ड्रोन शूट के बाद क्या अमेरिका और ईरान जंग की ओर बढ़ रहे... बातचीत से पहले बढ़ी टेंशन

अरब सागर में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर के करीब पहुंचे ईरानी ड्रोन को अमेरिकी फाइटर जेट ने मार गिराया. ये घटना ऐसे वक्त हुई जब वॉशिंगटन-तेहरान के बीच न्यूक्लियर बातचीत की तैयारी चल रही है. सवाल उठ रहा है कि क्या ड्रोन शूटडाउन तनाव को फिर भड़काएगा.

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ड्रोन शूटडाउन से तनाव बढ़ गया है. ड्रोन शूटडाउन से तनाव बढ़ गया है.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:02 PM IST

अरब सागर में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर सतह पर आ गया है. अमेरिकी सेना ने पुष्टि की है कि उसने ईरान का एक निगरानी ड्रोन मार गिराया, जो अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन की ओर बढ़ रहा था. यह कार्रवाई 3 फरवरी को हुई.

ड्रोन गिराए जाने और होर्मुज में जहाज को घेरने की घटनाओं ने क्षेत्रीय तनाव को फिर बढ़ा दिया है. ऐसे वक्त में जब बातचीत की कोशिशें जारी हैं. सवाल उठ रहा है कि क्या यह ड्रोन शूटडाउन किसी बड़े सैन्य टकराव का ट्रिगर पॉइंट बन सकता है.
 
यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने बताया कि यूएसएस अब्राहम लिंकन से उड़ान भरने वाले F-35C फाइटर जेट ने Shahed-139 मॉडल के ईरानी ड्रोन को मार गिराया. उनके मुताबिक यह कार्रवाई आत्मरक्षा में और जहाज पर मौजूद सैनिकों व स्टाफ की सुरक्षा के लिए की गई.

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कैरियर की ओर बढ़ रहा था ड्रोन

CENTCOM के अनुसार ईरानी ड्रोन आक्रामक तरीके से अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर की ओर बढ़ रहा था और उसका इरादा साफ नहीं था. अमेरिकी बलों ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में तनाव कम करने के कई उपाय किए, लेकिन इसके बावजूद ड्रोन जहाज की दिशा में उड़ता रहा. इसके बाद उसे निशाना बनाया गया.

ईरान से करीब 800 किलोमीटर दूर हुआ शूटडाउन

अमेरिकी सेना के मुताबिक यूएसएस अब्राहम लिंकन उस वक्त ईरान के दक्षिणी तट से करीब 800 किलोमीटर दूर अरब सागर में तैनात था. ड्रोन को इसी इलाके में मार गिराया गया. इस घटना में किसी भी अमेरिकी सैनिक के घायल होने या सैन्य उपकरण को नुकसान की सूचना नहीं है.

ईरान की चुप्पी, तस्नीम ने ड्रोन से संपर्क टूटने की पुष्टि की

इस घटना पर ईरानी सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई. हालांकि ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने सूत्रों के हवाले से बताया कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक ड्रोन से संपर्क टूट गया था. एजेंसी के मुताबिक ड्रोन ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को डेटा भेज दिया था और संपर्क टूटने के कारणों की जांच की जा रही है.

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बातचीत की तैयारी के बीच हुआ ड्रोन कांड

यह घटना ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कुछ हद तक कम होता दिख रहा था और दोनों देशों के बीच न्यूक्लियर बातचीत की तैयारी चल रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के हफ्तों में ईरान पर दबाव बढ़ाया है, जबकि तेहरान ने भी बातचीत के संकेत दिए हैं.

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेशेज़कियान ने कहा है कि उन्होंने अपने विदेश मंत्री को निर्देश दिया है कि यदि अनुकूल माहौल बने तो निष्पक्ष और सम्मानजनक बातचीत की जाए.

शुक्रवार को संभावित बातचीत, जगह पर मंथन

सूत्रों के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शुक्रवार को हो सकती है. तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार बैठक के लिए जगह तय करने पर विचार चल रहा है और तुर्किये, ओमान समेत कई देशों ने मेजबानी की पेशकश की है. व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने भी कहा है कि ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ इस हफ्ते ईरानी अधिकारियों से बातचीत कर सकते हैं.

होर्मुज जलडमरूमध्य में दूसरा टकराव

इसी दिन एक और घटना में यूएस सेंट्रल कमांड ने आरोप लगाया कि ईरान के IRGC के दो गनबोट्स और एक मोहाजेर ड्रोन ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी झंडे वाले एक व्यापारी जहाज को घेरने और जब्त करने की धमकी दी. बाद में अमेरिकी नौसेना के हस्तक्षेप से हालात काबू में आए. ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने हालांकि दावा किया कि जहाज ईरानी जलक्षेत्र में बिना अनुमति घुसा था और चेतावनी के बाद लौट गया.

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