ईरान के परमाणु प्रोग्राम के प्रमुख मोहम्मद एस्लामी ने कहा है कि यदि सभी इंटरनेशनल सैंक्शन पूरी तरह हटाए जाते हैं, तो तेहरान अपने यूरेनियम संवर्धन के भंडार को कम करने पर विचार कर सकता है. यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे परमाणु विवाद को लेकर बातचीत दोबारा शुरू हुई है.
हालांकि ईरान ने साफ किया है कि अमेरिका के प्रति अविश्वास अब भी कायम है. विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान सीरियस बातचीत चाहता है, पर इसके लिए जरूरी है कि दूसरा पक्ष भी समान गंभीरता और रचनात्मकता दिखाए.
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ सालों में अमेरिका के व्यवहार की वजह अविश्वास की समस्या बनी हुई है, जो अभी भी बातचीत की सबसे बड़ी बाधा है.
अराघची ने ये बातें राजधानी तेहरान में राजनयिकों को संबोधित करते हुए कहीं. उन्होंने मौजूदा स्थिति को समझाते हुए कहा कि दबाव, धमकियों और प्रतिबंधों के माहौल में कोई बातचीत संभव नहीं है.
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वहीं, ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारिजानी के ओमान दौरे की भी तैयारी हो रही है. वहां वह रीजनल और इंटरनेशनल हालात के अलावा द्विपक्षीय सहयोग पर बातचीत करेंगे. याद रहे कि हाल ही में ओमान में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों ने डिप्लोमेटिक मुद्दों को आगे बढ़ाने की इच्छा जताई थी.
पिछले साल पांच दौर की बातचीत विफल हो गई थी क्योंकि यूरेनियम संवर्धन को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच मतभेद थे. अमेरिका चाहता है कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को भी वार्ता में शामिल किया जाए, लेकिन ईरान ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया. ऐसे में सैंक्शन हटाने की शर्त पर यूरेनियम भंडार कम करने का संकेत आने वाले समय में वार्ता की दिशा तय कर सकता है.
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