11 दिनों के भीषण संग्राम के बाद इजरायल और हमास के बीच युद्ध-विराम हो गया है. इस युद्धविराम में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अहम भूमिका निभाई है. जानकारी के मुताबिक बाइडेन ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से लगातार सम्पर्क बनाए रखा.
माना जा रहा है कि बाइडेन, पर्दे के पीछे रहकर संघर्षविराम का दबाव बनाते रहे. इसी बीच राष्ट्रपति जो बाइडेन ने शुक्रवार को कहा कि इजरायल की सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता में कोई बदलाव नहीं आया है.
बाइडेन ने इजरायल-हमास की 11 दिनों की लड़ाई के बाद संघर्ष विराम के पहले दिन व्हाइट हाउस समाचार सम्मेलन में बात की, इस हमले में 200 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें से अधिकांश गाजा में फिलिस्तीनी थे. उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि मेरी पार्टी अब भी इजराइल का समर्थन करती है. हालांकि उन्होंने आगे कहा कि इजरायल की सुरक्षा को लेकर भी हमारी प्रतिबद्धता में कोई बदलाव नहीं है.
11 दिनों के खूनी संघर्ष के बाद गाजा पट्टी में सीजफायर, हमले में मारे गए 227 फिलिस्तीनी, 11 इजरायली
अपनी डेमोक्रेटिक पार्टी के कई सांसदों की स्थिति और उनकी प्रतिबद्धता के बदलाव पर एक सवाल के जवाब में, बाइडेन ने कहा कि कोई बदलाव नहीं, बिल्कुल नहीं. उन्होंने कहा कि लेकिन मैं आपको बताता हूं कि इसमें क्या बदलाव है, बदलाव यह है कि हमें अभी भी दो-राज्य के बीच समाधान खोजने की आवश्यकता है, यही एकमात्र जवाब है. बाइडेन ने कहा कि मैं प्रार्थना कर रहा हूं कि यह संघर्ष विराम कायम रहेगा. मैं मानता हूं कि नेतन्याहू जब भी मुझे अपना वचन देते हैं, उसे निभाते हैं. उन्होंने मुझे दिया अपना वचन कभी नहीं तोड़ा.
इजरायल और हमास के बीच लड़ाई
इजरायल और हमास के बीच लड़ाई 11 दिन पहले शुरू हुई जब उग्रवादी समूह ने यरुशलम पर लंबी दूरी के रॉकेट दागे. इससे पहले अल-अक्सा मस्जिद में फिलिस्तीनी प्रदर्शनकारियों और इजरायली पुलिस के बीच झड़पों से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई थी. इसके बाद इजरायल ने हमास को निशाना बनाते हुए सैकड़ों हवाई हमले किए. हमास और अन्य उग्रवादी समूहों ने इजरायली शहरों में 4,000 से अधिक रॉकेट दागे.
गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 64 बच्चों और 38 महिलाओं समेत कम से कम 227 फिलिस्तीनी मारे गए और 1,620 लोग घायल हैं. हमास और इस्लामिक जिहाद ने कम से कम 20 लड़ाकों के मारे जाने की बात कही है जबकि इजरायल का कहना है कि कम से कम 130 लड़ाके मारे गए हैं. करीब 58,000 फिलिस्तीनी अपने घरों को छोड़कर जा चुके हैं. इजरायल में पांच साल के लड़के, 16 साल की लड़की और एक सैनिक समेत 12 लोगों की मौत हुई है.
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