'सामूहिक विनाश के हथियार ही सुरक्षा की पक्की गारंटी', पूर्व रूसी राष्ट्रपति के बयान से सनसनी!

दुनिया जब टकराव के दौर से गुजर रही है तो रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने यह कहकर सनसनी मचा दी है कि हालांकि न्यूक्लियर हथियार संघर्षों में खतरा बढ़ाते हैं, लेकिन वे दूसरे देशों के खिलाफ "खतरनाक इरादे रखने वाले किसी भी व्यक्ति के दिमाग में डिटरेंट का काम करते हैं.

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रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव (Photo: Reuters) रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:17 PM IST

रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने यह कहकर वर्ल्ड पॉलिटिक्स में तहलका मचा दिया है कि, 'सामूहिक विनाश के हथियार ही राष्ट्रीय सुरक्षा की एकमात्र पक्की गारंटी हैं.' उन्होंने कहा कि दुनिया की अस्थिरता को देखकर लगता है कि ज्यादा से ज्यादा देश परमाणु हथियारों को हासिल होने की दिशा में काम करेंगे. 

 रूस के एक प्रमुख और प्रतिष्ठित दैनिक अखबार Kommersant को दिए एक इंटरव्यू में रूसी सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी चेयरमैन दिमित्री मेदवेदेव ने न्यूक्लियर हथियारों के प्रसार को लेकर निराशा जताई, और कहा, "दुनिया की व्यवस्था में जो दरार पड़ी है, वह कई देशों को खुद की रक्षा के सबसे असरदार तरीके खोजने पर मजबूर कर रही है."

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उन्होंने कहा, "कुछ देश तय करेंगे कि सबसे अच्छा विकल्प न्यूक्लियर हथियार हासिल करना है." "कई देशों के पास मिलिट्री न्यूक्लियर प्रोग्राम चलाने की टेक्निकल क्षमता है, और कुछ इस क्षेत्र में रिसर्च कर रहे हैं, यह शायद इंसानियत के हित में न हो, लेकिन सच कहें तो, इंसानियत ने अभी तक खुद की रक्षा और संप्रभुता की गारंटी देने का कोई और तरीका नहीं खोजा है."

बता दें कि 1968 की नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों को ही परमाणु हथियार वाले एकमात्र देश मानती है. इस पर साइन होने के बाद से भारत, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया ने परमाणु हथियार बना लिए हैं, जबकि माना जाता है कि इजरायल के पास भी परमाणु क्षमता है.

बता दें कि दक्षिण अफ्रीका एकमात्र ऐसा देश है जिसने एक सफल मिलिट्री परमाणु कार्यक्रम को खत्म किया है. 

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इस बीच पिछले कुछ दशकों में कई देशों पर परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करने का आरोप लगा है खासकर ईरान पर. ईरान पर ही पिछले साल इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने ऐसे प्रयासों को रोकने के मकसद से हमला किया था. तब अमेरिका ने ईरान के परमाणु केंद्रों पर बी-2 बॉम्बर विमानों से बम गिराए थे. लेकिन तेहरान इस आरोप से इनकार करता है और कहता है कि वो यूरेनियम एनरिचमेंट करता है लेकिन उसका मकसद परमाणु बम बनाना नहीं है.

मेदवेदेव का इंटरव्यू अमेरिका के साथ न्यू START परमाणु हथियार कम करने वाली संधि के जल्द खत्म होने पर केंद्रित था. इस संधि पर उनके राष्ट्रपति रहते हुए साइन किए गए थे. उन्होंने कहा कि रूस ने अपने परमाणु हथियारों की वजह से अपनी संप्रभुता बनाए रखी है. उन्होंने कहा कि मौजूदा चुनौतियों के जवाब में रूस नए डिलीवरी सिस्टम विकसित कर रहा है.

मेदवेदेव ने कहा, "यूरोपियन और बाइडेन प्रशासन के तहत अमेरिकी लगातार हमें सख्त जवाब देने के लिए उकसा रहे हैं. और वे उकसाने वाली हरकतें जारी हैं." उन्होंने आगे कहा कि रूस ने हाल ही में यूक्रेन के एक मिलिट्री प्लांट के खिलाफ अपनी नई ओरेश्निक मीडियम-रेंज मिसाइल का इस्तेमाल किया जिसमें न्यूक्लियर वर्जन भी शामिल हो सकता था.

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रूस के पूर्व राष्ट्रपति और पुतिन के विश्वासपात्र रह चुके मेदवेदेव ने तर्क दिया कि हालांकि न्यूक्लियर हथियार संघर्षों में खतरा बढ़ाते हैं, लेकिन वे दूसरे देशों के खिलाफ "खतरनाक इरादे रखने वाले किसी भी व्यक्ति के दिमाग में ताजा हवा डालकर" स्थिरता को भी बढ़ावा देते हैं. 

उन्होंने अमेरिका के गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम को बेहद खतरनाक बताया. मेदवेदेव ने कहा कि यह मिसाइल डिफेंस सिस्टम रूस के लिए बहुत उकसावे वाला है, और इससे स्ट्रैटेजिक बैलेंस बिगड़ सकता है. 

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