अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक राजनीति में एक नया मोर्चा खोलने के संकेत दिए हैं. मियामी में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान और वेनेजुएला के बाद अब 'क्यूबा की बारी है'.
हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि अमेरिका क्यूबा के खिलाफ क्या कार्रवाई करेगा, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि मजबूत सेना कभी-कभी इस्तेमाल करनी पड़ती है.
वेनेजुएला में निकोलस मादुरो की सत्ता जाने के बाद क्यूबा पहले से ही गहरे आर्थिक और ऊर्जा संकट से जूझ रहा है और अब ट्रंप के बयानों ने वहां की सरकार की धड़कनें बढ़ा दी हैं. ट्रंप ने अपनी सैन्य ताकत का जिक्र करते हुए कहा, 'मैंने यह विशाल सेना बनाई है. मैंने कहा था कि आपको इसका उपयोग कभी नहीं करना पड़ेगा, लेकिन कभी-कभी करना पड़ता है. वैसे, क्यूबा अगला है.'
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ट्रंप ने क्यूबा की स्थिति को 'फ्रेंडली टेकओवर' (मैत्रीपूर्ण अधिग्रहण) की संभावना बताया लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि ऐसा न भी हो. व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनके पास द्वीप के साथ 'कुछ भी' करने की क्षमता है और वे इसे "आजाद" करने या "कब्जा" करने का सम्मान प्राप्त करना चाहते हैं.
हाल ही में वेनेजुएला में अमेरिका समर्थित ऑपरेशन के कारण राष्ट्रपति मादुरो को सत्ता से हटना पड़ा था. इसके परिणामस्वरूप क्यूबा को मिलने वाली तेल की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है. वेनेजुएला लंबे समय से क्यूबा का मुख्य ईंधन आपूर्तिकर्ता था. इस आपूर्ति के बंद होने से क्यूबा में बिजली कटौती और आवश्यक वस्तुओं की भारी किल्लत हो गई है, जिससे वहां की सरकार पतन के करीब मानी जा रही है.
डिप्लोमेसी और 'दबाव' की राजनीति
कड़े बयानों के बावजूद, राजनयिक माध्यम अभी भी खुले हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों और क्यूबा के नेतृत्व के बीच बातचीत चल रही है. अमेरिका का मुख्य उद्देश्य क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कानेल को पद से हटाना है. डियाज़-कानेल ने भी वॉशिंगटन के साथ बातचीत की पुष्टि की है, क्योंकि हवाना इस समय सीधे सैन्य टकराव से बचने की कोशिश कर रहा है.
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