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Explainer: MSP गारंटी कानून क्यों चाहते हैं किसान, क्या है डिमांड, क्या है इस मांग को लेकर पेंच?

कृषि कानूनों की वापसी के ऐलान के बावजूद किसान संगठन आंदोलन खत्म नहीं कर रहे हैं. किसानों अब भी MSP की गारंटी पर कानून बनाने की मांग पर अड़े हुए हैं. हालांकि, सरकार पहले ही बोल चुकी है कि वो इस पर लिखित आश्वासन देने को तैयार है.

किसानों की मांग है MSP की गारंटी पर बनाया जाए कानून. (फाइल फोटो-PTI) किसानों की मांग है MSP की गारंटी पर बनाया जाए कानून. (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • MSP की गारंटी पर कानून की मांग
  • सरकार लिखित आश्वासन के लिए तैयार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने (Farm Laws Repealed) का ऐलान कर दिया है, लेकिन किसान संगठन अब भी आंदोलन खत्म करने को राजी नहीं हैं. आज लखनऊ में किसानों की महापंचायत हुई. 27 नवंबर को संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की फिर बैठक होनी है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगा. किसान नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने साफ कर दिया है कि कृषि कानूनों की वापसी ही नहीं, बल्कि जब तक उनकी बाकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक आंदोलन जारी ही रहेगा. इसमें सबसे बड़ी मांग न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP की गारंटी पर कानून की है. आखिर क्या है किसानों की मांग? कहां फंस रहा है पेंच? आइए जानते हैं...

सबसे पहले MSP क्या है?

MSP यानी मिनिमम सपोर्ट प्राइस. ये एक तरह की गारंटीड कीमत होती है, जो किसान को उनकी फसल पर मिलती है. अगर बाजार में उस फसल की कीमत कम भी होगी तो भी उस फसल की जितनी MSP होगी, वही कीमत किसान को मिलेगी. ऐसा करने के पीछे तर्क दिया जाता है कि बाजार में फसलों की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर किसानों पर न पड़े. उन्हें अपनी फसल की न्यूनतम कीमत मिलती रहे. 

CACP तय करती है किस फसल पर कितनी मिलेगी MSP

किसी फसल पर कितनी MSP होगी, उसे कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइसेस (CACP) तय करती है. CACP की सिफारिश पर ही सरकार फसलों पर MSP तय करती है. अगर किसी फसल की बंपर पैदावार होती है तो उसकी कीमत गिर जाती है, ऐसे में MSP कीमतों के गिरने पर किसानों को बचाने वाली बीमा पॉलिसी की तरह काम करती है. MSP के तहत अभी 22 फसलों की खरीद की जा रही है. इनमें धान, गेहूं, ज्वार, बाजरा, मक्का, मूंग, मूंगफली, सोयाबीन, तिल और कपास जैसी फसलें शामिल हैं.

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जब MSP है तो फिर किस बात की मांग कर रहे हैं किसान?

MSP को लेकर जब देश में व्यवस्था है तो फिर किसान मांग क्यों कर रहे हैं? तो ऐसा इसलिए क्योंकि किसानों को डर है कि कहीं MSP खत्म न कर दी जाए. दरअसल, सरकार ने जो तीन कृषि कानून बनाए थे, उनमें एक कानून ये भी था जो किसानों को निजी मंडियों में फसल बेचने की इजाजत देता था. इससे किसानों को आशंका हुई कि कहीं MSP को भी खत्म न हो जाए.

हालांकि, सरकार बार-बार कह रही है कि MSP को कभी खत्म नहीं किया जा सकता. लेकिन किसान सरकार से कानून बनाने की मांग कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि सरकार ऐसा कानून बनाए जिससे MSP की गारंटी मिल सके. राकेश टिकैत का कहना है कि अगर सच में कृषि सुधार करना चाहते हैं तो MSP की गारंटी का कानून बनाया जाए.

इसके अलावा एक वजह ये भी है कि CACP MSP की सिफारिश तो कर सकती है लेकिन उस पर आखिरी फैसला सरकार ही करती है. दूसरा ये कि CACP भले ही MSP पर सिफारिश कर दे, लेकिन सरकार की ऐसी कोई कानूनी बाध्यता नहीं है कि वो उस सिफारिश को माने ही. साथ ही MSP पर कोई फसल खरीदना या नहीं खरीदना भी, सरकार के ऊपर निर्भर है. सरकार MSP पर फसल खरीदने के लिए मजबूर नहीं है.

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सरकार का क्या है कहना?

सरकार फिलहाल तो MSP की गारंटी पर कानून बनाने के मूड में नहीं दिख रही है. पिछले साल जब किसानों और सरकार के बीच बातचीत हुई थी तो सरकार ने 22 पेज का एक प्रस्ताव दिया था. इसमें सरकार की ओर से कहा गया था कि वो MSP पर फसलों की खरीद जारी रहने की बात लिखित में देने को तैयार है. इसके साथ ही पिछले साल केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने MSP पर कानून बनाए जाने के सवाल पर कहा था कि MSP को लेकर देश में कोई कानून है, लेकिन फिर भी खरीद हो रही थी और हो रही है. उन्होंने कहा था कि जब बिना कानून के दशकों से MSP पर खरीद हो रही है तो आगे भी ये खरीद जारी ही रहेगी.

 

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