जमीन पर पटका और मार दी गोली... अमेरिकी राज्य में गृहयुद्ध जैसे हालात! ट्रंप की 'तानाशाही' का विरोध

मिनेसोटा में ICE एजेंटों ने एक शख्स को गोली मारकर उसकी हत्या कर दी है जिसके बाद शहर में भारी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. स्थानीय लोग ICE एजेंटों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि उन्हें राज्य से बाहर किया जाए.

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मिनेसोटा राज्य में ICE एजेंट्स की कार्रवाई पर बवाल हो रहा है (Photo: AFP/Getty Images) मिनेसोटा राज्य में ICE एजेंट्स की कार्रवाई पर बवाल हो रहा है (Photo: AFP/Getty Images)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:29 PM IST

हेलमेट, गैस मास्क और कैमोफ्लाज वर्दी पहने अमेरिका के मिनेसोटा राज्य में फेडरल एजेंटों ने निशाना साधा और गोली चलाने को तैयार हो गए. टीवी माइक पर एक एजेंट ने कहा, 'ये तो बिल्कुल कॉल ऑफ ड्यूटी जैसा है.' उसने एक फर्स्ट-पर्सन शूटर मिलिट्री वीडियो गेम कॉल ऑफ ड्यूटी का जिक्र करते हुए कहा, 'कितना कूल है, है ना?'

मास्क और टैक्टिकल वेस्ट पहने हथियारबंद अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट  (ICE) एजेंटों ने 37 साल के एलेक्स प्रेट्टी को जमीन पर पटक दिया और गोली मारकर उनकी हत्या कर दी.

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शनिवार को मिनेसोटा के मिनियापोलिस शहर की सड़कों पर अराजकता फैली हुई थी और इसी बीच दनादन गोलियां चलने की आवाज आई. यह घटना उस जगह से लगभग एक मील दूर हुई, जहां 7 जनवरी को रेनी गुड की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. वो जगह भी उस स्थान से एक मील से कम दूरी पर थी, जहां मई 2020 में पुलिस ने जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या की थी.

ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने इस मामले को भी रेनी गुड के मामले की तरह रफा-दफा करने की कोशिश की और हत्या के लिए मृत प्रेट्टी को ही जिम्मेदार बताया.

शहर के मेयर क्या बोले?

शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में मिनियापोलिस के मेयर जैकब फ्रे ने रिपब्लिकन प्रशासन के कामकाज के तौर-तरीकों पर सवाल उठाया. उन्होंने प्रवासियों के खिलाफ ICE के ऑपरेशन पर निशाना साधते हुए कहा, 'इस ऑपरेशन को खत्म करने के लिए और कितने निवासियों, और कितने अमेरिकियों को मरना होगा... और कितने लोगों को बुरी तरह जख्मी होना होगा.' 

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एलेक्स प्रेट्टी की मौत से मिनियापोलिस में लोगों का गुस्सा उबाल पर है. लोग बड़ी संख्या में घरों से निकलकर सड़कों पर जमा हो गए और फेडरल अफसरों को गालियां देते हुए उन्हें 'कायर' कहने लगे. शहर के लोग लंबे समय से ICE एजेंट्स के शहर से बाहर जाने की मांग कर रहे हैं और इस घटना ने उनकी इस मांग को और मजबूत कर दिया है.

मिनेसोटा में गृहयुद्ध जैसे हालात

डोनाल्ड ट्रंप ने नौ साल पहले अपने पहले शपथ-भाषण के दौरान 'अमेरिकी तबाही' (American carnage) शब्द का जिक्र किया था. अब अमेरिकी राष्ट्रपति ने मानो उसे सच कर दिखाया है- एक बड़े शहर की सड़कों पर ICE एजेंट्स को उतारकर, ताकि आतंक का ऐसा तमाशा बनाया जाए जो गृहयुद्ध या किसी वीडियो गेम जैसा लगे.

रिपब्लिकन पार्टी के नेता ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही ICE की तैनाती ऐसे शहरों में की है जहां डेमोक्रेटिक पार्टी का शासन है और जिनका नेतृत्व किसी अश्वेत के हाथ में है. 

मिनेसोटा को लेकर क्यों नाराज रहते हैं ट्रंप?

