समंदर पर शहर... लहरों पर होगी लग्जरी लाइफ! यहां इंसानियत का भविष्य ले रहा आकार

कुदरत की बनाई इस दुनिया में सीमाओं को तोड़ना इंसान की फितरत है. कल जो सिर्फ कल्पना थी, आज वो हकीकत बन रही है. हम बात कर रहे हैं समंदर पर बस रहे उस शहर की जो ग्लोबल वॉर्मिंग के खतरे से निपटने के लिए दुनियाभर के देशों के लिए एक फ्यूचर ब्लू प्रिंट साबित हो सकता है. हम नीली क्रांति के उस दौर में कदम रख रहे हैं जहां इंसान और समंदर के बीच जंग नहीं, बल्कि एक नई दोस्ती की कहानी लिखी जाएगी.

Advertisement
समंदर पर बसा शहर. (photo: ITG) समंदर पर बसा शहर. (photo: ITG)

संदीप कुमार सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 22 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:56 AM IST

कल्पना कीजिए एक ऐसे शहर की, जहां सड़कें तैरती हैं, घर लहरों के साथ झूला झूलते हैं और आपके खिड़की खोलते ही समंदर की मछलियां आपको गुड मॉर्निंग कहती हैं. यह कोई हॉलीवुड फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि दक्षिण कोरिया के बुसान में हकीकत बनने जा रहे शहर की प्रस्तावित तस्वीर है. दुनिया का ये पहला तैरता शहर होगा 'ओशनिक्स'. जहां जमीन खत्म होने का डर नहीं, बल्कि समंदर ही नया ठिकाना है.

Advertisement

कुछ दशक पहले जब समुद्र का स्तर बढ़ने की चेतावनी दी जाती थी, और इससे इंसानी बस्तियों को खतरे गिनाए जाते थे तो इसे केवल एक वैज्ञानिक संकट मानकर लोग अनसुना कर देते थे. लेकिन अब जब समंदर से सटे इलाकों में तबाही लगातार बढ़ने लगी है तो इसे असल समस्या के रूप में दुनिया लेने लगी है. ग्लोबल वॉर्मिंग और बढ़ते समुद्री स्तर ने दुनिया की नींद उड़ा रखी है. यूएन के आंकड़े डराने वाले हैं. दुनिया की 90% तटीय अर्थव्यवस्थाएं डूबने की कगार पर हैं. लेकिन इंसान ने हार नहीं मानी है.

ओशनिक्स सिटी- दक्षिण कोरिया के बुसान तट पर एक ऐसा चमत्कार आकार ले रहा है, जो भविष्य की बस्तियों का 'ब्लूप्रिंट' साबित हो सकता है. जब साल 2022 में संयुक्त राष्ट्र-हैबिटाट और ओशनिक्स ने इस तैरते शहर के प्रोटोटाइप का अनावरण किया था, तब लोगों ने इसे 'साइंस फिक्शन' कहकर खारिज कर दिया था. लेकिन आज, बुसान के पोर्ट की लहरों पर टिका यह शहर चीख-चीख कर कह रहा है कि भविष्य अब पानी पर है.

Advertisement

क्या है ओशनिक्स सिटी?

यह दुनिया का पहला 'तैरता हुआ स्मार्ट शहर' है. इसे किसी साइंस-फिक्शन फिल्म की तरह न समझें, क्योंकि इसे UN-Habitat का समर्थन प्राप्त है. बुसान के तट से कुछ दूर, यह शहर तीन विशाल प्लेटफॉर्म्स पर बसा होगा, जो कुल 15.5 एकड़ में फैला होगा. इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका 'मॉड्यूलर' होना है, यानी जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ेगी, लेगो ब्लॉक्स की तरह नए प्लेटफॉर्म्स जोड़कर शहर को बड़ा किया जा सकेगा.

