ब्रिटेन की हाउस ऑफ कॉमन्स (ब्रिटिश संसद का निचला सदन) के स्पीकर लिंडसे होयल ने भारत को 'मदर ऑफ डेमोक्रेसी' (लोकतंत्र की जननी) बताया. उन्होंने कहा कि भारत के कुछ पड़ोसी देशों को यह समझने और आत्ममंथन करने की आवश्यकता है कि वास्तविक लोकतंत्र क्या होता है. उन्होंने यह टिप्पणी लंदन में भारतीय उच्चायोग द्वारा आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह को संबोधित करते हुए की. यह कार्यक्रम भारत के संविधान को अपनाने की 77वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था.
लिंडसे होयल ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक यात्रा विश्व इतिहास की एक असाधारण उपलब्धि है. उन्होंने कहा, 'ब्रिटेन को भले ही संसदीय लोकतंत्र की जननी कहा जाता हो, लेकिन जब मैं यह देखता हूं कि भारत में लगभग एक अरब लोग मतदान करते हैं, मतों की गिनती होती है और शांतिपूर्ण ढंग से सत्ता का हस्तानांतरण होना वास्तव में अद्भुत है.' उन्होंने इसे लोकतंत्र की जीवंतता और मजबूती का प्रतीक बताया. यूके स्पीकर ने कहा कि लोकतंत्र स्वतंत्र विश्व की आधारशिला है और जो देश अब भी सच्चे लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित हैं, उन्हें इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.
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उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत आने वाले समय में भी लोकतांत्रिक मूल्यों का एक वैश्विक मील का पत्थर बना रहेगा. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त विक्रम दोरईस्वामी ने भारत-ब्रिटेन संबंधों को 'प्रासंगिक, रणनीतिक और अनिवार्य' बताया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक, संस्कृति, खेल और लोगों के बीच संपर्क के कारण रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं.
दोरेस्वामी ने 2025 को भारत-ब्रिटेन संबंधों के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष बताते हुए कहा कि इस दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की पारस्परिक यात्राएं हुईं और व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसे आने वाले महीनों में ब्रिटिश संसद से मंजूरी मिलने की उम्मीद है. लंदन के ऐतिहासिक गिल्डहॉल में आयोजित इस समारोह में ढोल-भांगड़ा की प्रस्तुति, नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर हुई गणतंत्र दिवस परेड की झलकियां और दोनों देशों के राष्ट्रगानों ने उत्सव का माहौल बना दिया. कार्यक्रम में विभिन्न दलों के सांसद, प्रवासी भारतीय, शिक्षाविद, कारोबारी और सामुदायिक नेता शामिल हुए.
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