'भारत के आर्थिक चमत्कार का हिस्सा बनना चाहता है अमेरिका', अमेरिकी मंत्री का बड़ा बयान

दक्षिण एवं मध्य एशियाई मामलों के सहायक विदेश मंत्री डोनल्ड लू ने कहा है कि भारत की प्रगति ने केवल भारत के लिए, बल्कि पूरे विश्व के लिए फायदेमंद है. उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के आर्थिक चमत्कार में भागीदार बनना चाहता है.

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अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू का बड़ा बयान (Photo- IANS) अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू का बड़ा बयान (Photo- IANS)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 अप्रैल 2023,
  • अपडेटेड 8:32 AM IST

दक्षिण एवं मध्य एशियाई मामलों के सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू ने गुरुवार को बड़ा बयान देते हुए कहा कि भारत जितना अधिक विकास करेगा, यह भारत के लिए ही नहीं बल्कि अमेरिका और विश्व के लिए भी उतना ही फायदेमंद होगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका, नई दिल्ली के आर्थिक चमत्कार का हिस्सा बनना चाहता है. वैश्विक आर्थिक मंदी के बावजूद, भारत पिछले कई वर्षों से सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख विश्व अर्थव्यवस्थाओं में से एक है जिसकी अर्थव्यवस्था अब 3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की है.

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लू ने गिनाई भारत की खूबियां

भारत ने अब एक दशक में 10 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने और 2047 तक एक विकसित देश बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है. एक इंटरव्यू के दौरान डोनाल्ड लू ने कहा, 'हम आपके (भारत) आर्थिक चमत्कार का हिस्सा बनना चाहते हैं. एक समृद्ध भारत के पास जलवायु परिवर्तन और भविष्य की महामारियों जैसी वैश्विक समस्याओं से निपटने के लिए अधिक संसाधन होंगे.'

उन्होंने कहा कि अमेरिका को इस बात पर गर्व है कि वह दो लाख से अधिक भारतीय छात्रों की मेजबानी करता है, जो अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा, 'दरअसल, कुछ दिन पहले ही हमने भारत के वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़े दखे, जिससे पता चलता है कि हमारे द्विपक्षीय व्यापार और वस्तु व्यापार में सात फीसदी की अतिरिक्त वृद्धि हुई है. इससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को विस्तार करने में मदद मिलेगी और स्पष्ट है कि और इसमें अधिक प्रगति की गुंजाइश है. ट्रेड पॉलिसी फोरम, वाणिज्यिक संवाद, सीईओ फोरम के दौरान हुई हमारी बातचीत ने हमारी अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाने में मदद की.'

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उन्होंने आगे कहा,  'साथ ही, इस साल जनवरी में शुरू की गई क्रिटिकल इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज की पहल के माध्यम से हम अंतरिक्ष से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी भविष्य की तकनीकों पर अपने सहयोग को और मजबूत करना करना चाहते हैं. हम आपके आर्थिक चमत्कार का हिस्सा बनना चाहते हैं.'

लगातार बढ़ रहा है द्विपक्षीय व्यापार

भारत के साथ अमेरिकी वस्तु और सेवा व्यापार 2019 में लगभग 146.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर था जो 2022 में  बढ़कर 192 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया. इस साल, अमेरिका चीन को पछाड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन गया है. राष्ट्रपति जो बाइडेन जब वे उपराष्ट्रपति थे तो उन्होंने अपनी भारत यात्रा के दौरान कहा था कि द्विपक्षीय व्यापार का वार्षिक लक्ष्य 500 बिलियन अमरीकी डालर होना चाहिए.

भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 में, भारत को 81.72 बिलियन अमरीकी डालर की राशि का अब तक का सबसे अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्राप्त हुआ. अमेरिका 2020-21 के दौरान 13.82 बिलियन अमरीकी डालर के निवेश के साथ भारत का दूसरा सबसे बड़ा एफडीआई स्रोत बन गया. भारतीय FDI के लिए अमेरिका शीर्ष 5 निवेश स्थलों में से एक है.

द्विपक्षीय संबधों को मजबूत करते हैं ये फोरम

भारत और अमेरिका के बीच आपसी आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए कम से कम आधा दर्जन संवाद तंत्र काम कर रहे हैं जिनमें -भारत-अमेरिका व्यापार नीति मंच, भारत-अमेरिका वाणिज्यिक संवाद, भारत-अमेरिका सीईओ मंच, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, भारत-अमेरिका आर्थिक और वित्तीय भागीदारी संवाद और भारत-प्रशांत आर्थिक ढांचा (आईपीईएफ) शामिल हैं.

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व्यापार से संबंधित मामलों पर चर्चा करने के लिए 2005 में गठित 'भारत-अमेरिका व्यापार नीति फोरम' एक अग्रणी द्विपक्षीय तंत्र है. भारत और अमेरिका वाणिज्यिक संवाद मानकों में सहयोग करना, व्यापार करने में आसानी, यात्रा और पर्यटन तथा वाणिज्यिक महत्व के अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करना शामिल हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा करने के लिए दोनों पक्षों की तरफ से सरकार और उद्योग जगत को एक साथ लाने के लिए 2005 में आईसीटी पर एक संयुक्त कार्य समूह की स्थापना की गई थी. 

 

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