सैनिक-विमान गंवाए, सबसे बड़े युद्धपोत को भी नुकसान... ईरान जंग के बीच अमेरिका ने क्या-क्या खोया

ईरान के जवाबी हमलों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों, अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों और विमानों को गंभीर क्षति पहुंची है. बीते दो हफ्तों में अमेरिका को एक के बाद एक कई बड़े झटके लगे हैं, जिससे इस युद्ध की कीमत और जोखिम दोनों बढ़ते नजर आ रहे हैं.

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ईरान वॉर में शामिल अमेरिका के सबसे बड़े युद्धपोत USS गेराल्ड में आग लग गई थी. (File Photo-ITG) ईरान वॉर में शामिल अमेरिका के सबसे बड़े युद्धपोत USS गेराल्ड में आग लग गई थी. (File Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:29 AM IST

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध में अमेरिका और इजरायल की ओर से लगातार सैन्य कार्रवाई जारी है. अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी कार्रवाई को 'Operation Epic Fury' नाम दिया है. लेकिन इस युद्ध में अमेरिका को भी भारी नुकसान झेलना पड़ा है. ईरान के जवाबी हमलों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों, अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों और विमानों को गंभीर क्षति पहुंची है. बीते दो हफ्तों में अमेरिका को एक के बाद एक कई बड़े झटके लगे हैं, जिससे इस युद्ध की कीमत और जोखिम दोनों बढ़ते नजर आ रहे हैं.

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ईरान वॉर में शामिल अमेरिका के सबसे बड़े युद्धपोत USS गेराल्ड आर. फोर्ड (CVN-78) में आग लग गई थी. आग युद्धपोत के मुख्य लाउंड्री में लगी, जिस पर बाद में काबू पा लिया गया. दुनिया के सबसे बड़े युद्धपोत में शामिल USS गेराल्ड आर. फोर्ड इस वक्त लाल सागर में खड़ा है. इस युद्धपोत को अमेरिकी सेना ईरान पर प्रहार करने के लिए बेस के तौर पर इस्तेमाल कर रही है. अमेरिकी नेवी ने दावा किया है कि आग की वजह युद्ध से जुड़ी नहीं है और एयरक्राफ्ट कैरियर पूरी तरह चालू है.

इसके अलावा अब तक अमेरिका अपने 3 लड़ाकू विमान जंग में खो चुका है जबकि नया झटका इराक में लगा है, जहां अमेरिकी वायुसेना का KC-135 रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट क्रैश हो गया. अमेरिकी सेना ने इसे तकनीकी दुर्घटना बताया है, जबकि ईरानी मीडिया का दावा है कि यह हमला था. KC-135 विमान हवा में उड़ रहे लड़ाकू विमानों को ईंधन देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है और अमेरिकी सैन्य अभियानों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है.

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तीन F-15E विमानों का नुकसान

इससे पहले अमेरिका ने कुवैत में भी अपने तीन F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान खो दिए थे. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार यह घटना ‘फ्रेंडली फायर’ यानी सहयोगी सेना की गलती से हुई, जब कुवैती एयर डिफेंस सिस्टम ने गलती से इन विमानों को निशाना बना लिया. इन विमानों में सवार सभी छह सैन्यकर्मी सुरक्षित बचा लिए गए थे.

अमेरिका को युद्ध के दौरान सबसे बड़ा आर्थिक झटका कतर स्थित अल उदेद एयर बेस पर लगा है. यहां तैनात अमेरिका का अत्याधुनिक AN/FPS-132 अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम ईरानी मिसाइल हमले में गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया. इस रडार सिस्टम की कीमत लगभग 1.1 बिलियन डॉलर (करीब 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक) बताई जा रही है. यह सिस्टम लंबी दूरी से मिसाइलों और हवाई खतरों को पहचानने में सक्षम होता है, इसलिए इसकी क्षति अमेरिकी रक्षा प्रणाली के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है.

22 हजार करोड़ का डिफेंस सिस्टम भी तबाह

इसके अलावा ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में तैनात अमेरिकी THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भी निशाना बनाने का दावा किया है. THAAD सिस्टम की कीमत लगभग 22 हजार करोड़ रुपये बताई जाती है, जबकि इसके रडार सिस्टम की कीमत ही करीब 2700 करोड़ रुपये है. यह रडार दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक करने में अहम भूमिका निभाता है. अगर यह नुकसान सही साबित होता है, तो यह अमेरिका की एयर डिफेंस क्षमता पर बड़ा असर डाल सकता है.

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ईरान के हमलों का असर सिर्फ एक-दो ठिकानों तक सीमित नहीं रहा है. रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, अब तक बहरीन, कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन समेत मध्य पूर्व के कम से कम 17 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अलग-अलग स्तर पर नुकसान पहुंचा है. बहरीन के मनामा में स्थित अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय पर भी ईरानी मिसाइल हमले की खबर सामने आई, जिसमें दो सैटेलाइट कम्युनिकेशन टर्मिनल और कई इमारतों को नुकसान पहुंचा.

अमेरिका के 13 जवानों की मौत

मानवीय नुकसान के मामले में भी अमेरिका को झटका लगा है. युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 140 से अधिक घायल हुए हैं. सबसे बड़ा नुकसान कुवैत के कैंप अरिफजान में हुआ, जहां एक ईरानी ड्रोन हमले में एक साथ छह अमेरिकी सैनिक मारे गए. इस घटना ने अमेरिकी प्रशासन को झकझोर दिया और अमेरिका के भीतर युद्ध को लेकर बहस तेज हो गई.

उधर ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका और इजरायल अपने हमले नहीं रोकते, तब तक उसकी जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी. ईरान ने संकेत दिया है कि वह लंबे समय तक संघर्ष के लिए तैयार है. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि अमेरिकी हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हो चुकी है और जल्द ही उसे झुकना पड़ेगा.

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