'मुझे आधा पुल चाहिए नहीं तो...', कनाडा ने बनाया ब्रिज लेकिन ट्रंप को क्यों चाहिए हिस्सा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के नए गॉर्डी होवे इंटरनेशनल ब्रिज पर आधे हिस्से का दावा ठोका है और उद्घाटन रोकने की धमकी दी है. यह ब्रिज डेट्रॉइट और विंडसर को जोड़ता है और कनाडा ने इसका पूरा खर्च उठाया है.

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डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के ब्रिज में से आधा हिस्सा मांगा है (Photo: Reuters) डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के ब्रिज में से आधा हिस्सा मांगा है (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:54 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कब किस देश और उसकी संपत्ति पर दावा ठोक दें, कुछ कहा नहीं जा सकता. अब उन्होंने कनाडा के एक ब्रिज पर अपना दावा ठोका है. डेट्रॉइट (मिशिगन, अमेरिका) से विंडसर (ओंटारियो, कनाडा) को जोड़ने वाला यह ब्रिज नया बना है और इसका पूरा खर्चा कनाडा ने उठाया है. लेकिन अब ट्रंप आधे ब्रिज पर अपना दावा कर रहे हैं.

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अमेरिका के उत्तरी सीमा पर बने इस ब्रिज का उद्घाटन होना है लेकिन ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर आधा ब्रिज अमेरिका को नहीं दिया गया तो वो ब्रिज का उद्घाटन नहीं होने देंगे.

डेट्रॉइट नदी पर बना गॉर्डी होवे इंटरनेशनल ब्रिज लगभग तैयार है. ये दुनिया का सबसे लंबा केबल-स्टे ब्रिज है और दोनों देशों के बीच ट्रेड के लिए बहुत अहम है, खासकर ट्रकों की आवाजाही के लिए. कनाडा और अमेरिका के बीच ट्रकों के जरिए काफी मात्रा में व्यापार होता है.

ट्रंप ने कनाडा के बनाए ब्रिज पर क्यों दावा ठोका?

सोमवार को ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक लंबा पोस्ट डाला, जिसमें उन्होंने ब्रिज का उद्घाटन रोकने की धमकी दी. उन्होंने कहा कि कनाडा जब तक अमेरिका को पूरा मुआवजा नहीं देता, ब्रिज का उद्घाटन नहीं होगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका को कम से कम आधा ब्रिज तो मिलना ही चाहिए.

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ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर अपने बयान में कहा कि कनाडा दोनों तरफ का मालिक है और पुल का निर्माण लगभग बिना किसी अमेरिकी सामग्री के किया गया है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 'BUY AMERICAN Act' से छूट देकर कनाडा को अमेरिकी स्टील सहित उत्पादों का उपयोग न करने की इजाजत दी.

ब्रिज बनाने में कितना खर्चा आया?

इस ब्रिज की लागत करीब 4.7 अरब डॉलर है. कनाडा ने ब्रिज बनाने का पूरा खर्च उठाया और अमेरिका या मिशिगन राज्य ने एक पैसा भी नहीं दिया. वजह ये थी कि मिशिगन के विधायकों ने सालों तक फंडिंग देने से इनकार किया, इसलिए कनाडा ने 2012 के समझौते के तहत पूरा प्रोजेक्ट फाइनेंस किया.

ब्रिज का निर्माण 2018 से चल रहा है और 2026 में यह खुलने वाला है. मिशिगन और कनाडा के बीच हुए समझौते में तय हुआ है कि टोल से कमाई की जाएगी. कनाडा पहले अपना पूरा खर्च (ब्याज सहित) टोल से रिकवर करेगा. इसे पूरी तरह रिकवर होने में लगभग 30 साल लग जाएंगे. उसके बाद टोल का रेवेन्यू कनाडा और मिशिगन के बीच बराबर बंटेगा.

मालिकाना हक पहले से ही 50-50 है. ब्रिज का मालिकाना हक कनाडा सरकार और मिशिगन राज्य के बीच है. दोनों तरफ की लैंड और ऑपरेशन में शेयर है. 

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ब्रिज का निर्माण रोकने की हुई कोशिश

कनाडा और अमेरिका के बीच फिलहाल ट्रकों के जरिए व्यापार के लिए लगभग 100 साल पुराने एम्बेसडर ब्रिज का इस्तेमाल होता है. लेकिन कनाडा इसकी क्षमता को काफी नहीं मानता और अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए उसने नया ब्रिज बनाया.

लेकिन एम्बेसडर ब्रिज के मालिक अरबपति मोरून परिवार इस नए पुल का विरोध करता रहा है, क्योंकि दशकों से वो टोल से बड़ी कमाई करते रहे हैं. उनकी कंपनी सीमा चौकी पर टैक्स-फ्री रियायतें और ईंधन बिक्री भी ऑपरेट करती है. 2018 में उन्होंने ट्रंप प्रशासन से ब्रिज का निर्माण रोकने की लॉबिंग की थी, लेकिन वो कोशिश असफल रही थी.

ट्रंप के दावे पर कनाडा के प्रधानमंत्री कार्नी क्या बोले?

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि उन्होंने ट्रंप से बात कर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की. कार्नी ने कहा कि निर्माण में कनाडाई स्टील और मजदूरों के साथ अमेरिकी स्टील और मजदूर भी शामिल हैं और यह दोनों देशों के सहयोग का उदाहरण है.

कनाडा को फिर से टार्गेट क्यों कर रहे ट्रंप

ट्रंप का कनाडा के ब्रिज पर दावा ठोकना ट्रेड वॉर का हिस्सा लगता है. ट्रंप पहले से कनाडा पर टैरिफ लगा चुके हैं. कनाडाई स्टील पर 50% और ऑटो पर 25% टैरिफ लगा है.

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कनाडा चीन के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को बढ़ा रहा है जिससे नाराज ट्रंप ने कनाडा पर 100% टैरिफ की धमकी दी है. जानकारों का मानना है कि चीन के साथ कनाडा अपने व्यापार को आगे न बढ़ाए इसलिए ट्रंप शायद ब्रिज का इस्तेमाल कर रहे हैं.

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