तेहरान में आसमान से बरस रहा 'तेजाब'... मिसाइल-ड्रोन अटैक के बीच ईरान में हालात भयावह

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक यह स्थिति नागरिकों के लिए गंभीर स्वास्थ्य खतरा पैदा कर रही है. खासकर बच्चों और बुजुर्गों में फेफड़ों, आंखों और त्वचा में जलन जैसी समस्याओं की शिकायतें सामने आ रही हैं.

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तेहरान में दो बड़े तेल भंडारण केंद्रों पर इजरायल और अमेरिका ने हमले किए थे (Photo- Reuters) तेहरान में दो बड़े तेल भंडारण केंद्रों पर इजरायल और अमेरिका ने हमले किए थे (Photo- Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:47 PM IST

मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच ईरान की राजधानी तेहरान अब एक नए पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट का सामना कर रही है. ईरान सरकार ने दावा किया है कि शहर में एसिड रेन हो रही है, जिसका कारण बीती रात तेल भंडारण सुविधाओं पर हुए हमले बताए जा रहे हैं. हमले के बाद शहर के ऊपर घने धुएं की परत छा गई, जिसके कारण गुरुवार को हुई बारिश अम्लीय रूप में बदल गई.

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सरकारी अधिकारियों के मुताबिक यह स्थिति नागरिकों के लिए गंभीर स्वास्थ्य खतरा पैदा कर रही है. खासकर बच्चों और बुजुर्गों में फेफड़ों, आंखों और त्वचा में जलन जैसी समस्याओं की शिकायतें सामने आ रही हैं.

तेल डिपो पर हमले के बाद बना जहरीला धुआं

ईरानी सरकार के अनुसार, राजधानी तेहरान में दो बड़े तेल भंडारण केंद्रों पर हमले के बाद वहां भीषण आग लग गई. इस आग से उठने वाला घना धुआं पूरे शहर के ऊपर फैल गया. वैज्ञानिकों का कहना है कि जब तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पाद जलते हैं तो उनमें से सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी गैसें निकलती हैं.

जब ये गैसें वातावरण में मौजूद पानी की बूंदों के साथ मिलती हैं तो सल्फ्यूरिक और नाइट्रिक एसिड बनता है. यही प्रक्रिया बारिश को एसिडिक बना देती है, जिसे आम भाषा में एसिड रेन कहा जाता है.

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विशेषज्ञों के मुताबिक तेहरान में बनी धुएं की मोटी परत के कारण बारिश की बूंदों में इन रासायनिक तत्वों की मात्रा बढ़ गई, जिससे बारिश का पानी सामान्य से कहीं ज्यादा जहरीला हो गया.

स्वास्थ्य पर गंभीर असर की चेतावनी

ईरान के स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है. अधिकारियों ने कहा है कि अम्लीय बारिश के संपर्क में आने से लोगों को कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं. डॉक्टरों के अनुसार इससे आंखों में तेज जलन, त्वचा पर खुजली या जलन, सांस लेने में तकलीफ, गले और फेफड़ों में संक्रमण जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए खतरा और ज्यादा है.

युद्ध के बीच बढ़ता पर्यावरणीय संकट

तेहरान में एसिड रेन की घटना उस समय सामने आई है जब ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध लगातार तेज हो रहा है. हाल के दिनों में ईरान के कई ऊर्जा प्रतिष्ठानों और सैन्य ठिकानों पर हमले हुए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े पैमाने पर तेल और गैस प्रतिष्ठानों पर हमले केवल सैन्य नुकसान ही नहीं पहुंचाते, बल्कि इससे पर्यावरणीय आपदा भी पैदा हो सकती है. तेल भंडारण केंद्रों में लगी आग से निकलने वाला धुआं कई दिनों तक वातावरण को प्रदूषित कर सकता है.

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लोगों में डर और अनिश्चितता

तेहरान के कई इलाकों में लोगों ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किए हैं, जिनमें आसमान में काले धुएं की मोटी परत दिखाई दे रही है. कई नागरिकों ने शिकायत की है कि बारिश के बाद आंखों में तेज जलन और सांस लेने में परेशानी महसूस हुई. स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रदूषण के स्तर की जांच की जा रही है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तेल भंडारण सुविधाओं में लगी आग पूरी तरह नहीं बुझी तो आने वाले दिनों में भी वातावरण में जहरीले कण बने रह सकते हैं.

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