दो साल के मिनिमम लेवल पर US का इमरजेंसी क्रूड, घट गए 2.83 अरब लीटर तेल, ईरान वॉर की तपिश

अमेरिका ने अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को 1970 के दशक में अरब तेल प्रतिबंध के बाद कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया था. अमेरिका ऊर्जा विभाग के अनुसार ये दुनिया के सबसे बड़ा इमरजेंसी रिजर्व है. लेकिन इस बार ईरान जंग की वजह से इस रिजर्व में भी कटौती हुई है.  

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अमेरिका का इमरजेंसी क्रूड रिजर्व 2 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है. (File Photo: ITG) अमेरिका का इमरजेंसी क्रूड रिजर्व 2 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:12 PM IST

ईरान वॉर से पैदा हुए तेल संकट की आंच अमेरिका तक पहुंच गई है. इस जगं की वजह से दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क का तेल रिजर्व तेजी से घटा है. यूएस Energy Information Administration के ताजा आंकड़ों से पता चला है कि 15 मई को खत्म हुए हफ़्ते में कमर्शियल कच्चे तेल का भंडार 7.9 मिलियन बैरल कम हो गया. 7.9 मिलियन बैरल  यानी कि 1.25 अरब लीटर कच्चा तेल. यह विश्लेषकों की उम्मीद से कहीं ज़्यादा है.

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इसके साथ ही अमेरिका के स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) में भी 9.9 मिलियन बैरल की और गिरावट आई है. SPR अमेरिका का आपातकालीन कच्चे तेल का भंडार है. यह लगातार आठवां हफ़्ता है जब इसमें कमी दर्ज की गई है. इस गिरावट की वजह से अमेरिका का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व जुलाई 2024 के स्तर तक पहुंच गया है. 

अगर अमेरिका के कमर्शियल कच्चे तेल भंडार और स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व में आई कमी को जोड़ें तो कुल मिलाकर अमेरिका का 17.8 मिलियन बैरल तेल का रिजर्व इस जंग की वजह से कम हो गया है. 

अगर इसे लीटर में कहें तो ईरान जंग की वजह से अमेरिका का कुल तेल रिजर्व 2.83 अरब लीटर कम हो गया है. 

ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ईरान से जुड़ा युद्ध दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लगातार बाधित कर रहा है. 

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अमेरिका में स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व को 1970 के दशक में "तेल प्रतिबंध" के बाद बनाया गया था, ताकि गंभीर संकटों के दौरान कच्चे तेल की आपातकालीन आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके. 

होर्मुज स्ट्रेट के आस-पास चल रही लड़ाई और बढ़ते सैन्य तनाव ने यहां से तेल टैंकरों की आवाजाही को प्रभावित किया है. एनर्जी एक्सपर्ट का सलाह है कि इस व्यवधान के कारण होर्मुज के रास्ते होने वाले वैश्विक ऑयल फ्लो में लगभग 16 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कमी आई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई कम हो गई है और दुनिया भर के रिफाइनरियों और सरकारों पर दबाव बढ़ गया है. 

अमेरिका ने क्रूड रिफाइनिंग तेज किया

होर्मुज संकट के बाद अमेरिका ने अपनी रिफाइनरियों में कच्चे तेल की रिफाइनिंग तेज कर दी है. EIA के डेटा से पता चला कि पिछले हफ़्ते अमेरिकी रिफाइनरियां 91.6% क्षमता पर काम कर रही थीं. 

सप्लाई में कमी के साथ-साथ गैसोलीन की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं. 

इंडस्ट्री ट्रैकिंग डेटा के अनुसार इस हफ़्ते रेगुलर गैसोलीन की US राष्ट्रीय औसत कीमत बढ़कर $4.49 प्रति गैलन हो गई. यह इस दशक की शुरुआत में रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले के बाद आए एनर्जी संकट के बाद से अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. 

अमेरिका का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार

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रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को 1970 के दशक में अरब तेल प्रतिबंध के बाद कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया था. 

गल्फ कोस्ट के किनारे स्थित भूमिगत नमक की गुफाओं में रखा यह रिजर्व ऐतिहासिक रूप से भू-राजनीतिक झटकों और प्राकृतिक आपदाओं के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण सुरक्षा बफर के रूप में कार्य करता रहा है. 

जब से ईरान युद्ध शुरू हुआ है अमेरिका का रणनीतिक तेल भंडार 10 प्रतिशत कम हो गया है. 

बता दें कि अमेरिका इस समय दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में से एक है. इस लिहाज से अमेरिका में तेल की सप्लाई और डिमांड में आए बदलाव का पूरे एनर्जी मार्केट पर असर पड़ता है. 
 

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