अमेरिका में H-1B वीजा घोटाला, तेलुगू मूल के दो लोगों ने फर्जी नौकरी दिखाकर सिस्टम से किया बड़ा खेल

अमेरिका में H-1B वीजा धोखाधड़ी के मामले में दो भारतीय मूल के लोगों ने दोष स्वीकार कर लिया है. आरोप है कि उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के नाम पर फर्जी नौकरी दिखाकर वीजा हासिल किए और सिस्टम का गलत फायदा उठाया.

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H-1B सिस्टम में सेंध लगाकर दूसरों का हक छीना (Photo: ITG) H-1B सिस्टम में सेंध लगाकर दूसरों का हक छीना (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:07 PM IST

अमेरिका में रहने वाले दो भारतीय मूल के तेलुगु पुरुषों सम्पत राजिडी और श्रीधर माडा ने H-1B वीजा फ्रॉड की साजिश में अपनी गलती कबूल कर ली है. अमेरिकी न्याय विभाग ने इसकी पुष्टि की है. दोनों ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में नौकरी का झूठा वादा दिखाकर कई विदेशी नागरिकों के H-1B वीजा अप्रूव करवाए जबकि यूनिवर्सिटी में ऐसी कोई नौकरी थी ही नहीं. दोनों को 5 साल की जेल और 2.5 लाख डॉलर यानी करीब 2 करोड़ रुपये जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है.

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पहले आरोपी का नाम सम्पत राजिडी है. उम्र 51 साल. वो कैलिफोर्निया के डबलिन शहर में रहता है. उसने दो वीजा प्रोसेसिंग कंपनियां बना रखी थीं. एक का नाम एस-टीम सॉफ्टवेयर इंक. और दूसरी का नाम अपट्रेंड टेक्नोलॉजीज़ LLC. इन कंपनियों का काम था विदेशी कर्मचारियों के H-1B वीजा बनवाना और उन्हें अलग-अलग अमेरिकी कंपनियों में अस्थायी तौर पर काम दिलाना.

दूसरे आरोपी का नाम श्रीधर माडा है. उम्र भी 51 साल. वो भी कैलिफोर्निया के डबलिन में रहता है. वो यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के कृषि और प्राकृतिक संसाधन विभाग में मुख्य सूचना अधिकारी यानी सीआईओ के पद पर था. यह एक बड़ा सरकारी पद था लेकिन इस पद पर उसे बिना अपने वरिष्ठ अधिकारियों की मंजूरी के H-1B कर्मचारी रखने का कोई अधिकार नहीं था.

धोखाधड़ी कैसे होती थी?

जून 2020 से जनवरी 2023 तक यानी करीब ढाई साल तक दोनों ने मिलकर एक योजना बनाई. राजिडी अपनी वीजा कंपनियों के जरिए विदेशी नागरिकों के H-1B वीजा के लिए आवेदन करता था. इन आवेदनों में वो झूठ लिखता था कि यह कर्मचारी यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में काम करेंगे.

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माडा अपने CIO के बड़े पद का फायदा उठाकर इस झूठ को सच साबित करने में मदद करता था. वो लिखकर देता था कि हां, इन लोगों को यूनिवर्सिटी के प्रोजेक्ट पर रखा जाएगा.

जबकि सच यह था कि यूनिवर्सिटी में ऐसी कोई नौकरी थी ही नहीं. दोनों को पता था कि यह सब झूठ है. वीजा मिलने के बाद इन कर्मचारियों को यूनिवर्सिटी की जगह दूसरे प्राइवेट क्लाइंट्स के पास भेज दिया जाता था.

यह भी पढ़ें: अमेरिका में H-1B वीजा पर नया संकट, टेक्सास ने 2027 तक नई अर्जियों पर लगाई रोक... गवर्नर का आदेश

इससे दूसरों का नुकसान कैसे हुआ?

H-1B वीजा लॉटरी से मिलता है. जब राजिडी और माडा ने झूठे दस्तावेज देकर कई वीजा अप्रूव करवाए तो उन लोगों की जगह छिन गई जो सच में इन नौकरियों के लिए योग्य थे और ईमानदारी से आवेदन कर रहे थे. यानी दोनों ने न सिर्फ अमेरिकी सरकार को धोखा दिया बल्कि उन तमाम कंपनियों और उम्मीदवारों का भी हक मारा जो नियमों का पालन करके आवेदन कर रहे थे.

अमेरिकी सरकार ने क्या किया?

यह मामला कई बड़ी अमेरिकी सरकारी एजेंसियां मिलकर जांच कर रही हैं. इनमें अमेरिकी विदेश विभाग की डिप्लोमैटिक सिक्योरिटी सर्विस, होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशन, ट्रेजरी इंस्पेक्टर जनरल फॉर टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन और USCIS का फ्रॉड डिटेक्शन एंड नेशनल सिक्योरिटी डायरेक्टरेट शामिल हैं. केस की पैरवी असिस्टेंट यूएस अटॉर्नी डगलस हरमन कर रहे हैं.

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अब क्या होगा?

दोनों ने अपनी गलती कबूल कर ली है. अब उन्हें 5 साल तक जेल हो सकती है और 2.5 लाख डॉलर यानी करीब 2 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लग सकता है. सजा का ऐलान अभी होना बाकी है.

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