भारत में जॉर्डन के राजदूत यूसुफ अब्दुल गनी ने साफ कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के मामले में जॉर्डन तटस्थ है. उनका कहना था कि क्षेत्र के हर देश की संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए. इस दौरान उन्होंनेपश्चिम एशिया का नक्शा दोबारा खींचने की चर्चाओं को “बकवास” बताते हुए खारिज कर दिया. जॉर्डन के राजदूत नई दिल्ली में आयोजित इंडिया टुडे कॉनक्लेव 2026 में शिरकत करने पहुंचे थे, जहां उन्होंने सवालों के जवाब दिए.
सिर्फ बातचीत से आएगी स्थिरता
यूसुफ अब्दुल गनी ने शुक्रवार को कहा कि कुछ देश ऐसे व्यवहार करते हैं मानो वे 'कानून से ऊपर" हों. उन्होंने जोर देकर कहा कि पश्चिम एशिया में स्थायी स्थिरता केवल संवाद और शांतिपूर्ण वार्ताओं के जरिए ही संभव है. अब्दुल गनी ने युद्ध को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि दी कि संघर्ष केवल पीड़ा और अस्थिरता लाता है. इसके कारण ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और क्षेत्र के देशों के बीच लोगों के आपसी संबंध भी प्रभावित होते हैं.
उन्होंने पश्चिम एशिया का नक्शा दोबारा खींचने की चर्चाओं को “बकवास” बताते हुए खारिज कर दिया. उनका कहना था कि क्षेत्र के हर देश की संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए.
अब्दुल गनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि युद्ध के बाद ईरान का नक्शा बदल सकता है. साथ ही तथाकथित “ग्रेटर इज़राइल” परियोजना को लेकर चल रही बहस पर भी उन्होंने चिंता जताई. उनका कहना था कि शासन परिवर्तन या सीमाएं बदलने की मांग अक्सर अस्थिरता को जन्म देती है.
जॉर्डन इस संघर्ष में है तटस्थ
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान द्वारा अपने हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करके इजरायल और खाड़ी देशों को निशाना बनाना सही नहीं है. जॉर्डन पहले से स्पष्ट है कि उसके एयर स्पेस का उपयोग किसी देश पर हमले के लिए इस्तेमाल नहीं होगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि जॉर्डन इस संघर्ष में तटस्थ रुख बनाए हुए है और उसका मानना है कि शांतिपूर्ण वार्ता ही आगे बढ़ने का एकमात्र व्यवहारिक रास्ता है.
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