जंग को लंबी खींच रहा ईरान, जानें- अमेरिका के पास अब बचे कितने हथियार

अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष में अमेरिकी हथियार भंडार पर भारी दबाव देखा जा रहा है. CSIS की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने अपनी कई प्रमुख मिसाइलें और डिफेंस सिस्टम इस्तेमाल कर लिए हैं, जिससे भविष्य के युद्धों के लिए चिंता बढ़ गई है.

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ट्रंप ने ईरान को लेकर चल दिया ट्रंप कार्ड. (Photo: Reuters) ट्रंप ने ईरान को लेकर चल दिया ट्रंप कार्ड. (Photo: Reuters)

आकाश शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 23 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:34 PM IST

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच सीजफायर पर आशंका के बादल छाये हुए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बिना किसी तय समयसीमा के सीजफायर बढ़ा दिया है और कहा है कि यह तब तक जारी रहेगा जब तक तेहरान 'एकजुट प्रस्ताव' पेश नहीं करता. लेकिन इस बीच अमेरिका की ओर से जारी नाकेबंदी को ईरान ने 'जंग जैसा कदम' बताया है, जिससे टकराव का खतरा बरकरार है.

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50 से ज्यादा दिनों तक खिंच चुके इस संघर्ष का असर अब साफ दिखने लगा है. जहां ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हुई है, वहीं अमेरिकी हथियार भंडार पर भी भारी दबाव पड़ रहा है. वॉशिंगटन स्थित Center for Strategic and International Studies (CSIS) की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका अब तक अपने करीब 45% प्रिसीजन स्ट्राइक मिसाइल, 60% से ज्यादा THAAD इंटरसेप्टर और लगभग 50% पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम इस्तेमाल कर चुका है.

अमेरिका ने कितनी सैन्य ताकत झोंकी?

CSIS के विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के पास अभी भी मौजूदा युद्ध को जारी रखने के लिए पर्याप्त मिसाइलें हैं, लेकिन असली चिंता भविष्य के संघर्षों को लेकर है. इस विश्लेषण में सात प्रमुख हथियारों पर फोकस किया गया है- टॉमहॉक क्रूज मिसाइल, JASSM, THAAD, पैट्रियट (PAC-3), SM-3 और SM-6.

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टॉमहॉक मिसाइल की बात करें तो युद्ध से पहले इनके करीब 3100 यूनिट थे, जिनमें से 850 से ज्यादा इस्तेमाल हो चुके हैं. हर मिसाइल की कीमत करीब 2.6 मिलियन डॉलर है और इन्हें दोबारा बनाने में करीब 47 महीने लगते हैं. ये लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाली मिसाइलें हैं, जिन्हें अमेरिकी नौसेना के जहाजों और पनडुब्बियों से दागा जाता है.

डिफेंस सिस्टम पर सबसे ज्यादा दबाव

ईरान के सस्ते ड्रोन और क्रूज मिसाइलों के सामने अमेरिकी डिफेंस सिस्टम पर ज्यादा दबाव पड़ा है. THAAD सिस्टम के 360 में से 190-290 इंटरसेप्टर इस्तेमाल हो चुके हैं, यानी अब करीब 70 ही बचे हैं. हर इंटरसेप्टर की कीमत करीब 15.5 मिलियन डॉलर है और इन्हें दोबारा तैयार करने में 53 महीने लग सकते हैं.

वहीं पैट्रियट (PAC-3) सिस्टम का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ है. 2330 के स्टॉक में से 1060 से 1430 मिसाइलें इस्तेमाल हो चुकी हैं. हर मिसाइल की कीमत करीब 3.9 मिलियन डॉलर है. हालांकि इनका उत्पादन समय 42 महीने है, लेकिन फिर भी भंडार भरना आसान नहीं होगा.

THAAD और पैट्रियट मिलकर अमेरिका का “लेयर्ड डिफेंस” सिस्टम बनाते हैं—जहां THAAD ऊंचाई पर हमलों को रोकता है, वहीं पैट्रियट अंतिम रक्षा पंक्ति के रूप में काम करता है.

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हमलावर क्षमता भी घटी

JASSM मिसाइलों की बात करें तो 4400 में से 1000 से ज्यादा इस्तेमाल हो चुकी हैं, यानी करीब 25% भंडार खत्म हो चुका है. ये स्टेल्थ क्रूज मिसाइलें हैं, जिन्हें B-52 जैसे बमवर्षक विमानों से दागा जाता है और ये दुश्मन के मजबूत ठिकानों को निशाना बनाती हैं.

कितनी जल्दी भर पाएगा अमेरिका अपना भंडार?

अमेरिका के 2027 के रक्षा बजट से संकेत मिलता है कि वह अपने हथियारों का भंडार तेजी से भरना चाहता है. 2026 की तुलना में 2027 में टॉमहॉक मिसाइल की डिलीवरी 55 से बढ़ाकर 785 करने का लक्ष्य रखा गया है.

इसी तरह पैट्रियट मिसाइल 357 से बढ़ाकर 3203 और THAAD इंटरसेप्टर 55 से बढ़ाकर 857 करने की योजना है. SM-6 और SM-3 जैसे नौसैनिक इंटरसेप्टर की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है. हालांकि यह जरूरी नहीं कि यह 'इमरजेंसी' हो, लेकिन यह साफ संकेत है कि अमेरिका अपने सैन्य भंडार को फिर से मजबूत करना चाहता है.

सप्लाई चेन पर भी दबाव

रूस-यूक्रेन युद्ध और NATO की लॉजिस्टिक पहल के कारण पहले से ही सप्लाई चेन पर दबाव है. ऐसे में ईरान युद्ध के चलते हथियारों की कमी और डिलीवरी में देरी की आशंका बढ़ गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने कुछ यूरोपीय देशों को पहले से तय हथियारों की सप्लाई में देरी की चेतावनी भी दी है. कुल मिलाकर, अमेरिका के पास फिलहाल युद्ध जारी रखने की पर्याप्त क्षमता है, लेकिन लगातार उपयोग के कारण उसके हथियार भंडार पर दबाव साफ दिख रहा है. अगर संघर्ष लंबा खिंचता है या फिर नए मोर्चे खुलते हैं, तो यह दबाव और बढ़ सकता है. ऐसे में आने वाले समय में अमेरिका की सैन्य रणनीति और उत्पादन क्षमता दोनों की असली परीक्षा होगी.

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Report- विजयेश तिवारी

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