यहां कोई ऊंची दीवारें या विशाल बांध नजर नहीं आते. यहां आपको समुद्र की सतह पर तैरते हुए षट्कोणीय द्वीप दिखाई देते हैं. यह शहर पानी के ऊपर तैरते हुए हेक्सागोनल शेप के प्लेटफॉर्म्स पर बना होगा. इस शहर की नींव पत्थरों या कंक्रीट की नहीं, बल्कि 'बायोरॉक' की होगी. यह एक जादुई मटेरियल है जो समुद्री खनिजों से बनता है. यह लोहे से भी सख्त है और इसमें सबसे खास बात यह है कि यह खुद की मरम्मत कर सकता है. यानी पानी के थपेड़ों से यह कमजोर नहीं, बल्कि समय के साथ और मजबूत होता जाता है.

तीन हिस्सों में बांटा होगा शहर

इस प्रोजेक्ट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहां 12,000 लोग सुकून से रह सकें. ये शहर तीन हिस्सों में बंटा होगा. पहला हिस्सा लिविंग प्लेटफॉर्म- जहां लोगों के घर और कम्युनिटी सेंटर होंगे. दूसरा लॉजिंग प्लेटफॉर्म- जो पर्यटकों के लिए होगा. तीसरा रिसर्च प्लेटफॉर्म- जहां वैज्ञानिक नई समुद्री तकनीकों पर काम करेंगे.

Advertisement

यहां रहने वाले लोग खुद को 'एक्वा-सिटीजन्स' कहेंगे. यहां कारों का शोर नहीं होगा, लोग साइकिल, इलेक्ट्रिक स्कूटर या छोटी नावों से सफर करेंगे. इस तैरते शहर में सर्वाइवल की सबसे बड़ी चुनौती पानी और बिजली है. ओशनिक्स ने इसका तोड़ निकाल लिया है. हर छत और खिड़की पर सोलर पैनल लगे होंगे जो खुद बिजली पैदा करेंगे. यहां पारंपरिक खेत नहीं, बल्कि एयरोपोनिक्स यानी हवा में खेती होगी. सड़कों के नीचे विशाल टैंकों में मछलियां पाली जाएंगी, जिससे ताजा खाना शहर के भीतर ही पैदा होगा. बारिश के पानी को सहेजने और समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाने के लिए एडवांस प्लांट लगाए जाएंगे, जो पूरी तरह सोलर एनर्जी से चलेंगे.

लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या लहरें इस शहर को बहा सकती हैं या समुद्री तूफान इसे तबाह कर सकता है क्या? तो इसका जवाब है कि लहरों से बचाव के लिए इसके निर्माण में खास तैयारी की गई है. यह तट से एक पुल के जरिए जुड़ा होगा, लेकिन लहरों के साथ ऊपर-नीचे होने की क्षमता रखेगा. लेकिन इंजीनियर्स का दावा है कि ओशनिक्स कैटेगरी-5 के महातूफानों को भी झेल सकता है. इसके प्लेटफॉर्म्स लचीले हैं, जो लहरों के साथ ऊपर-नीचे होते रहते हैं. जहां पुराने तटीय शहर बाढ़ में डूब जाएंगे, वहीं ओशनिक्स पानी के साथ तैर कर खुद को बचा लेगा.

Advertisement

भारत में भी चल रहा है 'फ्लोटिंग विला' पर काम

ओशनिक्स बुसान इस बात का प्रमाण है कि तकनीक और प्रकृति के बीच संघर्ष अनिवार्य नहीं है. हम समुद्र को अपना दुश्मन मानने की बजाय उसे अपना नया घर बना सकते हैं. सिर्फ कोरिया ही नहीं, मालदीव और न्यूयॉर्क भी इस रेस में हैं. भारत में भी लक्षद्वीप और अंडमान में 'फ्लोटिंग विला' पर काम चल रहा है. ओशनिक्स बुसान ने यह साबित कर दिया है कि जब जमीन कम पड़ने लगे, तो समंदर से डरने की बजाय उसे अपना नया ठिकाना बना लेना ही बुद्धिमानी है. यदि बुसान का यह सिटी मॉडल सफल रहता है तो संभव है कि आने वाले दशकों में हम महासागरों पर तैरते हुए पूरे देश भी देख सकेंगे.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement