ईरान में bloodbath... छन-छन कर बाहर आ रही है दमन की दास्तान और लोगों की कराह!

ईरानी जमीन जंग का मैदान बनी हुई है. यूं तो इस देश में सख्ती और कम्युनिकेशन ब्लैकआउट है, लेकिन वहां से रिस रिसकर जो जानकारियां आ रही है वो भयावह स्थिति को बता रही है. चश्मदीद साफ बता रहे हैं कि देश में खून खराबा मचा हुआ है. छतों पर स्नाइपर्स तैनात हैं और लोगों को गोलियां मारी जा रही है.

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ईरानी विद्रोहियों के समर्थन में एम्सटर्डम में प्रदर्शन (Photo: AP) ईरानी विद्रोहियों के समर्थन में एम्सटर्डम में प्रदर्शन (Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:33 PM IST

"मैं कुछ मिनट के लिए कनेक्ट हो पाया, बस यह कहने के लिए कि यहां खून-खराबा हो रहा है," तेहरान के एक बिजनेसमैन सईद ने सैटेलाइट इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल करके दुनिया को मैसेज भेजने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली.  हजारों दूसरे लोगों की तरह सईद भी एक ऐसे देश से बात कर रहे थे जो लगभग पूरी तरह से कम्युनिकेशन ब्लैकआउट में डूबा हुआ है, जहां सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को अंधाधुंध ताकत से दबाया जा रहा है.

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28 दिसंबर 2025 को आर्थिक मुश्किलों को लेकर शुरू हुए प्रदर्शन अब दशकों में ईरान के धार्मिक शासन के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गए हैं. शुरुआत में बेतहाशा महंगाई, खाने-पीने की चीज़ों की बढ़ती कीमतों और राष्ट्रीय मुद्रा के गिरने से लोगों में गुस्सा भड़का, और यह अशांति तेज़ी से पूरे देश में फैल गई.

विरोध प्रदर्शन सभी 31 प्रांतों में फैल गए, जिसमें छात्र, बाज़ार के व्यापारी और आम नागरिक सड़कों पर उतर आए. नारे जल्द ही आर्थिक शिकायतों से बदलकर खुले तौर पर सरकार विरोधी नारे बन गए, जिसमें प्रदर्शनकारी बड़े राजनीतिक बदलाव और धार्मिक शासन को खत्म करने की मांग कर रहे थे. 

पाबंदियों के बावजूद चश्मदीदों की गवाही और दमन की कहानियां सामने आ रही है. ईरानी लोग ऑनलाइन होने के लिए जोखिम भरे और जुगाड़ वाले तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. जिसमें सैटेलाइट लिंक और खुफिया कनेक्शन शामिल हैं. उन्होंने बताया है कि भीड़ पर गोलियां चलाई गईं, छतों पर स्नाइपर तैनात थे और अस्पताल गंभीर रूप से घायल प्रदर्शनकारियों से भरे हुए थे. 

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'सरकार हत्याएं कर रही है'

एक पब्लिशिंग कंपनी में काम करने वाली 30 साल की एक प्रदर्शनकारी यासी ने कहा, "सरकार हत्याएं कर रही है." न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा इंटरव्यू किए गए अन्य लोगों की तरह उसने भी सुरक्षा के लिए अपनी पहचान गुप्त रखने का अनुरोध किया. 

यासी ने याद किया कि 9 जनवरी की रात को वह तेहरान के अंदरज़गू बुलेवार्ड पर अपने दोस्तों के साथ मार्च कर रही थी, तभी सुरक्षा बल अचानक आ गए. एक किशोर लड़के को पैर में गोली लग गई और उसकी मां दर्द से चिल्लाने लगी. यासी ने बताया, "मेरा बेटा! मेरा बेटा! उन्होंने मेरे बेटे को गोली मार दी!' वह औरत रो रही थी."

तेहरान के बिजनेसमैन सईद ने कहा कि मौजूदा कार्रवाई की क्रूरता पिछली विरोध प्रदर्शनों के दौरान देखी गई किसी भी चीज से कहीं ज़्यादा है. उन्होंने कहा, "यह पहले हुए किसी भी विरोध प्रदर्शन जैसा नहीं है. मैंने खुद अपनी आंखों से एक नौजवान को सिर में गोली लगते देखा."

