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हवा में तैरते हैं छिपकली जैसे दिखने वाले सैलामैंडर, आंखों पर यकीन नहीं होगा

छिपकलियों की तरह दिखने वाले सैलामैंडर ऊंचे पेड़ों पर रहते हैं. पेड़ों से उतरने के लिए ये ऊंचाई से छलांग लगाते हैं और हवा में तैरते हैं. वीडियो देखकर आंखों पर यकीन नहीं होगा.

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स्काई डाइवर की तरह हवा में तैरती है ये सैलामेंडर (Photo: C. BROWN)
स्काई डाइवर की तरह हवा में तैरती है ये सैलामेंडर (Photo: C. BROWN)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बिना स्किन फ्लैप्स के तैरते हैं
  • ऊंचाई से गिरकर नहीं लगती चोट

एनाइड्स वैगरन्स (Aneides Vagrans) को वंडरिंग सैलामैंडर (Wandering Salamander) भी कहा जाता है. यह छिपकली जैसे दिखाई देते हैं और प्राकृतिक तौर पर कैलिफ़ोर्निया (California) के रेडवुड पेड़ों पर पाए जाते हैं. ये दुनिया के सबसे ऊंचे पेड़ हैं, इसलिए ये सैलामैंडर मुश्किल से ही दिखाई देते हैं. 

इस सैलामैंडर के बारे में एक बात बड़ी अनोखी है. ये कभी भी पेड़ से कूद सकते हैं और जिस तरीके से ये नीचे आते हैं वह बेहद अनोखा है. ऐसा लगता है जैसे ये सैलामैंडर हवा में तैरते हुए नीचे आ रहे हों, स्काईडाइवर्स (Skydivers) की तरह.  

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सैलामैंडरों ने जंगल के हिसाब से खुद को ढाल लिया है (Photo: Randal-inaturalist.org)

दक्षिण फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी (University of South Florida) में पीएचडी कर रहे क्रिश्चियन ब्राउन (Christian Brown) ने इसपर शोध किया. उनका कहना है कि इन सैलामैंडरों ने रेडवुड के जंगलों के हिसाब से खुद को ढाल लिया है. वे पेड़ों की ऊंचाई पर रहते हैं, इसलिए वहां से नीचे उतरने का इनका तरीका बेहद अलग है.

तैरने कि लिए फ्लैप्स नहीं है

उनके पास प्रीहेंसाइल पूंछ (Prehensile Tail) है, पैर लंबे और शरीर चपटा है, जो पेड़ों पर चढ़ने के लिए एकदम सही हैं. लेकिन उनका एरोडायनैमिक नहीं होता. उन्हीं के जैसे बाकी जानवर जैसे ग्लाइडिंग लीफ फ्रॉग (Gliding Leaf Frog) और फ्लाइंग जेको (Flying Gecko) के पास स्किन फ्लैप या वेबिंग (Webbing) नहीं होते जो उन्हें हवा में तैरने (Glide) में मदद कर सकें.

इसलिए ब्राउन और दक्षिण फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले के वैज्ञानिकों ने यह जानने की कोशिश की कि ये सैलामैंडर क्या कर सकते हैं. करंट बायोलॉजी (Current Biology) जर्नल में प्रकाशित हुए शोध के मुताबिक, सैलामैंडर को बहुत ऊपर से गिराने के बजाय, वैज्ञानिकों ने सैलामैंडर को कस्टम मेड विंड टनल (Wind Tunnel) में डाल दिया. 

तैरने के लिए शरीर की स्थिति बदलते रहते हैं

शोध में वैज्ञानिकों ने पाया कि सैलामैंडर खुद का गिरना कंट्रोल करने के लिए अलग-अलग तरह की मुद्रा और मूवमेंट का सहारा लेते हैं. अपनी पूंछ घुमाकर, अपने पैर की उंगलियों और पैरों की स्थिति बदलकर, सैलामैंडर ने गिरते हुए अपने शरीर को जमीन के लगभग समानांतर रखा था. ब्राउन का कहना है कि वे बैंकिंग टर्न ले सकते हैं और आड़े होकर ग्लाइड भी कर सकते हैं. 

 

शोध में पाया गया कि स्काइडाइविंग जैसी इस मुद्रा को अपनाने से सैलामैंडर ने अपनी वर्टिकल स्पीड को 10 प्रतिशत तक कम कर दिया. ब्राउन ने कहा कि अगर वे इतनी ऊंचाई से जमीन पर गिर भी तो भी वे मरेंगे नहीं. क्योंकि ये सैलामैंडर काफी हल्के हैं. इनका वजन 6 ग्राम से ज्यादा नहीं होता है. नीचे गिरने पर इन्हें पेड़ के तने के आसपास नरम घास का कुशन भी मिल जाता है. 

हालांकि ये भी है कि रेडवुड के पेड़ों पर चढ़ना इनके लिए घातक साबित हो सकता है. 2021 के एक शोध में पाया गया कि पेड़ पर चढ़ने में उन्हें कई घंटे या दिन लग सकते हैं. इस दौरान उनमें ऊर्जा खत्म हो जाती है या फिर वे शिकार हो सकते हैं. वाज्ञानिकों को मानना है कि हो सकता है कि अन्य जानवरों में भी पैराशूटिंग और ग्लाइडिंग की क्षमता हो, जिन्हें अभी तक नोटिस नहीं किया गया है. 

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