बच्चे न हों! महिलाएं निकलवा रहीं फैलोपियन ट्यूब, इस नए तरीके से ओवरी कैंसर का खतरा भी कम

कनाडा में अब कई महिलाएं स्थायी गर्भनिरोध (permanent birth control) के लिए फैलोपियन ट्यूब हटवाने का विकल्प चुन रही हैं. डॉक्टरों के मुताबिक यह प्रक्रिया न सिर्फ गर्भधारण को रोकती है, बल्कि कुछ मामलों में ओवरी कैंसर के खतरे को भी कम कर सकती है.

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हुमरा असद

  • टोरंटो,
  • 23 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:32 AM IST

फ्रांज़िस्का बोहम लंबे समय से जानती थीं कि उन्हें बच्चे नहीं चाहिए. इसी वजह से उन्होंने अपने फैमिली डॉक्टर से ट्यूबल लिगेशन यानी फैलोपियन ट्यूब्स को बंधवाने की बात कही लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें उस समय बार-बार अलग-अलग गर्भनिरोधक विकल्प जैसे IUD अपनाने की सलाह दी.

कई सालों की बातचीत और इंतजार के बाद, आखिरकार 28 साल की उम्र में जब सर्जन ने उन्हें ट्यूबल लिगेशन की जगह फैलोपियन ट्यूब हटाने (bilateral salpingectomy) की सलाह दी, तो उन्होंने यह प्रक्रिया करवा ली. फ्रांज़िस्का का कहना है कि लंबे समय तक डॉक्टर उनसे ये कहते रहे कि वह अभी बहुत छोटी हैं और बाद में उनका फैसला बदल सकता है.

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इसी तरह एडमोंटन की 41 वर्षीय एंजेल लामाए ने भी बताया कि उन्हें भी युवावस्था में यही कहा गया कि वे स्थायी गर्भनिरोध के लिए तैयार नहीं हैं लेकिन बाद में उन्होंने 2021 में यह सर्जरी करवाई और अब वे इस फैसले से संतुष्ट हैं.

ट्यूबल लिगेशन की जगह नई प्रक्रिया

डॉक्टरों के अनुसार अब ट्यूबल लिगेशन की जगह यह नई प्रक्रिया तेजी से अपनाई जा रही है, जिसमें फैलोपियन ट्यूब को काटने या क्लिप करने के बजाय पूरी तरह हटा दिया जाता है. इसे bilateral salpingectomy कहा जाता है.

कैलगरी के रॉकीव्यू जनरल हॉस्पिटल की डॉ. फियोना मैटाटाल के अनुसार रिसर्च में यह पाया गया है कि फैलोपियन ट्यूब हटाने से ओवरी कैंसर के सबसे आम प्रकार का खतरा कम हो सकता है. यही वजह है कि अब कई सर्जन इस प्रक्रिया को प्राथमिकता दे रहे हैं.

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ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर जिलियन हैनली और उनकी टीम के अध्ययन में 2008 से 2020 के बीच करीब 85,000 मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया गया. इसमें पाया गया कि जिन महिलाओं की फैलोपियन ट्यूब हटाई गई थी, उनमें हाई-ग्रेड सीरस कार्सिनोमा यानी ओवरी कैंसर के सबसे आम प्रकार का खतरा लगभग 78 प्रतिशत तक कम था.

शोधकर्ताओं का कहना है कि कई मामलों में ओवरी कैंसर की शुरुआत अंडाशय में नहीं बल्कि फैलोपियन ट्यूब में होती है, इसलिए यह प्रक्रिया ज्यादा प्रभावी मानी जा रही है.

इसके बाद गर्भधारण संभव नहीं

हालांकि डॉक्टर यह भी चेतावनी देते हैं कि यह प्रक्रिया पूरी तरह स्थायी है और इसके बाद प्राकृतिक रूप से गर्भधारण संभव नहीं होता. ऐसे में भविष्य में बच्चा चाहने पर केवल IVF ही विकल्प रह जाता है. इसी वजह से 35 साल से कम उम्र की महिलाओं को लेकर डॉक्टर अधिक सावधानी बरतते हैं.

2024 की एक कनाडाई स्टडी में यह भी सामने आया कि करीब 16 प्रतिशत महिलाओं ने बाद में इस फैसले पर पछतावा जताया, हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि सर्वे में वही लोग ज्यादा शामिल हो सकते हैं जो असंतुष्ट थे.

फिलहाल यह प्रक्रिया कनाडा के कई हिस्सों में धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रही है और इसे अक्सर दूसरी पेट या पेल्विक सर्जरी के साथ भी किया जा रहा है (opportunistic salpingectomy)। हालांकि मरीजों को इसके लिए कई महीनों से लेकर एक साल तक का इंतजार भी करना पड़ रहा है.

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