'आज दुनिया के लोग UN को ऐसी संस्था नहीं मानते जो शांति-सुरक्षा दिला सके...' UN पर भारत की दो-टूक

भारत ने कहा कि अब शांति और सुरक्षा पर बातचीत UN के बाहर भी हो रही है. कई देश मिलकर अलग समूह बना रहे हैं, जिनमें कभी-कभी निजी कंपनियां भी शामिल होती हैं. यह बयान ऐसे समय में आया है जब UN और उसकी सबसे ताकतवर संस्था सुरक्षा परिषद कई बड़े वैश्विक संघर्ष रोकने में असफल रही है.

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भारत का बड़ा संकेत: UN की कमजोरी से नए वैश्विक मंच उभर रहे हैं भारत का बड़ा संकेत: UN की कमजोरी से नए वैश्विक मंच उभर रहे हैं

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 27 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:48 PM IST

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने साफ कहा है कि आज दुनिया के लोग UN को ऐसी संस्था नहीं मानते जो अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा दिला सके. भारत का कहना है कि UN काम करने में कमजोर पड़ गया है इसलिए अब देश अलग-अलग नए मंचों (फोरम) की ओर जा रहे हैं.

UN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वत नेनी हरीश ने कहा कि UN की सबसे बड़ी समस्या सिर्फ पैसों की नहीं है, बल्कि यह है कि वह युद्ध और टकराव रोकने में नाकाम रहा है. कई बड़े विवादों पर UN बेबस दिखा है.

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भारत ने कहा कि अब शांति और सुरक्षा पर बातचीत UN के बाहर भी हो रही है. कई देश मिलकर अलग समूह बना रहे हैं, जिनमें कभी-कभी निजी कंपनियां भी शामिल होती हैं. यह बयान ऐसे समय में आया है जब UN और उसकी सबसे ताकतवर संस्था सुरक्षा परिषद कई बड़े वैश्विक संघर्ष रोकने में असफल रही है.

इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में शांति के लिए एक नया संगठन बनाया है, जिसे ‘बोर्ड ऑफ पीस’ कहा गया है. इसे UN के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है. इस संगठन में भारत सहित कई देशों को शामिल होने का न्योता दिया गया है.

भारत ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का इस्तेमाल किसी देश की संप्रभुता (आंतरिक मामलों) में दखल देने के लिए नहीं होना चाहिए. कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए, दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए. भारत ने कहा कि अगर UN और बहुपक्षीय व्यवस्था समय के साथ खुद को नहीं बदलेगी तो नए विकल्प अपने-आप खड़े हो जाएंगे.

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भारत ने जोर देकर कहा कि देश में कानून का राज संविधान और स्वतंत्र न्यायपालिका से मजबूत है और यही सोच भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रखता है. अंत में भारत ने कहा कि UN, खासकर सुरक्षा परिषद, की बनावट बहुत पुरानी हो चुकी है. आज की दुनिया को देखते हुए इसमें सुधार जरूरी है, ताकि यह संस्था फिर से भरोसेमंद और प्रभावी बन सके.

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