भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने जनवरी में पद संभालते समय दूतावास के अपने स्टाफ से कहा था, 'सच्चे दोस्त असहमत हो सकते हैं, लेकिन अंत में अपने झगड़े सुलझा ही लेते हैं.' उन्होंने यह टिप्पणी ऐसे समय जब भारत टैरिफ और व्यापार को लेकर ट्रंप के दबाव का सामना कर रहा था. इसके बावजूद गोर शुरुआत से ही भारत-अमेरिका रिश्तों को लेकर सकारात्मक नजर आए.
गोर की ‘रॉकस्टार’ एंट्री के तीन हफ्ते बाद ही सोमवार को ट्रंप ने भारत पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया और एक व्यापार समझौता भी तय हो गया. इसी के साथ ही सर्जियो गोर और भारत-अमेरिका संबंधों में आई खटास को दूर करने की उनकी कोशिश चर्चा में आ गई है.
इसमें यह बात मददगार रही कि गोर की ट्रंप तक सीधी पहुंच हमेशा रही है. ट्रंप ने अमेरिकी दूत को 'बेहद अच्छे दोस्त' और एक ऐसा व्यक्ति बताया है जिस पर वो अपने एजेंडे को पूरा करने के लिए 'पूरी तरह भरोसा' कर सकते हैं. ट्रंप के करीबी होने का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि गोर का निकनेम ‘मेयर ऑफ मार-ए-लागो’ है.
इन उपलब्धियों के साथ गोर 12 जनवरी की ठंडी सुबह नई दिल्ली पहुंचे, ताकि भारत-अमेरिका संबंधों में दशकों से बनी गर्मजोशी को आगे बढ़ाया जा सके. और उन्होंने एक महीने के भीतर ही नतीजे दिखा दिए.
सर्जियो गोर कैसे बने अहम कड़ी?
भारत का अगला अमेरिकी राजदूत घोषित किए जाने के बाद से ही गोर ने भारत-अमेरिका के बीच बातचीत की एक साफ लाइन बनाए रखी और रिश्तों को लेकर सकारात्मक रवैया अपनाया. उन्होंने रूसी तेल की खरीद के मुद्दे पर ट्रंप के कुछ सहयोगियों और अधिकारियों की तरह भारत पर कटाक्ष या तीखी टिप्पणियां नहीं कीं.
इसके उलट, गोर बार-बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ट्रंप की 'गहरी दोस्ती' का जिक्र करते रहे. अक्टूबर में मोदी से पहली मुलाकात के दौरान गोर ने प्रधानमंत्री को ट्रंप और मोदी की एक तस्वीर भेंट की, जिस पर अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर थे और संदेश लिखा था- 'मिस्टर प्राइम मिनिस्टर, यू आर ग्रेट.'
जनवरी में जब गोर ने अमेरिकी दूतावास में कदम रखा, तो उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि उनके शब्द सत्ता के गलियारों में गूंजें. कभी MAGA पार्टियों में डीजे रह चुके गोर के स्वागत कार्यक्रम में गन्स एन’ रोजेज से लेकर मेटालिका तक का संगीत बज रहा था, जिससे माहौल किसी रॉक कॉन्सर्ट जैसा लग रहा था. इस मंच से गोर ने कहा कि अमेरिका के लिए भारत जितना अहम कोई और देश नहीं है.
इसके बाद उन्होंने ऐलान किया कि भारत को ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल होने का न्योता दिया गया है. यह ट्रंप की पहल है, जिसका मकसद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत तकनीक के लिए सप्लाई चेन तैयार करना है.
सबसे अहम बात यह रही कि गोर ने आतंकवाद-रोधी सहयोग जैसे भारत के लिए अहम मुद्दों को टैरिफ और व्यापार विवादों की आड़ में दबने नहीं दिया. उनका यह आशावादी रुख काम कर गया.
ट्रेड वार्ता को कैसे मिली रफ्तार?
चाणक्यपुरी स्थित दूतावास कैंपस में गोर ने व्यापार वार्ताओं को तेजी से आगे बढ़ाया. वरिष्ठ पत्रकार शीला भट्ट ने वॉशिंगटन के एक सूत्र के हवाले से कहा कि गोर ने कई प्रक्रियाओं को 'फास्ट-फॉरवर्ड' कर दिया. भट्ट ने ट्वीट किया, 'सर्जियो गोर भारत की सोच डोनाल्ड ट्रंप तक पहुंचाने में सफल रहे.'
सोमवार को व्यापार समझौते की घोषणा के बाद विश्लेषकों और राजनयिकों ने संबंधों में आई गिरावट को थामने और ट्रंप व भारत के बीच सेतु बनने का श्रेय गोर को दिया.
भू-राजनीतिक विश्लेषक माइकल कुगेलमैन ने कहा, 'हमने पॉजिटिव मैसेज, हाई लेवल बातचीत और फिर उसकी सफलता देखी हैं. राष्ट्रपति तक करीबी पहुंच रखने वाले गोर ने यहां निर्णायक भूमिका निभाई.'
पूर्व भारतीय राजनयिक सदानंद धूमे ने भी व्यापार समझौते के लिए गोर की सराहना की. उन्होंने कहा, 'जहां श्रेय बनता है, वहां देना चाहिए… भारत में सर्जियो गोर के कार्यकाल की शानदार शुरुआत.'
उज्बेकिस्तान में जन्मे गोर को अमेरिका में ट्रंप के सबसे भरोसेमंद सिपाहियों में गिना जाता है. उन्होंने काम पूरा कराने वाले व्यक्ति के रूप में अपनी पहचान बनाई है.
उन्होंने न केवल ट्रंप के 2024 के इलेक्शन कैंपेन के लिए लाखों डॉलर जुटाने में मदद की, बल्कि दूसरे कार्यकाल में व्हाइट हाउस के लिए वफादार टीम तैयार करने में भी अहम भूमिका निभाई. ट्रंप का उन पर भरोसा ही उन्हें भारत में 'ट्रंप का आदमी' बनाए जाने की बड़ी वजह बना.
इसके नतीजे तुरंत दिखे. गोर ने ट्रबलशूटर की भूमिका निभाई और ऐसे समय में भारत की मदद की, जब उसे ट्रंप के करीबी सर्कल तक अपनी बात पहुंचाने में दिक्कत हो रही थी. व्यापार समझौते की घोषणा के बाद गोर ने यह भी साफ किया कि रूसी तेल खरीद को लेकर लगाए गए टैरिफ भी हटा दिए गए हैं.
हालांकि, उनके कार्यकाल को अभी महज एक महीने हुए हैं, लेकिन गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों की 'असीम संभावनाओं' को जल्दी समझ लिया है. ऐसा लगता है कि उन्होंने इस रिश्ते की नब्ज ट्रंप और उनके सहयोगियों से पहले ही पकड़ ली है.
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