Budget 2026 Expectations: किसान सम्मान निधि की राशि में होगा इजाफा? जानें बजट से कृषि सेक्टर को क्या हैं उम्मीदें

Budget Expectations for Agriculture Sector: किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं हैं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. लेकिन किसानों के लिए खेती करना आसान नहीं है. कभी मौसम की मार से फसलें खराब हो जाती हैं तो कभी लागत इतनी बढ़ जाती है कि मुनाफा ही नहीं मिलता. बीज, खाद, डीजल, कीटनाशक और मजदूरी, हर चीज महंगी होती जा रही है. ऐसे में किसानों की नज़रें केंद्रीय बजट 2026 पर टिकी हैं.

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Budget 2026 Expectations for Agriculture Sector (File Photo- ITG) Budget 2026 Expectations for Agriculture Sector (File Photo- ITG)

आजतक एग्रीकल्चर डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 30 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:38 AM IST

आगामी एक फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट में किसानों को सरकार से कई उम्मीदें हैं.कृषि विकास को लेकर किसानों की प्रमुख मांगों में खाद-बीज की उपलब्धता, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा दिलाना एवं पीएम किसान सम्मान निधि योजना की राशि में बढ़ोतरी शामिल है.

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सर्वेक्षण में जानकारी दी कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत देश के 11 करोड़ किसानों को अब तक कुल 4.09 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है. उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस किसानों को मजबूत बनाने पर है. 

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किसानों का मानना है कि इन मांगों को बजट में शामिल करने से कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी. बीज, यूरिया, खाद, कृषि यंत्र, ट्रैक्टर, डीजल समेत कई ऐसी चीजे हैं जिनपर GST को कम करके किसानों को बड़ी राहत दी जा सकती है.

वहीं, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN) को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं. माना जा रहा है कि केंद्रीय बजट 2026 में पीएम किसान योजना के तहत मिलने वाली राशि में इजाफा हो सकता है.

क्या बजट 2026 में PM-KISAN योजना की राशि में बदलाव संभव है?
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसानों को सालाना 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो तीन किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खाते में ट्रांसफर होती है. हालांकि, मौजूदा हालात में किसान संगठनों और एग्रीकल्चर एक्सपर्ट्स का मानना है कि महंगाई के दौर और खेती में लागत के हिसाब से यह रकम अब कम लगती है. 

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दरअसल, बीते कुछ सालों में खेती की लागत में तेज उछाल आया है. बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, बिजली, सिंचाई और कृषि मशीनरी हर चीज महंगी होती जा रही है. सीमांत और छोटे किसानों के लिए 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता नाकाफी साबित हो रही है. ऐसे में बजट 2026 में इस राशि में बढ़ोतरी की मांग जोर पकड़ रही है.

इनपुट लागत में कमी और एग्री-इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
किसानों की एक प्रमुख मांग खेती में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों और यंत्रों पर GST दरों को कम करने की है. वर्तमान में कीटनाशकों पर 18 प्रतिशत टैक्स लगता है, जिसे घटाकर 5 प्रतिशत करने की मांग जोर पकड़ रही है. इसके अतिरिक्त, बजट में पोस्ट-हार्वेस्ट लॉजिस्टिक्स और कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए भारी निवेश की संभावना है.

सरकारी योजनाओं का सही इस्तेमाल
सरकार की कई योजनाएं खेती के लिए चलाई जा रही हैं. पीएम धन-धान्य कृषि योजना जैसी योजनाएं उन इलाकों में मदद कर सकती हैं जहां खेती कमजोर है. बजट में यह ध्यान रखना चाहिए कि इन योजनाओं का फायदा छोटे किसानों, बारिश पर निर्भर इलाकों और महिलाओं तक पहुंचे. 

विकसित भारत की नींव है मजबूत खेती
अगर भारत को 2047 तक विकसित देश बनाना है, तो खेती को मजबूत बनाना जरूरी है. बजट 2026 भारतीय खेती को नई दिशा दे सकता है. सरकार के सहयोग से किसान खुशहाल होंगे तो देश भी आगे बढ़ेगा.

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