प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व में नेपाल की नवगठित सरकार ने व्यापक प्रशासनिक सुधारों की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 100 दिनों का एक महत्वाकांक्षी ब्लूप्रिंट देश की जनता के सामने रखा है. इस ब्लूप्रिंट के तहत भ्रष्टाचार पर सख्ती, प्रशासनिक ढांचे में बदलाव और आम लोगों को राहत देने वाले कई अहम फैसले शामिल हैं. सरकार ने सभी नेताओं और सरकारी कर्मचारियों की संपत्तियों की जांच के आदेश दिए हैं, ताकि अवैध संपत्ति और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सके.
साथ ही 9 सितंबर 2025 को काठमांडू समेत देशभर में हुई आगजनी, जेलब्रेक, तोड़फोड़ और हिंसा की घटनाओं की जांच के लिए एक अलग उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है. प्रशासनिक सुधार के तहत सरकार ने मंत्रालयों की संख्या 25 से घटाकर 17 करने का फैसला किया है, जिससे सरकारी खर्च में कटौती और कार्यप्रणाली में तेजी लाने का लक्ष्य है. इसके अलावा, राजनीतिक दलों से जुड़े सभी ट्रेड यूनियनों को बंद करने का आदेश दिया गया है, ताकि संस्थानों में राजनीतिक हस्तक्षेप कम किया जा सके.
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शिक्षा क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव करते हुए सरकार ने स्कूलों और विश्वविद्यालयों से राजनीतिक दलों के छात्र संगठनों को हटाने का निर्देश दिया है. यह कदम शैक्षणिक माहौल को निष्पक्ष और बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है. सरकार ने सहकारी घोटालों से प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए 100 दिनों के भीतर उनका पैसा लौटाने की प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान किया है. वहीं, महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए सभी प्रदेशों में ‘ब्लू लाइन’ बस सेवा शुरू करने की योजना बनाई गई है.
आम नागरिकों को राहत देने के लिए पासपोर्ट, नागरिकता प्रमाणपत्र और ड्राइविंग लाइसेंस जैसी सेवाओं को डिजिटल किया जाएगा, ताकि लोग घर बैठे इन सुविधाओं का लाभ उठा सकें और लंबी कतारों से छुटकारा मिले. इसके अलावा, संविधान में आवश्यक संशोधनों के लिए एक उच्चस्तरीय समिति के गठन का भी फैसला लिया गया है. सरकार का कहना है कि इन सभी कदमों से पारदर्शिता, सुशासन और विकास को गति मिलेगी. नेपाल सरकार का यह 100-डेज एजेंडा देश में बड़े प्रशासनिक बदलाव और सुधारों की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
पंकज दास