नेशनल सेंटर फ़ॉर डिसीज कंट्रोल (NCDC) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत में नोवेल कोरोना वायरस का “नया डबल म्युटेंट वैरीएंट” पाया गया है. बड़ा सवाल ये है कि क्या इस वैरीएंट की वजह से ही भारत में कोविड-19 केसों की संख्या में इतना बड़ा उछाल देखा जा रहा है.
इस वैरीएंट को 'B.1.617' का नाम दिया गया है. ये वैरीएंट अब तक आठ देशों में पाया जा चुका है. समझा जाता है कि इनमें म्युटेशन वाले करीब 70 फीसदी सैम्पल्स की उपज भारत में हुई है. विशेषज्ञ नए डबल म्यूटेंट स्ट्रेन को देसी (भारतीय) वैरीएंट बता रहे हैं. इससे पहले 'E484Q' और 'L425R' डबल म्युटेशन कर रहे थे जिससे कोरोना वायरस के अधिक संक्रामक वैरीएंट्स सामने आ रहे थे.
अशोका यूनिवर्सिटी में त्रिवेदी स्कूल ऑफ बायोसाइंसेज के निदेशक और वायरोलॉजिस्ट डॉ शहीद जमील कहते हैं, “एक और म्यूटेंट है- E484K, इसी का हल्का वैरीएशन अब भारतीय वैरीएंट का हिस्सा है. जिस डबल म्यूटेंट को लेकर भारत में बात हो रही है, वो ऐसा वैरीएंट हैं जिसमें 15 अलग अलग म्यूटेशंस हैं. स्पाइक प्रोटीन के रीजन में दो क्रिटिकल म्यूटेशंस पाए गए हैं. इनमें से एक म्यूटेशन कैलिफोर्निया में पाया गया, और इसीसे दक्षिण कैलिफोर्निया में वायरस का फैलाव बढ़ा, अगर ये वहां हो सकता है तो भारत में ऐसा क्यों नहीं हो सकता.”
क्या हमने देसी वैरीएंट पर वैक्सीन्स को टेस्ट किया?
कोवैक्सीन और कोविशील्ड दोनों को ही यूके वैरीएंट पर टेस्ट किया गया. पाया गया कि दोनों वैक्सीन यूके वैरीएंट से बचाव देने में सक्षम हैं. हालांकि, प्रतिरोधक क्षमता वायरस के कुछ वैरीएंट्स से जुड़ी एक एंटीबॉडी के आधार पर काम नहीं करती.
What is the double mutant and how is it different from the UK strain? Is Covishield effective against this Indian variant? Virologist Dr Shahid Jameel answers.
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डॉ शाहिद जमील कहते हैं, इम्युनिटी या प्रतिरोधक क्षमता वायरस की मल्टीपल साइड्स से जुड़े मल्टीपल एंटीबॉडीज के आधार पर काम करती है. इम्युनिटी T-सेल्स के आधार पर भी काम करती है जो वायरस संक्रमित कोशिकाओं को हटाती हैं. संक्रमण को लेकर लोगों में एक भ्रांति यह है कि कोई भी वैक्सीन संक्रमण के खिलाफ टेस्ट नहीं की गई. सभी वैक्सीन बीमारी के खिलाफ बचाव देती हैं.”
ILBS हॉस्पिटल के हेड और दिल्ली सरकार के मुख्य सलाहकार डॉ एस के सरीन कहते हैं- “भारतीय स्ट्रेन जो है वो दक्षिण अफ्रीकी, यूके और ब्राजीलियन स्ट्रेन का एक तरह से हाइब्रिड है. हमें सिर्फ एक या दो स्ट्रेन मिले हैं जिन्हें हम डबल म्युटेंट्स कहते हैं; ऐसे सैकड़ों हो सकते हैं. कोविशील्ड (एस्ट्राजेनेका) वैक्सीन को जब साउथ अफ्रीकी वैरीएंट पर ट्राई किया गया तो ये पानी से बेहतर नहीं थी.”
"We are worried, virus is spreading, peak will only come once we have clarity on the speed with which the virus is going. This is going to be a surge and we need to watch ourselves very closely for fatalities and for problems": Dr SK Sarin
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डॉ सरीन ने आगे कहा, “हम इस बात को लेकर साफ हैं कि भारत में कुछ वैरीएंट्स एक दक्षिण अफ्रीकी वैरीएंट से मार्च के महीने में कभी शुरू हुए. हमारे यहां दक्षिण अफ्रीकी वैरीएंट्स में उछाल आया हो सकता है जहां एक वैक्सीन कारगर नहीं रहती. यहां तक कि स्पूतनिक-V भी कुछ वैरीएंट्स के खिलाफ काम नहीं करती.”
