अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों एक साथ गुस्से और तनाव में नजर आ रहे हैं. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले ने न केवल ट्रंप की टैरिफ लगाने की शक्ति को कमजोर कर दिया है, बल्कि व्यापारिक समझौतों में उनकी सौदेबाजी की क्षमता को भी कम कर दिया है. इससे बौखलाए ट्रंप ने उन देशों को चेतावनी दी है जो देश कोर्ट के फैसले का फायदा उठाकर अमेरिका के साथ खेल खेलेंगे, उन्हें पहले से ज्यादा टैरिफ झेलना पड़ेगा.
हालांकि अपने अस्थिर स्वभाव के लिए जाने जाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन यह टिप्पणी उस समय आई जब एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए वॉशिंगटन की निर्धारित यात्रा टाल दी. दरअसल, ट्रंप दुनियाभर के देशों के साथ व्यापार समझौता करने के लिए टैरिफ को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे थे. अब जब वह ताकत कमजोर हो गई है, ट्रंप को अंदेशा है कि टैरिफ के दबाव में हुए समझौतों पर देश पुनर्विचार कर सकते हैं.
इसी बीच उन्होंने तेजी दिखाते हुए आयात पर 10% का वैश्विक शुल्क घोषित किया. बाद में इसे बढ़ाकर 15% कर दिया गया, लेकिन यह केवल 150 दिनों तक प्रभावी रहेगा.
क्या ट्रंप का पोस्ट भारत के लिए कोई मैसेज है?
ट्रंप ने सोमवार शाम को ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'जो भी देश सुप्रीम कोर्ट के इस हास्यास्पद फैसले का फायदा उठाकर खेल खेलना चाहता है, खासकर वे जिन्होंने सालों-दशकों तक अमेरिका को लूटा है, उन्हें उस टैरिफ से भी कहीं ज्यादा ऊंचा शुल्क (हायर टैरिफ) और बुरा परिणाम भुगतना होगा, जो उन्होंने हाल ही में स्वीकार किया था.'
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह निशाना परोक्ष रूप से भारत की ओर हो सकता है, इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं. पहला ये कि इस पोस्ट के कुछ ही घंटे पहले भारत ने अपने व्यापार प्रतिनिधिमंडल की वॉशिंगटन यात्रा स्थगित कर दी थी, जिसका उद्देश्य इस महीने की शुरुआत में ट्रंप द्वारा घोषित अंतरिम व्यापार समझौते की शर्तों को अंतिम रूप देना था.
दूसरा कारण ये है 'लूटा' शब्द का इस्तेमाल ट्रंप मुख्य रूप से भारत के खिलाफ करते रहे हैं, जिसे वे दिल्ली द्वारा व्यापारिक शोषण बताते हैं. पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के दिन भी ट्रंप ने यही शब्द इस्तेमाल किया था.
अपनी सामान्य आक्रामक शैली बरकरार रखते हुए ट्रंप ने कहा था कि भारत के लिए कुछ नहीं बदलेगा, यह संकेत देते हुए कि व्यापार समझौते के तहत तय 18% टैरिफ लागू रहेगा. भारत से डील के संबंध में सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा था, 'कुछ नहीं बदलेगा. वे (भारत) टैरिफ देंगे और हम टैरिफ नहीं देंगे. PM मोदी महान व्यक्ति हैं लेकिन वे हमें लूट रहे थे, इसलिए हमने थोड़ा पलटी मारी.'
ट्रंप के ताजा सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने कहा है कि ट्रंप के पोस्ट में सारे इशारे हैं कि यह भारत के लिए है. सिब्बल ने ट्वीट किया, 'उन्होंने (ट्रंप) भारत के साथ फ्रेमवर्क डील पर SC के फैसले के नतीजे पर मीडिया के एक सवाल के जवाब में भारत के संबंध में लूटा शब्द का इस्तेमाल किया था. उनकी ईगो वाली सोच एक गंभीर समस्या है.'
हालांकि, भारत अकेला ऐसा देश नहीं है जिसने अमेरिका के साथ ट्रेड डील से ब्रेक लिया है. यूरोपियन यूनियन ने भी US के साथ अपनी ट्रेड डील को मंज़ूरी देने पर रोक लगा दी है, जो उसने पिछले जुलाई में की थी. इससे ट्रंप और नाराज हो गए हैं.
पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने कहा, 'ट्रंप प्रशासन की पकड़ निश्चित रूप से कमजोर हुई है. कुछ देश इस कमजोरी से कुछ हासिल करने की कोशिश करेंगे.'
भारत के पास क्या ऑप्शन हैं?
भारत के लिए 15% टैरिफ निश्चित रूप से 18% की दर से बेहतर है, जिस पर व्यापार समझौते के तहत सहमति बनी थी. इसे पिछले साल ट्रंप द्वारा लगाए गए 50% के भारी टैरिफ से घटाया गया था, जो आंशिक रूप से भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद को लेकर लगाया गया था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 18% पारस्परिक टैरिफ का कानूनी आधार कमजोर पड़ गया है. ऐसे में भारत के पास अमेरिका से अधिक अनुकूल शर्तें हासिल करने के लिए अतिरिक्त गुंजाइश है.
अंतरिम व्यापार सौदे में एक छोटा सा क्लॉज (धारा) है जो अब भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो गया है. इसके अनुसार, यदि कोई देश सहमत टैरिफ में बदलाव करता है, तो दूसरा देश भी अपनी प्रतिबद्धताओं को संशोधित कर सकता है. इससे भारत को फिर से मोलभाव करने की जगह मिल गई है. इससे भारत को अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर से पहले अपनी प्रतिबद्धताओं की समीक्षा करने का अवसर मिल सकता है. इससे बातचीत की प्रक्रिया फिर से खुल सकती है और भारत को अधिक अनुकूल शर्तें हासिल करने का मौका मिल सकता है.
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