पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच एक बार फिर से तनाव चरम पर पहुंच गया है. पाकिस्तानी एयरफोर्स ने कंधार प्रांत में घुसकर भीषण हवाई हमले किए हैं, जिसमें उग्रवादी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया गया है. जवाबी कार्रवाई में तालिबान ने भी पाकिस्तानी सैन्य कैंप पर हमला बोला है, जिससे पूरे खित्ते में बड़ी जंग का खतरा मंडराने लगा है. डूरंड लाइन पर दोनों देशों के बीच तनाव जारी है. दोनों देश डूरंड लाइन के जरिए करीब 2,640 किलोमीटर का बॉर्डर शेयर करते हैं.
पाकिस्तान ने रविवार रात अफगानिस्तान के कंधार प्रांत के अंदर भीषण हवाई हमले किए. सैन्य बलों ने उग्रवादी ठिकानों और सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर यह कार्रवाई अंजाम दी. इस्लामाबाद ने अफगानिस्तान की जमीन से पाकिस्तानी इलाके में होने वाले हमलों को रोकने के लिए यह कदम उठाया.
ऑपरेशन 'गजब लिल-हक' के तहत यह एयर स्ट्राइक की गई. पाकिस्तानी सेना ने सीमा पार से होने वाली कथित उकसावे वाली फायरिंग के जवाब में यह सैन्य ऑपरेशन शुरू किया. कंधार में तकनीकी सहायता ढांचे और उपकरणों के भंडारण केंद्रों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया.
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा है कि सैन्य बलों ने कंधार में 'फिटना अल-ख्वारिज' (TTP) और अफगान तालिबान के ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं. सरकारी टीवी के मुताबिक, 14 और 15 मार्च की दरम्यानी रात को हुए इन हमलों में आतंकवादियों के छिपने वाली जगहों और सैन्य प्रतिष्ठानों को ध्वस्त कर दिया गया. पाकिस्तान का दावा है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल निर्दोष पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ हमलों की साजिश रचने और उन्हें सहायता देने के लिए किया जा रहा था.
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तानी हमलों की पुष्टि तो की, लेकिन उनके दावों को खारिज कर दिया. तालिबान प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि इन हमलों में सिर्फ एक नशामुक्ति केंद्र और खाली पड़े कंटेनरों को नुकसान पहुंचा है. इस कार्रवाई के खिलाफ अफगान वायुसेना ने दक्षिण वजीरिस्तान के वाना इलाके में स्थित एक पाकिस्तानी सैन्य कैंप पर जवाबी हमला किया. अफगान रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस हमले में पाकिस्तानी सेना को भारी जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा है और कई सैन्य सुविधाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं.
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दोनों देशों के बीच ताजा टकराव तब शुरू हुआ, जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर शुक्रवार रात तीन जगहों पर ड्रोन भेजने का आरोप लगाया. हालांकि, इन ड्रोनों को मार गिराया गया, लेकिन उनके मलबे से क्वेटा में दो बच्चों सहित कई नागरिक घायल हो गए. पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे 'रेड लाइन' पार करना करार दिया. उन्होंने चेतावनी दी है कि नागरिकों को निशाना बनाने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इससे पहले पाकिस्तान ने काबुल और पक्तिया प्रांतों में भी कई आतंकी ठिकानों को नष्ट करने का दावा किया था.
सूचना मंत्री तरार ने ऑपरेशन के आंकड़े जारी करते हुए बताया कि अब तक 684 अफगान तालिबान कर्मी मारे जा चुके हैं और 912 से अधिक घायल हुए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, 252 चौकियां नष्ट कर दी गई हैं और 44 पर कब्जा कर लिया गया है. सैन्य कार्रवाई में 229 टैंक, बख्तरबंद गाड़ियां और तोपें भी तबाह हुई हैं. पाकिस्तान का कहना है कि उसने केवल सैन्य लक्ष्यों को निशाना बनाया है और नागरिक आबादी को नुकसान पहुंचाने के दावों में कोई सच्चाई नहीं है.
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संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, 26 फरवरी से 5 मार्च के बीच ही अफगानिस्तान में करीब 185 नागरिक हताहत हुए हैं, जिनमें 56 मौतें शामिल हैं. इस भीषण गोलाबारी और हवाई हमलों के कारण करीब 1,15,000 लोग अपने घरों को छोड़कर भागने पर मजबूर हो गए हैं. सीमा पर जारी यह संघर्ष पिछले कई महीनों में सबसे गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है. विशेषज्ञों को डर है कि अगर दोनों देशों ने संयम नहीं बरता, तो यह छिटपुट झड़प एक पूर्ण विकसित युद्ध में तब्दील हो सकती है.
हवाई हमलों के अलावा, पाकिस्तानी जमीनी बलों ने अफगानिस्तान के 'बदीनी पोस्ट' पर एक आतंकी जंप-ऑफ पॉइंट को भी नष्ट कर दिया है. पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि जब तक उनके सुरक्षा मकसद पूरे नहीं हो जाते, ऑपरेशन गजब लिल-हक जारी रहेगा. फिलहाल सीमा पर भारी तनाव है और दोनों देशों की सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं. वैश्विक समुदाय भी इस बिगड़ती स्थिति पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि दो पड़ोसी देशों के बीच का यह संघर्ष पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए ख़तरा बन सकता है.
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