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एंटी रेप बिल को कैबिनेट में मिल सकती है हरी झंडी

एंटी रेप बिल गुरुवार को कैबिनेट की बैठक में पेश किया जाएगा. इससे पहले एम्पावर्ड ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स ने विवाद के सारे बिंदुओं को सुलझा लेने का दावा किया. गुरुवार को कैबिनेट की बैठक में हरी झंडी मिलने पर सोमवार को इस पर सर्वदलीय बैठक होगी.

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एंटी रेप बिल गुरुवार को कैबिनेट की बैठक में पेश किया जाएगा. इससे पहले एम्पावर्ड ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स ने विवाद के सारे बिंदुओं को सुलझा लेने का दावा किया. गुरुवार को कैबिनेट की बैठक में हरी झंडी मिलने पर सोमवार को इस पर सर्वदलीय बैठक होगी.

सूत्रों के मुताबिक नए बिल में सहमति से सेक्स की उम्र 18 से घटाकर 16 साल की जाएगी. इस बिल के अन्य मुख्‍य बिंदु इस प्रकार हैं:
1. रेप को लेकर गलत शिकायत करने पर होगी कार्रवाई.
2. छूना भी अपराध माना जाएगा.
3. घूरना और पीछा करना गैर-जमानती अपराध होगा.
4. विडियोग्राफी करना भी गैर-जमानती होगा.

सूत्रों ने कहा कि मसौदा विधेयक से गलत शिकायत करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग को हटा दिया गया. उन्होंने कहा कि मंत्री समूह के बीच इस बात को लेकर सर्वसम्मति थी कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए वर्तमान कानून पर्याप्त हैं और यह सिर्फ उन्हें लागू करने की बात है.

विधेयक आपराधिक कानून अध्यादेश का स्थान लेगा जिसे 16 दिसम्बर को दिल्ली में हुए सामूहिक बलात्कार के परिप्रेक्ष्य में लोगों के गुस्से को देखते हुए तीन फरवरी को लाया गया था. संसद के 22 मार्च से अवकाश से पहले इस अध्यादेश को मंजूरी देनी होगी और ऐसा नहीं होने पर चार अप्रैल को यह अध्यादेश खत्म हो जाएगा.

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सूत्रों ने कहा कि मंत्री समूह ‘बलात्कार’ शब्द की जगह ‘यौन हमला’ करने के पक्ष में नहीं था जैसा कि विधेयक में प्रस्तावित किया गया था. उन्होंने कहा कि इसने बलात्कार को लैंगिक विशेष बनाने का निर्णय किया जिसका अर्थ है कि यह केवल किसी महिला के खिलाफ हो सकता है. कुकर्म जैसे अपराधों को यौन अपराध अधिनियम के तहत बच्चों की सुरक्षा कानून से निपटा जाएगा.

गौरतलब है कि महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनों को सख्त बनाने वाले विधेयक के कई मुद्दों पर मंत्रियों में असहमति थी. सबसे अहम मुद्दा ये था कि सहमति से सेक्स की उम्र कितनी हो. इसकी उम्र सीमा 18 साल से घटाकर 16 साल करने के प्रस्ताव पर महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ को एतराज था. EGoM में कपिल सिब्बल ने घूरने को रेप से अलग रखने की बात कही, जिसके बाद इसे गैर जमानती अपराध बनाने पर सहमति बनी.

समाजवादी पार्टी जैसे कुछ दलों को अध्यादेश के कुछ प्रावधानों पर गंभीर आपत्ति है और इनका दावा है कि इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है.

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