द गार्डियन की एक रिपोर्ट में लिखा गया है कि ट्रंप के भीतर मिनेसोटा को लेकर खास नाराजगी दिखती है, क्योंकि वो वहां 2016, 2020 और 2024, तीनों राष्ट्रपति चुनाव हार चुके हैं, जबकि पड़ोसी राज्यों में ज्यादातर ने उनके पक्ष में वोट दिया. उन्होंने हाल ही में झूठा दावा किया कि वो तीनों बार मिनेसोटा जीत गए थे. हकीकत यह है कि 1972 में रिचर्ड निक्सन के बाद से वहां कोई रिपब्लिकन, यहां तक कि रोनाल्ड रीगन भी, नहीं जीत पाया.

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मिनेसोटा में देश की सबसे बड़ी सोमाली आबादी रहती है, जिससे राज्य ट्रंप के गुस्से का आसान शिकार बना हुआ है. इसी हफ्ते ट्रंप ने सोमालियों को 'लो-IQ वाले लोग' कहा था. मिनेसोटा सोमाली मूल की इल्हान उमर का भी घर है, जो प्रोग्रेसिव कांग्रेसवुमन हैं और ट्रंप को अक्सर खटकती हैं. राज्य के गवर्नर टिम वॉल्ज ट्रंप के तीखे आलोचक हैं और 2024 के चुनाव में कमला हैरिस के रनिंग मेट थे, हालांकि चुनाव ट्रंप जीत गए.

ट्रंप के पहले कार्यकाल के आखिरी दौर में मिनियापोलिस शहर में ही पुलिस ने जॉर्ज फ्लॉयड नाम के एक अश्वेत व्यक्ति की हत्या की थी. इस घटना ने ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन को भड़का दिया था, जिसकी लहर व्हाइट हाउस तक पहुंच गई थी. उन दिनों अमेरिका बेहद उबलता और टूटने के कगार पर लग रहा था. अब फिर वैसा ही एक पल सामने है.

ICE एजेंट्स तनाव कम करने के लिए सही तरीके से ट्रेंड नहीं

ट्रंप ने मिनेसोटा में 3,000 ICE अफसरों और कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन एजेंटों को तैनात किया है. यह संख्या वहां की 10 सबसे बड़ी स्थानीय और राज्य पुलिस एजेंसियों के कुल फोर्स से भी ज्यादा बताई जा रही है. इनमें से कई एजेंट्स मास्क, हथियार और दबंग अंदाज के साथ काम कर रहे हैं, लेकिन तनाव कम करने की उनकी ट्रेनिंग पर्याप्त नहीं दिखती.

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ये एजेंट्स स्थानीय नेताओं के साथ धक्का-मुक्की कर रहे हैं, कानूनी पर्यवेक्षकों को बिना आरोप हिरासत में ले रहे हैं, स्कूली बच्चों पर आंसू गैस छोड़ी गई, ड्राइवरों को कार से घसीटकर बाहर निकाला गया, यहां तक कि मूल अमेरिकी समुदाय के लोगों को भी रोका गया और पूछताछ की गई. अगर कोई एजेंटों का वीडियो भी रिकॉर्ड कर रहा है तो उसे घरेलू आतंकवाद बता दिया जा रहा है.

'तानाशाही ऐसी ही दिखती है'

पत्रकार और इतिहासकार गैरेट ग्रैफ ने अपने 'डूम्सडे सिनेरियो' ब्लॉग में अमेरिका की स्थिति पर लिखा, 'फासीवाद ऐसा ही दिखता है, लोकतंत्र और तानाशाही के बीच कोई चमकती हुई साफ रेखा नहीं होती, यह एक स्पेक्ट्रम है, और पूरे देश में यह बदलाव एक साथ, एक ही तरीके से महसूस नहीं होता. लेकिन साफ कहें तो, इस वक्त अमेरिका का एक शहर फासीवादी राष्ट्रपति की सीक्रेट पुलिस की कैद में जी रहा है.'

होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने दावा किया कि अफसरों ने अपने डिफेंस में गोलियां चलाईं क्योंकि वो व्यक्ति हैंडगन लेकर उनके पास आया था. हालांकि, घटना के वीडियो में साफ दिख रहा है कि प्रेट्टी के हाथ में गन नहीं बल्कि फोन था.

इस घटना पर अमेरिकी सांसद एलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज ने X पर लिखा, 'अमेरिकियों को उनकी सरकार सड़कों पर मार रही है. हमारा संविधान तार-तार किया जा रहा है और हमारे अधिकार खत्म हो रहे हैं. विरोध करो. सीनेट (डेमोक्रेट सांसदों) को इस हफ्ते ICE की फंडिंग रोकनी चाहिए. नेशनल गार्ड्स को एक्टिव करो. हम इसे रोक सकते हैं और रोकना ही होगा.' 

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