गाजा में इजरायल-हमास की जंग के बीच ईरान को बड़ा झटका लगा है. इजरायल ने ईरान के टॉप मिलिट्री कमांडर को एयरस्ट्राइक में मार गिराया है. जिस अटैक में ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर सैयद रजा मौसवी की जान गई है, उसे सीरिया के दमिश्क में अंजाम दिया गया है. यरूसलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक दमिश्क के ग्रामीण इलाके सेट जैनब में विस्फोटों की आवाज सुनी गई. इसके बाद दमिश्क अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास धुएं के बादल दिखाई दिए.
सैयद रजा मौसवी का मारा जाना ईरान के एक बड़ा झटका है, क्योंकि मौसवी सीरिया और लेबनान में ऑपरेशंस को अंजाम दे रहे थे. ऐसे में इजरायल के मौसवी को निशाना बनाने से ईरान का मिशन इस इलाके में धीमा पड़ सकता है. ईरानी कमांडर सैयद रजा मौसवी अमेरिकी एयरस्ट्राइक में मारे जा चुके ईरान के अहम कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी के बेहद करीबी थे.
बदला लेने की हो सकती है कोशिश
इजरायल के इस हमले के बाद अब उम्मीद है कि ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्ला या हूती विद्रोही इजरायल से बदला लेने की कोशिश कर सकते हैं. वैसे ही ईरान को सपोर्ट करने वाले ये संगठन लगातार उन समुद्री जहाजों को निशाना बना रहे हैं, जिनका कनेक्शन किसी भी तरह से इजरायल के साथ जुड़ा हुआ है. हाल ही में गुजरात की समुद्री सीमा से 200 मील दूर इजरायल संबंधित एक जहाज पर ड्रोन हमला किया गया था. इसका आरोप भी ईरान समर्थित संगठनों पर ही लग रहा था.
इसी तरह मारे गए थे कासिम सुलेमानी
बता दें कि साल 2020 में अमेरिका ने इसी तरह ईरान की एलीट कुद्स फोर्स के कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी को एयरस्ट्राइक में मार गिराया था. तब, कमांडर कासिम सुलेमानी और कमांडर अबू महदी अल-मुहांदिस सीरिया से बगदाद एयरपोर्ट पहुंचे थे. उनके चाहने वाले एयरपोर्ट पर जमा थे और प्लेन के लैंड होते ही उन्हें विमान के पास ही लेने पहुंच गए थे. वहां दो एसयूवी कारें दोनों को लेने के लिए खड़ी थीं. तब एक कार में जनरल सुलेमानी और दूसरी में अबू महदी अल-मुहांदिस बैठ गए थे. जैसे ही दोनों कार एयरपोर्ट से बाहर निकलीं, वैसे ही रात के अंधेरे में अमेरिकी एमक्यू-9 ड्रोन ने कारों पर कई मिसाइलें दाग दीं थीं.
ट्रंप के आदेश पर हुआ था अटैक
अमेरिका की इस एयरस्ट्राइक में मेजर जनरल कासिल सुलेमानी और अबू महदी अल-मुहांदिस समेत 8 लोगों की मौत हुई थी. इस हमले के फौरन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने ट्विटर अकाउंट से अमेरिका का झंडा ट्विट करके इशारा दे दिया था, जिसके फौरन बाद अमेरिका ने इस हमले की आधिकारिक जिम्मेदारी भी ले ली थी. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर विदेश में रह रहे अमेरिकी सैन्यकर्मियों की रक्षा के लिए कासिम सुलेमानी को मारने का कदम उठाया गया.
अशरफ वानी