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सेना प्रमुख नरवणे के बयान पर भड़का चीन! दी ये प्रतिक्रिया

चीन ने भारतीय सेना प्रमुख एमएम नरवणे के बयान की आलोचना की है. नरवणे ने पूर्वी लद्दाख में चीनी खतरे की बात कही थी. चीन ने भारत-चीन के बीच कमांडर स्तर की वार्ता को लेकर कहा है कि अगर कोई जानकारी होगी तो दी जाएगी.

सीमा पर भारतीय और चीनी सैनिक (Image- Reuters) सीमा पर भारतीय और चीनी सैनिक (Image- Reuters)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • चीन ने एमएम नरवणे के बयान पर दी प्रतिक्रिया
  • सेना प्रमुख के चीनी खतरे वाले बयान की आलोचना की
  • 14वें दौर की वार्ता को लेकर नहीं दी कोई जानकारी

चीन ने गुरुवार को भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के उस बयान की आलोचना की जिसमें उन्होंने एलएसी पर चीनी खतरे की बात की थी. चीन ने कहा है कि उसे उम्मीद है कि भारतीय अधिकारी इस तरह के बेतुके बयानों से परहेज करेंगे.

चीन के विदेश मंत्री के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने एक ब्रीफिंग के दौरान कहा, 'चीन और भारत सीमा पर तनाव को कम करने के लिए राजनयिक और सैन्य स्तरों पर काम कर रहे हैं. हमें उम्मीद है कि भारत के अधिकारी बेतुकी टिप्पणी करने से बचेंगे.'

एमएम नरवणे ने बुधवार को कहा था कि उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों को लेकर चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी से बातचीत में प्रगति हुई है. हालांकि, आपसी मनमुटाव के बाद आंशिक खतरा बना हुआ है.

चीन के विदेश मंत्रालय ने भारत-चीन के बीच बुधवार को हुई 14वें दौर की कमांडर स्तर की बैठक के संबंध में कोई जानकारी साझा नहीं की. ब्रीफिंग के दौरान जब दोनों देशों के बीच वार्ता को लेकर सवाल किए गए तब वेनबिन ने कहा, 'अगर कोई जानकारी होगी तो हम साझा करेंगे.'

भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में पिछले 20 महीने से चले आ रहे सैन्य गतिरोध को हल करने के लिए वार्ता कर रहे हैं. ये वार्ता तीन महीने के अंतराल के बाद हुई है. वार्ता समाप्त होने के बाद भारत और चीन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया. इस बात से संकेत मिलता है कि विवाद वाले जगहों से सैन्य तैनाती हटाने को लेकर दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद हैं.

वांग वेनबिन ने वार्ता से पहले मंगलवार को कहा था, 'फिलहाल, सीमावर्ती इलाकों में स्थिति पूरी तरह स्थिर है और दोनों पक्ष राजनयिक और सैन्य स्तरों पर बातचीत कर रहे हैं. हमें उम्मीद है कि भारत आपात स्थिति से निपटने के लिए नियमित रूप से स्थिति को बदलने में मदद करने के लिए काम करेगा.'

दोनों देशों के बीच अक्टूबर में पिछली सैन्य वार्ता नाकाम रही थी.13वें दौर की वार्ता कड़वाहट में खत्म होने के बाद दोनों ने कड़े बयान जारी किए थे.

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने अपने बयान में कहा था कि भारत ने वार्ता के दौरान अनुचित और न पूरी की मांग सकने वाली मांग की थी. भारत ने कहा था कि चीनी पक्ष सहमति के पक्ष में नहीं था और बातचीत की मेज पर कोई दूरदर्शी प्रस्ताव नहीं दे सका.

पैंगोंग झील क्षेत्र में भारतीय और चीनी सेना के बीच हिंसक झड़प के बाद 5 मई 2020 को दोनों देशों की सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख में सीमा पर गतिरोध शुरू हुआ था. क्षेत्र में दोनों देशों की सेना ने हजारों की संख्या में सैनिकों की तैनाती कर दी और बड़ी संख्या में हथियार भी जमा कर लिए.

कई दौर की सैन्य और राजनयिक वार्ता के बाद भी अब तक केवल आंशिक रूप से सैनिकों को हटाया जा सका है. भारत ने बार-बार चीन के आरोपों को खारिज किया है कि भारतीय सैनिकों ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी सीमा को पार कर लिया है. भारत कहता रहा है कि हमने सीमावर्ती क्षेत्रों में हमेशा सीमा प्रबंधन और शांति बनाए रखने के लिए एक जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाया है.  

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