'आपके सभी से अच्छे रिश्ते... आगे आकर जंग रुकवाएं', यूरोप के थिंक टैंक ने PM मोदी से की अपील

कई थिंक टैंक और सिक्योरिटी एक्सपर्ट पीएम मोदी से ईरान जंग खत्म करने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील कर रहे हैं. इनका मानना है कि भारत की आर्थिक ताकत और पीएम मोदी का सभी पक्षों से अच्छा संबंध उन्हें इस रोल के लिए मुफीद बनाता है. इंटरनेशनल क्राइसेस ग्रुप की ये अपील तब आई है जब ट्रंप ने 10 दिनों तक ईरान के ऊर्जा केंद्रों पर हमला न करने का ऐलान किया है.

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जंग के बीच पीएम मोदी और ट्रंप के बीच बात हुई है. (Photo: Reuters/PTI) जंग के बीच पीएम मोदी और ट्रंप के बीच बात हुई है. (Photo: Reuters/PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:39 PM IST

दुनिया के कई थिंक टैंक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ईरान संकट को सुलझाने की अपील कर रहे हैं. थिंक टैंक इंटरनेशनल क्राइसेस ग्रुप में ईरान के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अली वाएज ने कहा है कि ये बहुत अच्छी बात है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईरान संकट को सुलझाने के लिए पहल कर रहे हैं, लेकिन एक परिपक्व और अनुभवी राष्ट्र के रूप में भारत इस समस्या का हल निकालने में अहम रोल अदा कर सकता है. 

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इंटरनेशनल क्राइसेस ग्रुप एक स्वतंत्र, गैर-लाभकारी अंतरराष्ट्रीय संगठन है. इसका मुख्यालय बेल्जियम के ब्रुसेल्स में है. यह दुनिया भर के संघर्षों पर रिपोर्ट और विश्लेषण करता है, लेकिन यह किसी सरकार या राष्ट्रपति के अधीन नहीं है. अली वाएज इस संगठन में Iran Project Director  हैं, यानी वे ईरान संबंधी सभी मामलों की अगुवाई करते हैं. 

अली वाएज ने ईरान जंग पर कहा कि यह बहुत ही सकारात्मक बात है कि प्रधानमंत्री मोदी, जिनके सभी पक्षों के साथ अच्छे संबंध हैं, तनाव कम करने के लिए पहल कर रहे हैं. 

भारत से और अधिक सक्रियता की उम्मीद करते हुए उन्होंने कहा कि, "भारत इससे भी कहीं ज़्यादा कर सकता है. होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से पड़ने वाले गंभीर असर को देखते हुए अब भारत जैसे नए खिलाड़ियों के लिए यह सही समय है कि वे सभी पक्षों को एक साथ लाएं और किसी समझौते तक पहुंचने की कोशिश करें."

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अली वाएज ने कहा कि फिलहाल युद्धविराम की संभावना कम ही लगती है, क्योंकि दोनों ही पक्षों को लगता है कि वे अभी भी निर्णायक वार कर सकते हैं. एक परिपक्व और अनुभवी राष्ट्र के तौर पर भारत इसमें एक अहम भूमिका निभा सकता है.

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर टिप्पणी करते हुए वाएज ने ट्रंप द्वारा ईरान पर बड़े हमले करने से हिचकिचाने की वजह भी बताई. 

उन्होंने कहा कि ट्रंप ईरान पर बड़ा हमला कर सकते थे. लेकिन ईरान ने भी इसके जवाब में खाड़ी देशों में ऊर्जा और बिजली के इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले की धमकी दी है.  ईरान ने से खाड़ी के ऊर्जा ठिकानों और इजरायल के ग्रिड पर जवाबी हमले की चेतावनी दी है. अगर ऐसा होता है तो ग्लोबल एनर्जी मार्केट में और भी बुरे हालात पैदा हो जाएंगे. इस तरह का टकराव सिर्फ़ थोड़े समय के लिए होने वाली निर्यात की रुकावटों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे उत्पादन महीनों या शायद सालों तक ठप हो सकता है. 

उन्होंने कहा कि कतर पहले ही अपनी प्राकृतिक गैस उत्पादन क्षमता का 17% हिस्सा खो चुका है, और इसे ठीक होने में शायद तीन से पांच साल लग सकते हैं. 

बता दें कि ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा केंद्रों पर 10 दिनों तक हमला न करने का वादा किया है. 

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इससे पहले कुछ अमेरिकी एक्सपर्ट ने भी कहा था कि पीएम मोदी ईरान और अमेरिका की जंग रुकवा सकते हैं. 

अमेरिका के युद्ध विशेषज्ञ डगलस मैकग्रेगर ने कहा था कि अगर भारत मध्यस्थता के लिए कदम बढ़ाए तो अमेरिकी राष्ट्रपति और पीएम मोदी के बीच बात आगे बढ़ सकती है. 

मैकग्रेगर ने एक पोडकास्ट में कहा कि मौजूदा समय में ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और युद्ध से निपटने के लिए किसी भरोसेमंद मध्यस्थ की तलाश उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना कि युद्ध को खत्म करना. मैकग्रेगर ने कहा कि  अब सवाल सिर्फ प्रभाव का नहीं, बल्कि भरोसे का है कि कौन बंटे गुटों में विश्वास अर्जित कर सकता है.

मैकग्रेगर ने कहा कि पीएम मोदी रूस, ईरान, इजरायल और अमेरिका जैसी प्रमुख ताकतों के बीच विश्वास का पुल बनने की क्षमता रखते हैं. उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत की यह स्थिति इसे विरोधी पक्षों के बीच संवाद का पुल बनने में सक्षम बनाती है. पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता इसे तटस्थ मध्यस्थ बनने से रोकती है.  

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