US ने 'आतंकियों' से मिलाया हाथ, ईरानी सेना को तबाह करने में कर रहा मदद

ईरानी कुर्द मिलिशिया ने हाल के दिनों में अमेरिका से संपर्क कर पश्चिमी ईरान में सुरक्षा बलों पर संभावित हमले को लेकर चर्चा की है. सूत्रों के अनुसार समूह अमेरिकी सैन्य और खुफिया समर्थन चाहता है. अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. इस संभावित ऑपरेशन का क्षेत्रीय स्थिरता पर बड़ा असर पड़ सकता है.

Advertisement
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. (Photo: AP) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. (Photo: AP)

aajtak.in

  • वॉशिंगटन,
  • 04 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:49 PM IST

ईरान से जुड़ा एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. जानकारी के मुताबिक ईरानी कुर्द मिलिशिया समूहों ने हाल के दिनों में अमेरिका से यह चर्चा की है कि पश्चिमी ईरान में सुरक्षा बलों पर हमला किया जाए या नहीं और अगर किया जाए तो कैसे किया जाए. इस मामले की जानकारी रखने वाले तीन सूत्रों ने बताया कि यह बातचीत संवेदनशील सैन्य योजना से जुड़ी है.

Advertisement

ईरानी कुर्द समूहों का एक गठबंधन ईरान-इराक सीमा के पास इराकी कुर्दिस्तान के अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र में सक्रिय है. बताया गया है कि ये समूह संभावित हमले की तैयारी के लिए प्रशिक्षण ले रहे हैं. उनका उद्देश्य ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करना बताया जा रहा है.

ईरानी कुर्द समूहों की अमेरिका से रणनीतिक चर्चा

सूत्रों के अनुसार यह योजना ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका और इजरायल ईरान के ठिकानों पर बम और मिसाइल से हमले कर रहे हैं. दो सूत्रों ने कहा कि इस ऑपरेशन का लक्ष्य ईरान में इस्लामिक शासन के विरोधियों को मौका देना हो सकता है, खासकर तब जब सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और अन्य शीर्ष अधिकारियों के मारे जाने की बात कही जा रही है.

हालांकि अभी तक किसी अंतिम फैसले की घोषणा नहीं हुई है और ऑपरेशन के समय को लेकर भी स्पष्टता नहीं है. सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर यह जानकारी दी. बताया गया है कि कुर्द समूहों ने अमेरिका से सैन्य समर्थन की मांग की है. दो सूत्रों ने कहा कि वे सीआईए की मदद से हथियार उपलब्ध कराने पर भी बातचीत कर रहे हैं. इस बीच इरबिल और बगदाद के इराकी नेता भी हाल के दिनों में अमेरिकी प्रशासन के संपर्क में रहे हैं.

Advertisement

पश्चिमी ईरान में सुरक्षा बलों पर हमले की संभावित योजना

सीआईए की संभावित भूमिका पर पहली रिपोर्ट सीएनएन ने दी थी. वहीं एक्सियोस ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इराकी कुर्दिस्तान के दो शीर्ष नेताओं से फोन पर बातचीत की थी. हालांकि रॉयटर्स स्वतंत्र रूप से यह पुष्टि नहीं कर सका कि सीआईए की भागीदारी कितनी है, क्या हथियारों की आपूर्ति में मदद की गई है या अमेरिकी बल सीधे ईरान में प्रवेश करेंगे.

सीआईए ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार किया है. व्हाइट हाउस और पेंटागन की ओर से भी तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. कुर्द क्षेत्रीय सरकार ने भी कोई जवाब नहीं दिया. विशेषज्ञों का मानना है कि इराक की जमीन से किसी भी ऑपरेशन के लिए अमेरिका के व्यापक सैन्य और खुफिया समर्थन की जरूरत होगी. पेंटागन का कहना है कि इरबिल में मौजूद दो अमेरिकी ठिकाने इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गठबंधन को समर्थन देते रहे हैं.

सीआईए की भूमिका और अमेरिकी सैन्य समर्थन की मांग

यह संभावित कार्रवाई ईरान के भीतर जातीय बलूच अल्पसंख्यक के सशस्त्र अलगाववादी आंदोलन को भी हवा दे सकती है. बलूच समूहों के पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सक्रिय संगठनों से करीबी संबंध बताए जाते हैं. माना जा रहा है कि पाकिस्तान किसी भी तरह के बलूच अलगाव की कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगा.

Advertisement

तुर्की की भूमिका भी अहम मानी जा रही है. तुर्की, जो सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा का समर्थक है, दमिश्क और कुर्द बलों के बीच समझौते को सीरिया में राज्य नियंत्रण बहाल करने के लिए जरूरी मानता है. तुर्की पहले ही उत्तरी सीरिया में कुर्द डेमोक्रेटिक फोर्सेज के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दे चुका है यदि वे केंद्र सरकार के अधीन नहीं आते.

इराक, तुर्की और पाकिस्तान पर पड़ सकता है असर

अंकारा लंबे समय से कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी के साथ शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और अपनी सीमाओं के पास कुर्द समूहों को हथियारबंद किए जाने के प्रति सहानुभूति नहीं दिखाएगा. इस पूरे घटनाक्रम से क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. फिलहाल सबकी नजर इस बात पर है कि आगे क्या फैसला लिया जाता है और क्या यह योजना अमल में लाई जाती है या नहीं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement