ईरान-अमेरिका सीजफायर के बीच खबर आ रही है कि भारत में सात सालों बाद ईरान से कच्चा तेल आने वाला है. ईरान की तरफ से तेल ऐसे वक्त में आ रहा है जब होर्मुज स्ट्रेट के करीब 40 दिनों तक बंद रहने से तेल की कीमतें बढ़ गई हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने पोत ट्रैकिंग डेटा के आधार पर बताया है कि इस हफ्ते ईरान से कच्चा तेल भारत आ सकता है. भारत ने अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरान से 2019 में तेल और गैस खरीदना बंद कर दिया था. पिछले महीने, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल को रोकने के लिए अमेरिका ने रूसी और ईरानी तेल की खरीद पर अस्थायी छूट दी थी, खासकर उन टैंकरों के लिए जो पहले से लदे हुए थे.
इस छूट के बाद कई देशों ने ईरानी तेल के ऑर्डर दिए हैं जिनमें भारत भी शामिल है. होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से मध्य पूर्व से तेल-गैस की सप्लाई प्रभावित होने के कारण भारत को तेल आपूर्ति के लिए नए विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं. भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग आधा हिस्सा मध्य पूर्व के देशों से आता है.
कितने देशों से कच्चा तेल मंगाता है भारत?
पिछले हफ्ते, भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि भारत 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल आयात करता है. भारत ने कहा था कि कंपनियों को व्यावसायिक जरूरतों के आधार पर अलग-अलग स्रोतों और क्षेत्रों से तेल खरीदने की पूरी आजादी है.
मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, 'मध्य पूर्व से सप्लाई रुकी है, इस बीच भारतीय रिफाइनरियों ने ईरान सहित कई देशों से कच्चा तेल मंगाया है. ईरानी तेल के आयात में पेमेंट से जुड़ी कोई दिक्कत नहीं है, जैसा कि कुछ अफवाहों में कहा जा रहा है.'
मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि आने वाले महीनों के लिए भारत की कच्चे तेल की जरूरतें पूरी तरह सुरक्षित हैं.
सात साल बाद ईरानी तेल खरीदने के अलावा, भारत ने अमेरिकी छूट के चलते बड़े पैमाने पर रूसी कच्चे तेल की खरीद भी फिर से शुरू कर दी है.
मध्य पूर्व में आपूर्ति बाधित होने और अमेरिकी छूट मिलने के बाद, मार्च में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात फरवरी की तुलना में 90% तक बढ़ गया.
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