इस समय दुनिया के कई इलाके भीषण ठंड की चपेट में हैं. क्या अमेरिका, क्या यूरोप और क्या एशिया हाड़ कंपा देने वाली ठंड से जनजीवन अस्त-व्यस्त है. रूस भी इस समय भंयकर बर्फबारी से पटा पड़ा है. यहां 60 साल में सबसे ज्यादा बर्फ गिर रही है. शहर के कई बड़े इलाके कई-कई मीटर ऊंची बर्फ की परतों में लिपट गए हैं.
आर्कटिक से आई बर्फीली हवाओं ने रूस के शहरों को बर्फ में दबा दिया है. राजधानी मॉस्को में भीषण ठंड है, यहां तापमान -28 डिग्री तक लुढ़क गया है. इस दौरान रूस की एक गगनचुंबी इमारत के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें इस इमारत को कुल्फी की तरह जमा देखा जा सकता है.
रूस के कामचटका में हालात हैरान कर देने वाली हैं. इमारतें और उनके सामने खड़ी कारें बर्फ में लिपटी नजर आ रही हैं. कामचटका में इस वक्त पड़ी भीषण ठंड की वजह आर्कटिक ठंडी हवओं, पोलर वॉर्टेक्स की कमजोरी और इलाके की भौगोलिक बनावट का असर है.
रूस का कामचटका क्यों बर्फ में लिपटा?
कामचटका रूस के सुदूर पूर्व में आर्कटिक सर्कल के बेहद करीब है. यहां आम हालात में भी सर्दियां भीषण होती हैं, लेकिन इस बार उत्तरी ध्रुव की बेहद ठंडी हवा असामान्य रूप से नीचे की ओर खिसक आई हैं.
मौसम वैज्ञानिक इसे पोलर वॉर्टेक्स के खिसकने से जोड़ रहे हैं. जब पोलर वॉर्टेक्स और जेट स्ट्रीम कमजोर या टेढ़े-मेढ़े हो जाते हैं, तो आर्कटिक की हवा खुले रास्ते से दक्षिण की ओर बहने लगती है. कामचटका जैसे खुले और समुद्र के करीब इलाकों में यह ठंडी हवा बिना किसी बड़ी बाधा के सीधे पहुंच जाती है, जिससे तापमान अचानक बेहद नीचे चला जाता है.
यहां तेज हवाएं और नमी ठंड के असर को और खतरनाक बना देती हैं. समुद्र से आने वाली नम हवा जब माइनस 30 से 40 डिग्री सेल्सियस जैसे तापमान से टकराती है, तो वह तुरंत जम जाती है. इसी वजह से उबलते हुए नूडल्स भी हवा में डालते ही सेकंडों में जम जाते हैं. पानी की भाप तुरंत बर्फ के कणों में बदल जाती है और नूडल्स सख्त हो जाते हैं.
कामचटका का यह इलाका चारों तरफ से खुले समुद्र, पहाड़ों और ज्वालामुखीय पठारों से घिरा है, जहां ठंडी हवा फंसकर लंबे समय तक टिक जाती है. जब हवा शांत हो जाती है और आसमान साफ रहता है, तो जमीन से गर्मी तेजी से निकल जाती है, जिससे तापमान और गिरता चला जाता है.
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