पोर्टेबल स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति के अंतर्गत लघु और सीमांत किसानों को संभावित लागत का 55 प्रतिशत और अन्य कृषकों को 45 प्रतिशत सहायता अनुदान सरकार की ओर से दिया जाएगा.
कैसे आवेदन करें किसान?
बिहार के इच्छुक किसान बिहार कृषि ऐप डाउनलोड करके या बिहार कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आसानी से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. जिसमें दस्तावेज सत्यापन के बाद सब्सिडी राशि सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंच जाएगी.
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क