रेजा ने रिश्तेदारों को बताया कि 8 जनवरी को जब वे एक विरोध प्रदर्शन से घर लौट रहे थे, तो उनकी पत्नी मरियम को गोली मार दी गई. वह एक घंटे से ज़्यादा समय तक उनका शव लेकर घूमते रहे, जब तक कि कुछ अजनबियों ने उसे चादर में लपेटने में मदद नहीं की. कुछ दिन पहले, मरियम ने अपने छोटे बच्चों से कहा था कि कुछ माता-पिता विरोध प्रदर्शन में जाते हैं और कभी वापस नहीं आते. वह उन हज़ारों लोगों में से एक थीं जो वापस नहीं लौटे.

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पड़ोस में खून की गंध आ रही है

एक प्रदर्शनकारी ने BBC पर्शियन को बताया, "हमारे पड़ोस में खून की गंध आ रही है,उन्होंने बहुतों को मार डाला." दूसरे ने कहा कि सुरक्षा बल "ज़्यादातर सिर और चेहरों पर गोली चला रहे थे."

इस सप्ताह ईरान से भागी एक युवा महिला ने स्थिति को 'युद्ध' बताया. हालांकि प्रदर्शनकारी "पहले से कहीं अधिक एकजुट" थे, लेकिन उसने कहा कि डर बहुत ज़्यादा हो गया था. उसने आगे कहा, "मुझे उन लोगों के लिए बहुत डर लग रहा है जो अभी भी ईरान में हैं."

एक्टिविस्ट और पत्रकारों द्वारा शेयर किए गए मैसेज से पता चलता है कि हिंसा विरोध प्रदर्शन वाली जगहों से कहीं ज़्यादा फैल गई है. बिना पुष्टि वाली खबरों के अनुसार कई पीड़ित तो प्रदर्शन कर ही नहीं रहे थे. बताया जा रहा है कि कुछ लोगों को तब गोली मारी गई जब वे छोटे-मोटे काम कर रहे थे, खाना खरीद रहे थे या मेडिकल अपॉइंटमेंट से लौट रहे थे.

कोई भी निशाना बन सकता है

एक सूत्र ने कहा, "सबसे ज़्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब बेतरतीब ढंग से हो रहा है," "कोई भी निशाना बन सकता है."

दूसरे मैसेज में शहरों में सैनिकों, टैंकों और भारी हथियारों से लैस सुरक्षा बलों की तैनाती का ज़िक्र है, जो जानलेवा ताकत का इस्तेमाल करके कर्फ्यू लागू कर रहे हैं. एक ईरानी ने कहा, "अगर वे दो से ज़्यादा लोगों को एक साथ देखते हैं, तो वे गोली चलाना शुरू कर देते हैं." "लोग अपने घरों से बाहर निकलने से भी बहुत डरे हुए हैं."

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पत्रकार मसीह अलीनेजाद द्वारा शेयर किए गए एक मैसेज में एक ईरानी ने गुहार लगाई, "दुनिया को बताओ कि हमने हार नहीं मानी है. हम अंदर फंसे हुए हैं."

महज गिरफ्तारियां नहीं, महज पिटाई नहीं. हत्याएं हो रही हैं

तुर्की भाग गए एक युवा ईरानी द्वारा रिकॉर्ड किए गए एक वायरल वीडियो में भी वैसी ही निराशा दिखी. उसने कहा, "बाहर के लोगों को कोई अंदाजा नहीं है कि हालात असल में कितने खराब हैं. महज गिरफ्तारियां नहीं, महज पिटाई नहीं. हत्याएं हो रही हैं.

चश्मदीदों का कहना है कि ईरानी सुरक्षा बल निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चला रहे हैं, और कभी-कभी ऑटोमैटिक हथियारों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं. अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि घायलों की हालत में गंभीर बदलाव आया है.

एक मेडिकल कर्मचारी ने द न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया, "पहले, प्रदर्शनकारी छर्रे लगने के घावों के साथ आते थे." "अब वे गोली लगने की चोटों और खोपड़ी के फ्रैक्चर के साथ आ रहे हैं." एक और डॉक्टर ने "बड़े पैमाने पर हताहतों की स्थिति" का वर्णन किया, जिससे इमरजेंसी रूम भर गए हैं। बताया गया है कि एक अस्पताल में एक घंटे में 19 गोली लगने वाले पीड़ितों का इलाज किया गया.

गवाहों ने यह भी बताया कि सेंट्रल तेहरान में छतों पर स्नाइपर्स तैनात थे, जो भीड़ पर गोलियां चला रहे थे, जिससे शांतिपूर्ण मार्च घबराहट और खून-खराबे में बदल गया.

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नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) के अनुसार, अब तक कम से कम 3,428 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं, और 10,000 से ज़्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है. 
 

रिपोर्ट: प्रतीक चक्रवर्ती

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