ईरान जंग से जुड़ी अबतक की सबसे बड़ी खबर आई है. ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से खोलने का ऐलान कर दिया है. ईरान ने कहा है कि इजरायल-लेबनान सीजफायर के बाद होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से खोल दिया गया है. इजरायल-अमेरिका ने ईरान पर 28 फरवरी 2026 को हमला किया था. इसके बाद से ही होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही बाधित हो गई थी.
ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि लेबनान में संघर्ष-विराम के मद्देनज़र होर्मुज़ स्ट्रेट से सभी कमर्शियल जहाज़ों के गुज़रने का मार्ग पूरी तरह से खुला घोषित किया गया है. अराघची ने यह भी कहा कि होर्मुज को संघर्षविराम की शेष अवधि के लिए ही खोला गया है.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर लिखा,"लेबनान में संघर्ष-विराम के अनुरूप होर्मुज स्ट्रेट से सभी वाणिज्यिक जहाज़ों के गुज़रने का मार्ग, संघर्ष-विराम की शेष अवधि के लिए, पूरी तरह से खुला घोषित किया गया है; यह मार्ग उसी समन्वित मार्ग पर स्थित है जिसकी घोषणा ईरान के बंदरगाह और समुद्री संगठन द्वारा पहले ही की जा चुकी है."
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को हर तरह के जहाजों के लिए पूरी तरह से खोलने का ऐलान कर दिया है. ट्रंप ने इसकी घोषणा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर की है.
ट्रंप ने लिखा, "होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से खुला है और व्यापार तथा पूर्ण आवागमन के लिए तैयार है; लेकिन नौसैनिक नाकाबंदी केवल ईरान के संबंध में ही पूरी तरह से लागू और प्रभावी रहेगी. और तब तक रहेगी जब तक कि ईरान के साथ हमारी डील 100% पूरी नहीं हो जाती. यह प्रक्रिया बहुत तेज़ी से आगे बढ़नी चाहिए, क्योंकि इसके अधिकांश बिंदुओं पर पहले ही बातचीत हो चुकी है."
ईरान पर अमेरिका और इजरायल ने पहली बार 28 फरवरी 2026 को ईरान के कई ठिकानों पर हमला किया था. इसी दिन से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी. कुछ ही दिन बाद होर्मुज को ईरान ने पूरी तरह से बंद कर दिया था. इस तरह से अगर 28 फरवरी 2026 से लेकर 17 अप्रैल 2026 तक देखा जाए तो 49 दिन के बाद होर्मुज को ईरान ने पूरी तरह से खोला है.
बता दें कि ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच सीजफायर की घोषणा 8 अप्रैल को हुई थी. इसके बाद इनके बीच लड़ाई बंद है, लेकिन होर्मुज पूरी तरह से नहीं खुला था. भारत-पाकिस्तान समेत दुनिया के कई देश होर्मुज को खुलवाने के लिए कूटनीतिक गतिविधियों में जुटे थे.
भारत के लिए बेहद अहम है होर्मुज मार्ग
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से भारत में भी रसोई गैस की किल्लत पैदा हो गई थी. भारत का LPG कतर समेत गल्फ के दूसरे देशों से इसी रास्ते से आता था. इस मार्ग के बंद होने से भारत एलपीजी के लिए दूसरे विक्रेताओं के पास जाना पड़ा. इसके अलावा कुछ जहाजों को ईरान की सहमति के बाद नेवी की निगरानी में होर्मुज से भारत लाना पड़ा.
भारत के लिए इसका महत्व और भी ज्यादा है. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी कुल तेल जरूरत का करीब 85% विदेश से आयात करता है. इन आयातों में से 60% से ज्यादा तेल फारस की खाड़ी के देशों जैसे सऊदी अरब, इराक, UAE, ईरान आदि से आता है, जो होर्मुज से होकर गुजरता है.
इस मार्ग के बंद रहने से भारत को महंगे तेल, बढ़ते आयात बिल, मुद्रास्फीति का सामना करना पड़ता है. होर्मुज का खुलना अब भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए राहत की खबर है.
होर्मुज से होकर जाता है भारत-चीन समेत दर्जनों एशियाई देशों का ईंधन
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जल मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है. यह संकरा जलमार्ग वैश्विक तेल व्यापार का चोक प्वाइंट है. यहां से रोजाना लगभग 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल गुजरता है, जो दुनिया के कुल तेल व्यापार का करीब 20-21% हिस्सा है. इसके अलावा यहां से विश्व का बड़ा हिस्सा प्राकृतिक गैस (LNG) भी निर्यात होता है.
दुनिया के लिए होर्मुज का महत्व इसलिए है क्योंकि इसका बंद होना तेल की आपूर्ति बाधित कर देता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं. इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था, मुद्रास्फीति और ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित होती है.
शुक्रवार को होर्मुज खुलने के साथ ही दुनिया के तेल और गैस बाजार ने राहत की सांस ली और तेल गैस की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई.
ईरान-अमेरिका तनाव में जब यह मार्ग प्रभावित हुआ तो पूरी दुनिया में तेल संकट की आशंका बढ़ गई थी.
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