'सारे विधेयकों पर वीटो लगा दूंगा जब तक...', ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस को क्यों दी धमकी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सेव एक्टॉ को लेकर सख्त रुख अपनाया है और कहा है कि जब तक कांग्रेस इस विधेयक को मंजूरी नहीं देती, वह किसी भी दूसरे बिल पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे.

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अमेरिका में नए चुनाव कानून को लेकर छिड़ा सियासी युद्ध (File Photo: Reuters) अमेरिका में नए चुनाव कानून को लेकर छिड़ा सियासी युद्ध (File Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:07 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी जिद से वाशिंगटन की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है. ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिकी कांग्रेस सेव एक्ट(SAVE Act) को मंजूरी नहीं देती, तब तक वह किसी भी दूसरे बिल या कानून पर दस्तखत नहीं करेंगे. यानी उन्होंने अपनी कलम रोकने की कसम खा ली है, जिससे अमेरिका में बड़ा संवैधानिक संकट खड़ा हो सकता है.

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रविवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने कहा कि सेव एक्ट को पास कराना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है. उन्होंने फ्लोरिडा के अपने गोल्फ क्लब से यह एलान किया कि जब तक यह बिल पारित नहीं हो जाता, वह राष्ट्रपति के तौर पर किसी भी दूसरे कानून को मंजूरी नहीं देंगे.

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क्या है यह सेव एक्ट?

ट्रंप जिस बिल के लिए अड़े हुए हैं, उसका नाम सेव एक्ट (SAVE Act) है. इस बिल के तहत नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों में वोटिंग से जुड़े नियमों को कड़ा करने का प्रस्ताव है. इस कानून के तहत वोटर रजिस्ट्रेशन के समय हर व्यक्ति को अपनी नागरिकता का पक्का सबूत देना अनिवार्य होगा. इतना ही नहीं, अगर कोई चुनाव अधिकारी बिना जरूरी दस्तावेजों के किसी का रजिस्ट्रेशन करता है, तो उस पर आपराधिक कार्रवाई हो सकती है.

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यह बिल रिपब्लिकन पार्टी के नियंत्रण वाली प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में फरवरी में ही पास हो चुका है, लेकिन अब असली लड़ाई सीनेट में है. हालांकि सीनेट में इसे पास कराना ट्रंप के लिए आसान नहीं माना जा रहा है.

डेमोक्रेट्स ने बताया वोट दबाने की साजिश

दूसरी ओर, विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने इस बिल का पुरजोर विरोध किया है. उनका कहना है कि ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी इस बिल के जरिए वोटरों को डराना और दबाना चाहते हैं. डेमोक्रेट्स का मानना है कि नागरिकता के सबूत जैसी शर्तों से कई लोग वोट देने के अधिकार से वंचित रह सकते हैं.

स्वतंत्र विश्लेषकों का मानना है कि इस समय डेमोक्रेटिक पार्टी मजबूत स्थिति में है और वह प्रतिनिधि सभा पर फिर से नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर रही है. हाल के कुछ विशेष चुनावों में जीत मिलने से डेमोक्रेट्स के हौसले बुलंद हैं, जबकि रिपब्लिकन पार्टी के लिए यह किसी झटके से कम नहीं माना जा रहा.

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पेचीदा हो सकते हैं आने वाले दिन

अगर प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स बहुमत हासिल कर लेते हैं, तो ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के अंतिम दो साल बेहद मुश्किल भरे हो सकते हैं. हालांकि कानून के जानकारों का कहना है कि अगर कांग्रेस किसी बिल को पास कर देती है और राष्ट्रपति 10 दिनों तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं करते, तो वह बिना हस्ताक्षर के भी कानून बन सकता है. 

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