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हरीश साल्वे बोले- चीन एक ताकतवर देश, वह किसी के दबाव में आने वाला नहीं

पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे का मानना है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यव्स्था चीन की है, सबसे ज्यादा आबादी उसके पास है. आर्थिक रूप से वह बेहद मजबूत देश है. उसके पास बड़ी फौज भी है. वह परमाणु संपन्न देश भी है तो ऐसा कोई कारण नहीं लगता कि वह ऐसा कोई समझौता करेगा. इसके लिए सबको एक साथ आना पड़ेगा.

चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग (फाइल-एपी) चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग (फाइल-एपी)

  • 'वैश्विक स्तर पर एक होकर कर सकते हैं चीन को अलग-थलग'
  • चीन पहले ही कोरोना पर अपना रुख साफ कर चुकाः हरीश साल्वे
दुनियाभर में कोरोना वायरस फैलाने को लेकर चीन के खिलाफ आवाज लगातार बुलंद होती जा रही है. कोरोना के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराते हुए उस पर क्या किसी तरह का दबाव बनाया जा सकता है, पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे कहते हैं कि चीन एक ताकतवर देश है और वह किसी के दबाव में आने वाला नहीं है.

पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने इंडिया टुडे के साथ खास बातचीत में कहा कि आज की तारीख में मुझे नहीं लगता कि चीन इस संबंध में किसी तरह का कोई समझौता करेगा. वह किसी भी तरह के समझौते पर राजी नहीं होगा. चीन पहले ही इस पर अपना रुख साफ कर चुका है. वह कह चुका है कि इसके लिए वह जिम्मेदार नहीं है और तो और वह खुद वायरस का पीड़ित भी रहा है.

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हरीश साल्वे ने कहा कि चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यव्स्था वाला देश है, सबसे ज्यादा आबादी उसके पास है. आर्थिक रूप से वह बेहद मजबूत देश है. उसके पास बड़ी फौज भी है. वह परमाणु संपन्न देश भी है तो ऐसा कोई कारण नहीं लगता कि वह ऐसा कोई समझौता करेगा.

पूर्व सॉलिसिटर जनरल के अनुसार, अगर पूरी दुनिया एक हो जाए और चीन को अलग-थलग कर दिया जाए, आर्थिक रूप से बहिष्कार किया जाए तो कुछ हो सकता है, लेकिन यह तभी होगा जब कोरोना खत्म हो जाए.

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'हर किसी का अपना-अपना हित'

उन्होंने कहा कि हर देश का अपना-अपना आर्थिक हित है. अभी हर देश का अपना-अपना राजनीतिक और आर्थिक हित है, वह उसी आधार पर काम करेंगे. चीन के साथ हमारे आर्थिक संबंध किस तरह के हैं इस पर बहुत कुछ निर्भर करेगा और यही आर्थिक संबंध हैं जो वैश्विक एकता पर भी असर डालेंगे.

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करीब 100 साल पहले हुए विश्व युद्ध का जिक्र करते हुए पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने कहा कि पहले विश्व युद्ध और दूसरे विश्व युद्ध के लिए उस समय की परिस्थितियां और संधियां जिम्मेदार थीं. इन दोनों विश्व युद्धों के बाद कई चीजें उभर कर सामने आईं. पहले विश्व युद्ध के बाद वारसा की संधि हुई और इस संधि ने जर्मनी को काफी नुकसान पहुंचाया, जिस कारण जर्मनी को आगे चलकर प्रतिक्रिया देनी पड़ी. हिटलर को अपना अभियान चलाना पड़ा. इसके बाद सब इतिहास है.

अमेरिका की चेतावनी

कोरोना वायरस की वजह से जन और धन का खासा नुकसान झेलने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि चीन के प्रति उनसे ज्यादा सख्त और कोई नहीं हो सकता. राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर चीन प्रावधानों का पालन नहीं करता तो वह उसके साथ हुई ट्रेड डील को खत्म कर देंगे. चीन से उत्पन्न कोरोना वायरस महामारी को लेकर दोनों देशों के नेताओं के बीच काफी बयानबाजी चल रही है.

यहां तक अमेरिकी सत्ता प्रतिष्ठान इस बारे में संदेह जता रहा है कि कहीं यह वायरस चीन की किसी लैब से तो नहीं निकला है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद कई बार इसे 'चीनी वायरस' कह चुके हैं.

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