अमेरिकी राजदूत गए थे मालदीव, मुइज्जु ने बिना मिले लौटाया, ईरान से जंग को लेकर दिखाया कड़ा रुख?

मालदीव दौरे पर पहुंचे अमेरिकी राजदूत की राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू से मुलाकात आखिरी वक्त पर रद्द कर दी गई थी. अब सामने आई वजहों में ईरान जंग, घरेलू राजनीति और चीन-भारत संतुलन की बड़ी कहानी छिपी है. इनके अलावा मुइज्जू का रुख है कि ईरान की जंग में उनके पास चर्चा के लिए कुछ भी नहीं है.

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अमेरिकी दूत सर्जियो गोर, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू. (Photo- ITG) अमेरिकी दूत सर्जियो गोर, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:14 PM IST

मालदीव की राजधानी माले में 23 मार्च का दिन सामान्य कूटनीतिक दौरे जैसा होना चाहिए था, लेकिन यह एक बड़े विवाद में बदल गया. अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर वहां पहुंचे, विदेश और रक्षा मंत्रियों से मुलाकात भी की, लेकिन राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू संग उनकी अहम बैठक आखिरी वक्त पर रद्द कर दी गई. हालात ऐसे बने कि अमेरिकी राजदूत को बिना राष्ट्रपति से मिले ही वापस लौटना पड़ा.

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यह सिर्फ एक "नॉन-मीटिंग" नहीं थी, बल्कि इसके पीछे कई परतें छिपी हुई हैं. बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति मुइज्जू ने जानबूझकर दूरी बनाई. इसकी एक बड़ी वजह उनका रुख माना जा रहा है, जिसमें वे अमेरिका-इजरायल की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के विरोध में खड़े हैं. खासतौर पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नीतियों को लेकर माले में असहमति साफ दिखाई दे रही है. ऐसे में अमेरिकी प्रतिनिधि से खुली बैठक से बचना एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है.

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हालांकि आधिकारिक तौर पर मालदीव की तरफ से यह कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति पिछले कुछ महीनों से बाहरी नेताओं से सीमित मुलाकातें कर रहे हैं, ताकि उन पर घरेलू राजनीति या विकास के मुद्दों पर दबाव न बने. लेकिन कूटनीतिक हलकों में इसे पूरी तरह स्वीकार नहीं किया जा रहा. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जब अमेरिकी पक्ष ने बैठक पर दोबारा विचार करने को कहा, तो मालदीव ने "प्राइवेट, बंद कमरे" में मुलाकात का विकल्प दिया, जिसे अमेरिकी राजदूत ने ठुकरा दिया. इसके बाद वे बिना मुलाकात के ही दिल्ली रवाना हो गए.

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इंडिया के विरोध के साथ सत्ता में आए थे मुइज्जू

इस घटना को समझने के लिए मालदीव की मौजूदा घरेलू राजनीति को भी देखना जरूरी है. 'इंडिया आउट' अभियान के साथ सत्ता में आए राष्ट्रपति मुइज्जू इस समय राजनीतिक दबाव में हैं. हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में उनकी पार्टी को करारा झटका लगा, जबकि विपक्षी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी ने सभी बड़े शहरों में जीत दर्ज की. इतना ही नहीं, एक संवैधानिक जनमत संग्रह में भी सरकार का प्रस्ताव जनता ने खारिज कर दिया. इससे साफ है कि मुइज्जू की पकड़ कमजोर हुई है.

भारत का कर्ज, चीन भी एक फैक्टर

आर्थिक मोर्चे पर भी मालदीव मुश्किल में है. सरकार ने हाल ही में भारी कर्ज चुकाया है और अब भारत से करीब 400 मिलियन डॉलर के लोन को आगे बढ़ाने की मांग कर रही है. लेकिन भारत की अपनी सीमाएं हैं, क्योंकि पहले ही दो बार लोन रोलओवर दिया जा चुका है. ऐसे में माले की आर्थिक स्थिति भी कूटनीतिक फैसलों को प्रभावित कर रही है. इसी बीच चीन का फैक्टर भी इस कहानी में अहम है. मुइज्जू सरकार ने एक बड़े पोर्ट प्रोजेक्ट को भारत की बजाय चीन की कंपनी को सौंप दिया, जिससे संकेत मिला कि मालदीव अपनी रणनीति में संतुलन बदल रहा है.

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सर्जियो गोर संग मीटिंग पर क्या बोले मुइज्जू?

सर्जियो गोर संग मीटिंग रद्द किए जाने को लेकर मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू ने कहा कि गोर ने उनसे मिलने की इच्छा जताई, लेकिन मौजूदा जंग के मुद्दे पर मालदीव के पास अमेरिका से बात करने के लिए कुछ नहीं है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनके देश की कोई भी जमीन इस युद्ध या किसी अन्य युद्ध के लिए इस्तेमाल नहीं होने दी जाएगी.

सर्जियो गोर की यात्रा से पहले सोशल मीडिया पर विवाद भी खड़ा हो गया था. एक फेसबुक यूजर ने उनके खिलाफ हिंसक टिप्पणी करते हुए लोगों से उन्हें पत्थर मारने तक की बात कही थी. यह पोस्ट उसी दिन सामने आई जब अमेरिकी सरकार ने गोर के मालदीव और श्रीलंका दौरे की घोषणा की थी. हालांकि, इस धमकी को लेकर स्थानीय पुलिस की तरफ से किसी जांच की पुष्टि नहीं की गई है.

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