पुरुषों के 'प्रेग्नेंट' होने से लेकर ट्रांस को 'महिला' मानने तक, खत्म नहीं हो रही यूएस में जेंडर डिबेट

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में जेंडर पहचान और ट्रांसजेंडर अधिकारों को लेकर विवाद तेज हो गया है. ट्रंप के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर ने ट्रांसजेंडर सुरक्षा प्रावधानों को खत्म कर दिया और केवल दो जेंडर मान्यता देने का आदेश दिया. अब अमेरिका की सीनेट में जेंडर और बायोलॉजी पर तीखी बहस हुई है.

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अमेरिका में जेंडर पर बहस तेज हो गई है (File Photo: Reuters) अमेरिका में जेंडर पर बहस तेज हो गई है (File Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:58 PM IST

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही अमेरिका में जेंडर (लिंग) और पहचान को लेकर बहस तेज हो गई है. ट्रंप ने सत्ता में लौटते ही कई एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी किए. इनमें से एक ऑर्डर से ट्रांसजेंडर लोगों के लिए मौजूद अहम सुरक्षा प्रावधानों को खत्म कर दिया गया और जेंडर आइडेंटिटी की वैधता को ही नकार दिया गया. ऑर्डर में ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी सरकार अब केवल दो जेंडर को मान्यता देती है- स्त्री (Female) और पुरुष (Male).

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ट्रंप के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के साथ ही अमेरिका में जेंडर को लेकर बहस छिड़ गई जो अब तक चल रही है. बुधवार को अमेरिका की सीनेट की एक सुनवाई में रिपब्लिकन सीनेटर जोश हॉली और भारतीय मूल की प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉक्टर निशा वर्मा के बीच जेंडर और बायोलॉजी को लेकर तीखी बहस छिड़ गई.

सुनवाई के दौरान सीनेटर हॉली ने डॉक्टर से बार-बार सवाल किया कि क्या पुरुष गर्भवती हो सकते हैं? जब डॉक्टर ने सीधे 'हां/ना' का उत्तर देने से इनकार किया तो यह चर्चा और भी तीखी हो गई. 

यह सवाल इस व्यापक बहस का हिस्सा है जिसमें कुछ लोग जेंडर-न्युट्रल शब्दों का उपयोग करते हुए कहते हैं कि केवल 'महिलाएं' ही नहीं, बल्कि खुद को पुरुष मानने वाले ट्रांसजेंडर लोग और अन्य लिंग पहचान वाले भी प्रेग्नेंट हो सकते हैं. 

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पुरुषों के 'प्रेग्नेंट' होने का सवाल

बहस के दौरान डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से गवाह के रूप में पेश हुईं डॉ. वर्मा पुरुषों के प्रेग्नेंट होने वाले सवाल पर हिचकिचाईं और उन्होंने इसका कोई सीधा उत्तर नहीं दिया. उन्होंने कहा कि वो अलग-अलग जेंडर आइडेंटिटी वाले मरीजों की देखभाल करती हैं. उन्होंने कहा, 'मैं ऐसे लोगों का भी इलाज करती हूं जो खुद को महिला नहीं मानते.'

जेंडर आइडेंटिटी को लेकर कानूनी स्तर पर भी बहस तेज

अमेरिका में जेंडर आइडेंटिटी को लेकर कानूनी स्तर पर भी बहस तेज है. अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट के कंजर्वेटिव जज मंगलवार को ऐसे राज्य कानूनों को बरकरार रखने के पक्ष में दिखाई दिए, जिनमें ट्रांसजेंडर एथलीटों को महिलाओं की खेल टीमों में खेलने से बैन किया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने इडाहो और वेस्ट वर्जीनिया राज्य की अपीलों पर तीन घंटे से अधिक समय तक दलीलें सुनीं. इन अपीलों में निचली अदालतों के उन फैसलों को चुनौती दी गई थी, जिनमें ट्रांसजेंडर छात्रों के पक्ष में फैसला देते हुए कहा गया था कि ये बैन अमेरिकी संविधान और एक संघीय भेदभाव-विरोधी कानून का उल्लंघन करते हैं. अमेरिका के 25 अन्य राज्यों में भी इसी तरह के कानून लागू हैं.

सुनवाई के दौरान रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने इन कानूनों का बचाव किया. अमेरिका के जिन राज्यों में डेमोक्रेटिक पार्टी की सरकार है, वहां फेडरल कानूनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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इसके अलावा अमेरिका में फेडरल और राज्य दोनों स्तर पर नीतिगत बदलाव देखने को मिल रहे हैं, जिनमें सरकार यह तय करने की कोशिश करती है कि जेंडर कैसे परिभाषित होगा- कुछ नीतियों में केवल 'पुरुष' और 'महिला' को ही मान्यता दी जा रही है, जिससे ट्रांसजेंडर लोगों की पहचान और अधिकारों को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं.

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