पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संकेत दिया है कि अगर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गाजा में अंतरराष्ट्रीय मिशन के तहत सैनिक भेजने के लिए कहते हैं, तो पाकिस्तान इसके लिए तैयार हो सकता है. उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों में भाग लेना अलग-थलग रहने से ज्यादा फायदेमंद है.
ख्वाजा आसिफ का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान ट्रंप के नेतृत्व वाले गाजा से जुड़े ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल हो चुका है. उन्होंने साफ किया कि इस तरह की किसी भी अंतरराष्ट्रीय तैनाती या पहल में पाकिस्तान की भागीदारी पर विचार किया जा सकता है.
'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल पाकिस्तान
पाकिस्तान को आधिकारिक तौर पर ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का सदस्य घोषित किया गया है. इस समूह में अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, बहरीन, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, कजाकिस्तान, मोरक्को, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और वियतनाम भी शामिल हैं. वहीं जर्मनी, इटली, पैराग्वे, रूस, स्लोवेनिया और यूक्रेन जैसे देशों ने अभी तक इस पहल पर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है.
ट्रंप के साथ मंच पर दिखे शहबाज शरीफ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का औपचारिक ऐलान किया. इस कार्यक्रम में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ट्रंप के साथ मंच पर नजर आए, जिससे इस पहल को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और सवाल तेज हो गए.
भारत ने बनाई दूरी
दावोस में हुए इस कार्यक्रम को काफी योजनाबद्ध तरीके से आयोजित किया गया था. नेताओं ने ट्रंप के साथ लंबी मेज पर अपनी सीट ली और चार्टर पर हस्ताक्षर किए. शहबाज शरीफ ट्रंप के दाहिनी ओर बैठे, दोनों ने हाथ मिलाया गया और थोड़ी बातचीत भी हुई, जिसने खासा ध्यान खींचा.
इस कार्यक्रम में भारत शामिल नहीं हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस पहल का न्योता दिया गया था, लेकिन भारत ने न तो इसे स्वीकार किया और न ही औपचारिक रूप से खारिज किया. मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, दिल्ली ने फिलहाल दूरी बनाए रखने का फैसला किया है.
सुबोध कुमार