पाकिस्तान की पैंतरेबाजी, कजाकिस्तान संग ज्वॉइंट डिक्लरेशन में ले आया 'कश्मीर'

कजाकिस्तान और पाकिस्तान ने रणनीतिक साझेदारी स्थापित करने के लिए संयुक्त घोषणापत्र जारी किया है. इसमें कश्मीर विवाद को UNSC प्रस्तावों के अनुसार सुलझाने को दक्षिण एशिया की शांति के लिए जरूरी बताया गया.

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कजाकिस्तान के साथ ज्वॉइंट डिक्लरेशन में पाकिस्तान ने कश्मीर का जिक्र किया है (Photo-X) कजाकिस्तान के साथ ज्वॉइंट डिक्लरेशन में पाकिस्तान ने कश्मीर का जिक्र किया है (Photo-X)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:47 AM IST

कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव की पाकिस्तान यात्रा के दौरान जो साझा घोषणापत्र जारी हुआ है वो भारत के खिलाफ किसी पैंतरेबाजी से कम नही हैं. रणनीतिक साझेदारी के नाम पर जारी इस बयान में कश्मीर का उल्लेख करते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों के जरिए सुलझाने की बात कही गई है.

भारत हमेशा से कश्मीर को एक द्विपक्षीय मुद्दा मानता आया है और तीसरे पक्ष के किसी भी हस्तक्षेप या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसके उल्लेख का कड़ा विरोध करता है.कजाकिस्तान, जिसके साथ भारत के मजबूत व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध हैं उसने संयुक्त घोषणा पत्र में  जम्मू-कश्मीर मुद्दे के समाधान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों के अनुरूप बताए जाने की बात दोहराई है.

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संयुक्त घोषणापत्र में दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि दक्षिण एशिया में स्थायी शांति के लिए जम्मू और कश्मीर विवाद का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों के अनुरूप शांतिपूर्ण समाधान अनिवार्य है. साथ ही, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के सार्वभौमिक सिद्धांतों और मानदंडों के पालन पर भी जोर दिया.

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान को जिसने दिया युद्धपोत उसी मुस्लिम देश पर US को भरोसा, समुद्र में चीन को टक्कर देने का प्लान

कई मुद्दों का है जिक्र

इस संयुक्त घोषणा में दोनों देशों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपने रुख़ में समानता का उल्लेख करते हुए बहुपक्षीय मंचों पर एक-दूसरे के प्रयासों और उम्मीदवारी के समर्थन की इच्छा जताई.

दक्षिण एशिया में शांति और सुरक्षा पर चर्चा करते हुए नेताओं ने सभी पक्षों से संयम और जिम्मेदार आचरण अपनाने पर जोर दिया.

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घोषणा में अफगानिस्तान की स्थिति पर भी विचार किया गया, जहां स्थिरता और सुरक्षा को क्षेत्रीय सहयोग के लिए आवश्यक बताया गया. दोनों देशों ने दोहराया कि अफगान भूमि का इस्तेमाल किसी अन्य देश की सुरक्षा के खिलाफ नहीं होना चाहिए. इसके अलावा, अंतर-धार्मिक, सांस्कृतिक और जातीय सद्भाव को बढ़ावा देने, धार्मिक सहिष्णुता और इस्लामोफोबिया के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के समर्थन पर भी सहमति बनी.

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