ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता और बढ़ते सैन्य तनाव के बीच आजतक की टीम तेहरान से आगे बढ़कर उस पवित्र शहर कोम (Qom) पहुंच गई है, जिसका शिया समुदाय में न केवल आध्यात्मिक महत्व है, बल्कि ईरान के कई बड़े फैसले इसी जगह से जुड़े होते हैं. कोम में फातिमा मासूमेह का प्रसिद्ध श्राइन स्थित है.
कोम श्राइन आजतक की टीम की सूत्रों ने बताया कि ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई ने हाल ही में यहां दौरा किया था. ये दौरा इसलिए खास है, क्योंकि इतिहास में सुप्रीम लीडर जब-जब कोम के श्राइन (खासकर फातिमा मासूमेह श्राइन और जामकरण मस्जिद) पहुंचते हैं तो अक्सर उसके बाद ईरान कोई बड़ा ऐलान करता है या सैन्य कार्रवाई की शुरुआत होती है.
उदाहरण के तौर पर जून 2025 में 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस' (या इससे जुड़ी सैन्य तैयारियों) से पहले भी सुप्रीम लीडर ने इसी श्राइन का दौरा किया था. अब, जब अमेरिका ने यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड जैसे विमानवाहक पोत को मिडिल ईस्ट रवाना कर दिया है तो ईरान में हालिया विरोध प्रदर्शनों पर घातक कार्रवाई हुई है, और परमाणु वार्ता चल रही है, तब सुप्रीम लीडर का ये दौरा युद्ध की तैयारियों या बड़े फैसले का संकेत माना जा रहा है.
कोम में भारी-भीड़
कोम (Qom) में मौजूद आजतक टीम ने देखा कि श्राइन पर भारी भीड़ है. तीर्थयात्री प्रार्थना कर रहे हैं, जबकि शहर की सड़कों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है. क़ुम को शिया इस्लाम की 'धार्मिक राजधानी' कहा जाता है, जहां से कई फैसले आध्यात्मिक मार्गदर्शन के बाद लिए जाते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम लीडर का यहां आना ईरान की रणनीति में 'दिव्य मार्गदर्शन' की तलाश या जनता में एकजुटता बढ़ाने का प्रयास हो सकता है, खासकर जब अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव चरम पर है.
ईरान का सबसे पवित्र शहर है कोम
आपको बता दें कि शिया समुदाय के लिए क़ुम दूसरा सबसे पवित्र शहर माना जाता है (नजफ और मशहद के बाद). यहां फातिमा बिंत मूसा (इमाम रजा की बहन), जो शिया तीर्थयात्रियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. साथ ही क़ुम शिया थियोलॉजी (धार्मिक शिक्षा) का प्रमुख केंद्र है, जहां हजारों छात्र धार्मिक गुरुओं से शिक्षा प्राप्त करने के लिए आते हैं और फिर यहां अपने-अपने देशों में शिया समुदाय की प्रथाओं का प्रचार करते हैं.
सुमित चौधरी