घुसपैठ के लिए ISI की नई साजिश, बॉर्डर पार से भारत में भेज रहा नशेड़ी

भारतीय अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि बॉर्डर पर पकड़े जाने वाले लोग इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के संदेशवाहक हैं, जिन्हें जहां भी संभव हो, जेल में बंद आतंकवादियों तक महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाने का काम सौंपा गया है.

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बॉर्डर की फाइल फोटो. बॉर्डर की फाइल फोटो.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 5:41 PM IST

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI कथित तौर पर नशीली दवाओं के प्रभाव में या मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्तियों को भारत में घुसपैठ करा रही है, ताकि उनका इस्तेमाल देश की जेलों में बंद कट्टर आतंकवादियों तक महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाने के लिए किया जा सके.

अधिकारियों ने बताया कि इस साल जुलाई से अब तक 10 से ज्यादा ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें पाकिस्तानी नागरिक अपने देश और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से भारत में घुसे हैं. इनमें से कई को जम्मू, पंजाब और राजस्थान की जेलों में भेजा गया है.

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स्पेशल ट्रेन्ड हैं ये घुसपैठिए

भारतीय अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि ये लोग इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के संदेशवाहक हैं, जिन्हें जहां भी संभव हो, जेल में बंद आतंकवादियों तक महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाने का काम सौंपा गया है. इन व्यक्तियों से पूछताछ से आमतौर पर पता चलता है कि उन्हें सुरक्षाकर्मियों द्वारा की जाने वाली पूछताछ का सामना करने के लिए प्रतिरोध तकनीकों में प्रशिक्षित (Trained) किया गया है.

पकड़े गए लोगों के व्यवहार ने अधिकारियों के बीच संदेह पैदा कर दिया है. पकड़े गए लोगों के टालमटोल जवाब उनकी घुसपैठ के पीछे संभावित रूप से एक बड़े एजेंडे का संकेत देते हैं. उन्होंने बताया कि मोबाइल फोन और इंटरनेट के इस्तेमाल से इलेक्ट्रॉनिक फुटप्रिंट्स पीछे छूट जाते हैं, जो सीमा पार से संचालित सरकारी और गैर-सरकारी दोनों तरह के तत्वों की योजनाओं को उजागर कर सकते हैं. अधिकारियों को संदेह है कि ISI अब यह नया तरीका अपना रहा है.

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अधिकारियों को मिला गीला कागज

हालिया घुसपैठ की रणनीति में कथित तौर पर महिलाएं और नाबालिग शामिल हैं, जो कूरियर का काम भी कर सकते हैं. जुलाई में एक उल्लेखनीय घटना में, पाकिस्तान के अटक से एक नाबालिग को पंजाब में रोका गया था. अधिकारियों ने बताया कि तलाशी के दौरान सुरक्षाकर्मियों को एक गीला कागज मिला जिस पर अरबी भाषा में कुछ लिखा हुआ था, हालांकि वह पढ़ने लायक नहीं था.

बॉर्डर पार से जानकारी जुटाने आ रहे लोग

आईएसआई की घुसपैठ की रणनीति को ड्रग तस्करी से जोड़ा गया है. राजस्थान के बिजनौर गांव में एक मामले में, मानसिक रूप से विक्षिप्त दिखने वाले एक पाकिस्तानी नागरिक ने गहन पूछताछ के दौरान आखिरकार यह खुलासा कर दिया कि उसे पाकिस्तान के दो ड्रग माफिया सरफराज जोहिया और नवाज ने भारत में मादक पदार्थों की तस्करी को बढ़ावा देने और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों की तैनाती के बारे में जानकारी जुटाने के लिए काम पर रखा था.

खुद BSF से गिरफ्तार होने का इंतजार कर रहा घुसपैठिया

हाल ही में एक अन्य घटना में, लाहौर से मोहम्मद असद नामक एक पाकिस्तानी युवक अपनी मोटरसाइकिल पर जीरो लाइन पर चला गया और बीएसएफ द्वारा गिरफ्तारी का इंतजार करने लगा. पूछताछ के दौरान उसने दावा किया कि उसकी गर्लफ्रेंड को लेकर उसका पारिवारिक विवाद था. अधिकारियों ने बताया कि असद, जिसे बाद में जेल भेज दिया गया, संभवतः कूरियर के रूप में काम कर रहा था. सुरक्षा एजेंसियों ने विस्तृत पूछताछ के लिए अतिरिक्त हिरासत का अनुरोध किया है.

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अक्टूबर में, 31 वर्षीय एक व्यक्ति जिसने अपना नाम शाहिद इमरान बताया, जम्मू सेक्टर के रास्ते भारत में घुस आया और दावा किया कि वह शादी करने के लिए काली मंदिर जाना चाहता है. अधिकारियों ने बताया कि ऐसे घुसपैठियों पर आमतौर पर विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाता है, जिसके लिए दो साल से लेकर आठ साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है और इसके बाद उन्हें निर्वासित कर दिया जाता है.

उन्होंने कहा कि 1990 के दशक के अंत और 2000 के दशक के प्रारंभ में ISI ने भारत और पाकिस्तान के बीच रेल संपर्क मार्ग समझौता एक्सप्रेस का गुप्त कूरियर परिचालन के लिए दुरुपयोग किया और इसके लिए "सवारी ऑपरेटर" के रूप में आने जाने वाले व्यक्तियों को नियुक्त किया. यह सेवा फरवरी 2019 तक जारी रही, उसके बाद ट्रेन सेवा रोक दी गई. 'सवारी संचालकों' ने जम्मू-कश्मीर तथा पंजाब में आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए नशीले पदार्थों की तस्करी तथा धन के परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

हालांकि, प्राधिकारियों द्वारा की गई कड़ी कार्रवाई के बाद इन कार्रवाइयों पर प्रभावी रूप से अंकुश लगा दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप ऐसी गतिविधियों में शामिल अनेक व्यक्तियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया.

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अधिकारियों ने कहा कि अब अपनाई जा रही घुसपैठ की रणनीतियां अतीत की याद दिलाती हैं, क्योंकि एजेंसी कानून प्रवर्तन को दरकिनार करने तथा सीमा पार महत्वपूर्ण संचार और संसाधन पहुंचाने के नए तरीके खोज रही है.

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