सेम की इस वैरायटी की खेती करें किसान, कम लागत में होगी अच्छी आमदनी! सस्ते में यहां से खरीदें बीज

सेम की अर्का सुप्रिया वैरायटी कम लागत में बढ़िया मुनाफे कमाने वाले किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है. इसकी खास बात है कि बुवाई के 60-70 दिन बाद ही फसल की पहली तुड़ाई की जा सकती है. 12 से 15 टन प्रति हेक्टेयर इसकी अपेक्षित पैदावार होती है.

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बुवाई के 60-70 दिन बाद की जा सकती है फसल की तुड़ाई (फाइल फोटो) बुवाई के 60-70 दिन बाद की जा सकती है फसल की तुड़ाई (फाइल फोटो)

आजतक एग्रीकल्चर डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 05 मई 2026,
  • अपडेटेड 6:12 PM IST

किसान अब पारंपरिक फसलों के अलावा कम समय में अच्छा मुनाफा देने वाली सब्जियों की खेती कर रहे हैं. ऐसी ही एक बेहतरीन फसल है, अर्का सुप्रिया वैरायटी की डोलिचोस यानी सेम. यह वैरायटी कम लागत और कम समय में ज्यादा पैदावार देने के लिए जानी जाती है. कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि सेम की ये वैरायटी किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है.

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नेशनल सीड्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NSC) के मुताबिक, सेम के बीज आप घर बैठे आसानी से ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं. NSC के स्टोर पर 50 ग्राम बीज सिर्फ  100 रुपये में उपलब्ध हैं. अर्का सुप्रिया वैरायटी सेम बुवाई के लिए प्रति हेक्टेयर सिर्फ 8-10 किलो बीज काफी है. यह कम बीज दर से अच्छी पैदावार देने वाली वैरायटी है. सही समय पर बुवाई करने और उचित देखभाल करने पर किसान 12 से 15 टन प्रति हेक्टेयर तक उपज हासिल कर सकते हैं.

बुवाई के कितने दिन बाद कर सकते हैं पहली तुड़ाई?
बुवाई के 60-70 दिनों बाद पहली तुड़ाई शुरू हो जाती है. इसके बाद लगातार तुड़ाई करके किसान लंबे समय तक मुनाफा कमा सकते हैं. यह वैरायटी जल्दी तैयार होने वाली और रोग प्रतिरोधी मानी जाती है, जिससे किसानों को कम कीटनाशक और दवाओं का खर्चा उठाना पड़ता है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सेम की अर्का सुप्रिया वैरायटी उन किसानों के लिए बेहतर ऑप्शन है जो कम निवेश में ज्यादा मुनाफा चाहते हैं. 

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सेम की अर्का सुप्रिया किस्म भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (IIHR), हेसरघट्टा द्वारा विकसित एक उन्नत और ज्यादा उत्पादन देने वाली किस्म है. इसका पौधा मजबूत होता है और तेजी से बढ़ता है. इसकी फलियां गहरे हरे रंग की और कोमल होती हैं, जिनमें धागा नहीं होता और खाने में  स्वादिष्ट होती हैं. सेम की यह वैरायटी भारतीय मौसम और परिस्थितियों के लिए काफी अनुकूल मानी जाती है, इसलिए छोटे किसानों और किचन गार्डन के लिए भी यह एक बेहतर विकल्प है.


 

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