'हमला न करते तो ईरान दाग देता मिसाइलें'... Iran पर अटैक के फैसले का ट्रंप ने किया बचाव

ईरान पर हमले को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने फैसले का बचाव किया है. ट्रंप ने कहा कि तेहरान पर हमला ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को विफल करने के उद्देश्य से किया गया. अगर ऐसा कदम नहीं उठाया जाता तो ईरान न केवल मध्य-पूर्व के लिए बड़ा खतरा बनता बल्कि उसकी मिसाइलें अमेरिका तक भी पहुंच जाती.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले के फैसले का बचाव किया.  (Photo: Reuters) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले के फैसले का बचाव किया. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:44 PM IST

ईरान पर हमले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने फैसले का बचाव किया है. व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम में आयोजित एक प्रेस कॉन्फेंस में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को विफल करने के लिए तेहरान पर हमले का आदेश दिया.

अगर ऐसा नहीं करता तो ईरान न केवल मध्य-पूर्व के लिए बड़ा खतरा बनता, बल्कि ईरानी मिसाइलें अमेरिका तक पहुंच जाती. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ये हमला करने का हमारा आखिरी और सबसे अच्छा मौका था और उस बीमार और कुटिल शासन की ओर से उत्पन्न असहनीय खतरों को खत्म करना बेहद जरूरी था.

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अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी अभियान के चार से पांच हफ्ते तक चलने का अनुमान है, लेकिन ये इससे अधिक समय तक भी चल सकता है. फ्लोरिडा से वॉशिंगटन लौटने, और युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे ट्रंप ने कहा कि हमारा मकसद साफ है. 

पहले हम ईरान की मिसाइल क्षमताओं को नष्ट कर रहे हैं, वो काफी अच्छी मिसाइलें बनाते हैं, दूसरा हम उनके मददगार पड़ोसी देशों पर हमला कर रहे हैं, तीसरा ये सुनिश्चित कर रहे हैं कि दुनिया का आतंकवाद प्रयोजक कभी भी परमाणु हथियार हासिल ना कर सके.

इसके बाद अंत में हम ये सुनिश्चित कर रहे हैं कि ईरानी शासन अपनी सीमाओं के बाहर आतंकवादी सेनाओं को हथियार, धन और आदेश देना जारी ना रखे सके. 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से बाहर निकलने के अपने फैसले का भी बचाव किया. ट्रंप ने कहा कि इस कदम से तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका गया.

दरअसल पूर्व राष्ट्रपति ओबामा ने साल 2015 में ईरान के साथ परमाणु समझौता किया था, लेकिन ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में सत्ता में आते ही उसे रद्द कर दिया था. साथ ही ईरान पर और कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे.

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अमेरिका के विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री का बयान 

ईरान के साथ चल रही लड़ाई पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी मीडिया से बात की और कहा कि अमेरिकी मिशन का मकसद ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को नष्ट करना और परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है. साथ ही अमेरिका के विदेश मंत्री ने कहा कि वॉशिंगटन को उम्मीद है कि ईरानी जनता तेहरान में सरकार को उखाड़ फेंकेगी.

ईरान से लड़ाई पर अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी पत्रकारों से बात की और दावा किया कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान 'अंतहीन युद्ध' में नहीं बदलेगा. हालांकि अभियान में समय जरूर लगेगा.

पिछले हफ्ते शुरू हुआ युद्ध 

पिछले हफ्ते अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला बोल दिया और इसे ऑपरेशन 'एपिक फ़्यूरी नाम दिया, जो कि अभी तक जारी है. अमेरिका और इजरायल ने जहां ईरान में एक हजार से ज्यादा जगहों पर हमले किए हैं. वहीं, बदले की कार्रवाई के तहत ईरान ने मध्य-पूर्व में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और इजरायल पर मिसाइलें दागी है.

ईरान ने न सिर्फ सऊदी अरब, कतर और बहरीन में मौजूद अमेरिकी बेस को निशाना बनाया है, बल्कि अमेरिकी दूतावास पर भी हमले किए हैं.

वहीं, ईरान की ओर से जोरदार पलटवार को देखते हुए अमेरिका ने अपने नागरिकों से तुरंत बहरीन, मिस्र,  इराक, इजरायल, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, ओमान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, UAE और यमन छोड़ने को कहा है. साथ ही इनमें से कई देशों में मौजूद अपने दूतावास के कर्मचारियों को सुरक्षित जगहों पर चले जाने का आदेश दिया है.

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