मई का महीना अदरक की बुवाई के लिए बेस्ट माना जाता है. गन्ने के साथ इंटरक्रॉपिंग और सही बीज चुनकर किसान कम लागत में अच्छी कमाई कर सकते हैं. अदरक की डिमांड बाजार में हमेशा बनी रहती है. सही तरीके से खेती करने पर बढ़िया पैदावार और अच्छी कमाई हो सकती है. आइए जानते हैं अदरक की खेती का पूरा तरीका
अदरक की बुवाई के लिए उपयुक्त जलवायु
अदरक उष्णकटिबंधीय फसल है. इसे गर्म और नम जलवायु पसंद है. बुवाई के समय 25-35 डिग्री तापमान होना चाहिए. कंद (जड़) बनने के लिए ठंडा और सूखा मौसम अच्छा होता है.
अदरक की बुवाई के लिए कैसी मिट्टी हो?
दोमट या हल्की दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है मिट्टी में अच्छी जल निकासी होनी चाहिए, पानी न ठहरना चाहिए. मिट्टी का pH 5.5 से 6.5 के बीच होना चाहिए. खेत की तैयारी के लिए 2-3 बार जुताई करें और गोबर की खाद मिलाएं.
बुवाई का सही समय और विधि
सबसे अच्छा समय मई का महीना माना जाता है. कुछ जगहों पर जून की शुरुआत तक भी अदरक बोया जा सकता है. बरसात शुरू होने से पहले बुवाई करना बेहतर होता है.
बीज की मात्रा
एक एकड़ में 10-12 क्विंटल बीज (कंद) चाहिए. इसके लिए स्वस्थ, रोगमुक्त कंद को 20-25 ग्राम के टुकड़ों में काटें. हर टुकड़े में 1-2 आंखें (कलियां) हों.
बुवाई से पहले कंदों को मैनकोजेब (3 ग्राम प्रति लीटर पानी) में 30 मिनट भिगोकर छाया में सुखाएं. इससे रोग कम लगते हैं. क्यारी या मेड बनाकर बीज लगाएं. पंक्ति से पंक्ति 30-45 सेमी और पौधे से पौधे 15-20 सेमी दूरी रखें. कंद को 5-7 सेमी गहराई पर बोएं और ऊपर गोबर की खाद या मिट्टी ढक दें.
अदरक की फसल में गोबर की खाद 2-3 टन प्रति एकड़ (या ज्यादा जैविक खाद) डालनी चाहिए. वहीं, रासायनिक उर्वरक की बात करें तो NPK 50:40:40 किग्रा प्रति एकड़ काफी होता है. आधी नाइट्रोजन बुवाई के समय, बाकी दो भागों में 45 और 90 दिन बाद दें. शुरू में हल्की सिंचाई करें और बरसात में कम पानी दें. सूखे में 7-10 दिन में एक बार सिंचाई करें.
कटाई का समय
अदरक की फसल 8-9 महीने में तैयार होती है. दिसंबर-जनवरी) में जब पत्तियां पीली पड़ जाएं और सूखने लगें, तब कटाई करें. हल्के से खोदकर कंद निकालें.अदरक की खेती मेहनत मांगती है लेकिन अच्छा मुनाफा देती है.
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क