भारत की दूसरी लहर में देसी म्यूटेंट की भूमिका
म्यूटेशन वायरस की प्रकृति से जुड़ा है. विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना वायरस म्यूटेशंस की जब से भारत ने सीक्वेंसिंग शुरू की है, करीब 5,000 म्यूटेंट वैरिएंट्स को खोजा जा चुका है. विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि वायरस नहीं चाहता कि लोगों में हर्ड इम्युनिटी विकसित की हो.
डॉ सरीन कहते हैं, “मान लीजिए कि आप पहले एक वायरस से संक्रमित हो चुके हैं, आपको दूसरा या तीसरा संक्रमण भी हो सकता है.”
भारत में हर दिन नए कोविड-19 केसों का आंकड़ा करीब 2 लाख की संख्या को छू रहा है. अब ये वैरीएंट कई राज्यों में पाया जा रहा है. महाराष्ट्र में जो केस सामने आ रहे हैं, उनमें से 61 फीसदी ‘देसी’ म्यूटेंट वैरीएंट हैं.
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ से भी ऐसे ही केस रिपोर्ट हो रहे हैं.
"The best vaccine today is a mask," says ILBS Director Dr SK Sarin. Dr Giridhar Babu explains the two things we need to understand about the second wave.
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डॉ जमील कहते हैं, “हर राज्य में हमने कुछ स्प्रेडर इवेंट्स को देखा. ये सवाल भी उठता है- 2020 में बिहार क्यों नहीं? क्योंकि वायरस ने इस हद तक म्युटेट नहीं किया था. यूके वैरीएंट इम्युनिटी पर आक्रमण अधिक तीव्रता से करता है. ये ट्रांसमिट भी अधिक करता है. ये पंजाब में मौजूद है. ये दिल्ली में भी तेजी से फैल रहा है.” एपिडिमियोलॉजिस्ट्स का कहना है कि काफी म्युटेशन्स हो रहे हैं. लाइफकोर्स एपिडमियोलॉजी, PHFI के प्रोफेसर और हेड डॉ गिरिधर कहते हैं, “हमने इस बुलेट को पूरी तरह नहीं समझा है. विदेशी वैरीएंट्स की तुलना में हम इन घरेलू वैरीएंट्स की हद को नहीं जानते.”
क्या म्युटेशन्स वैक्सीन्स से बच निकल रहे हैं?
भारत में ऐसी स्टडीज हो रही है जिससे पता लगाया जा सके कि क्या देसी वैरीएंट वैक्सीन्स से बच निकल रहे हैं. इन स्टडीज के नतीजे अगले दो हफ्ते में उपलब्ध हो सकते हैं.
सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलीक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) के निदेशक डॉ राकेश के मिश्रा कहते हैं, “वायरस का म्यूटेट करना जारी रह सकता है और इससे नए वैरीएंट्स पैदा हो सकते हैं. एक वैरीएंट जिसमें अपना वजूद बचाए रखने की कुछ ज्यादा क्षमता होती है. फिर वायरस दूसरे वायरस की जगह ले लेता है. यह सामान्य प्रक्रिया है.”
Hospitals reel under pressure, long queues at crematoriums as the number of cases continue to rise across the country. Here's a report
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डॉ राकेश मिश्रा के मुताबिक CCMB की ओर से इन विट्रो न्यूट्रिलाइजेशन एस्से का इस्तेमाल कर स्टडीज की जा रही है.
डॉ मिश्रा ने इंडिया टुडे को बताया, हमने लैब्स में वायरस के नए वैरीएंट्स को कल्चर करना शुरू किया है. ये कल्चर्ड वायरस जो लोग रिकवर्ड हो चुके हैं, उनसे लिए गए सीरम के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे. जिन्हें वैक्सीन के दो शॉट्स लग चुके हैं, उनके सीरम के लिए भी इस्तेमाल होंगे. इससे हमें पता चलेगा कि पहले वाले संक्रमण से पैदा हुई इम्युनिटी क्या नए वैरीएंट्स के खिलाफ भी उतनी ही कारगर है.”
क्या नए डबल म्युटेंट वैरीएंट में वैक्सीन से बचने की क्षमता है, इस सवाल के जवाब में डॉ मिश्रा ने कहा, हम नहीं जानते, शायद नहीं. लेकिन भविष्य में हम गारंटी नहीं दे सकते कि नए वैरीएंट्स इस संदर्भ में अधिक परेशानी देने वाले नहीं होंगे.”