द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से भारत-रूस के रिश्ते सबसे मजबूत और भरोसेमंद: विदेश मंत्री जयशंकर

विदेश मंत्री जयशंकर ने रूस की अपनी यात्रा के दौरान यह भी रेखांकित किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी की हालिया यात्राओं ने यह स्पष्ट किया है कि भारत-रूस संबंध कितने गहरे और बहुआयामी हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे दौरों से राजनीतिक विश्वास और सहयोग की बुनियाद और मजबूत हुई है.

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विदेश मंत्री जयशंकर ने मॉस्को में अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ वार्ता की. (Photo- ITG) विदेश मंत्री जयशंकर ने मॉस्को में अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ वार्ता की. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 अगस्त 2025,
  • अपडेटेड 4:39 PM IST

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस की राजधानी मॉस्को में अपने समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ हुई बैठक में कहा कि भारत और रूस के रिश्ते द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से वैश्विक परिदृश्य में सबसे स्थिर और भरोसेमंद रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह साझेदारी केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें रक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, व्यापार, निवेश और लोगों के बीच आपसी संबंधों की गहराई भी शामिल है.

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जयशंकर ने प्रेस वार्ता में कहा कि बीते वर्षों में दोनों देशों के बीच कई उच्चस्तरीय मुलाकातें हुईं हैं, जिनमें पिछले साल का 22वां वार्षिक शिखर सम्मेलन और कज़ान में आयोजित बैठकें शामिल हैं. इन बैठकों से भारत-रूस रिश्तों को नई दिशा और मजबूती मिली है. उन्होंने बताया कि इस वर्ष के अंत में होने वाले अगले शिखर सम्मेलन की तैयारियां भी जोरों पर हैं.

विदेश मंत्री जयशंकर ने रूस की अपनी यात्रा के दौरान यह भी रेखांकित किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी की हालिया यात्राओं ने यह स्पष्ट किया है कि भारत-रूस संबंध कितने गहरे और बहुआयामी हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे दौरों से राजनीतिक विश्वास और सहयोग की बुनियाद और मजबूत हुई है.

विदेश मंत्री ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का दिया हवाला

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जयशंकर ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि आज दुनिया बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ रही है. आर्थिक और व्यापारिक परिदृश्य में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और ऐसे में भारत और रूस को मिलकर इन चुनौतियों के बीच अवसर तलाशने होंगे. उन्होंने कहा कि दोनों देशों को “Doing more and doing differently” यानी अधिक करने और अलग तरीके से करने के मंत्र को अपनाना होगा.

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी भारत-रूस रिश्तों को विशेष रणनीतिक साझेदारी बताते हुए कहा कि इसे दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने परिभाषित किया है और दोनों देश इस पर पूरी तरह खरे उतर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बहुध्रुवीय स्वरूप ले रही है, जिसमें एससीओ, ब्रिक्स और जी-20 जैसे संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. साथ ही संयुक्त राष्ट्र को भी सहयोग और समझौते का प्रमुख मंच माना जा रहा है.

लावरोव ने उम्मीद जताई कि जयशंकर के साथ हुई बातचीत रचनात्मक होगी और द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा देगी.

गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों ने नई दिल्ली की चिंता बढ़ा दी है. अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 50 प्रतिशत कर दिया है और रूस से कच्चे तेल की खरीद पर नए कर लगा दिए हैं. इससे भारत को आर्थिक झटका लगने का खतरा है और द्वितीयक प्रतिबंधों की आशंका भी बनी हुई है.

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