कांगो में ममता और महामारी की दर्दनाक जंग! मां रोती रही- 'मेरे बेटे को टाइफाइड था इबोला नहीं', शव के लिए फूंक दिया अस्पताल

कांगो में इबोला आउटब्रेक के बीच हिंसक प्रदर्शन देखने को मिला, जब एक स्थानीय फुटबॉलर के शव को परिवार को नहीं सौंपे जाने पर लोगों ने अस्पताल के मेडिकल टेंट में आग लगा दी. पुलिस को स्थिति काबू करने के लिए आंसू गैस और चेतावनी फायरिंग करनी पड़ी. घटना ने इबोला संक्रमित शवों के सुरक्षित अंतिम संस्कार को लेकर प्रशासन की चुनौती बढ़ा दी है।

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इबोला पीड़ित के शव को लेकर विवाद के बाद कांगो में मेडिकल टेंट जलाए गए (Photo: Reuters) इबोला पीड़ित के शव को लेकर विवाद के बाद कांगो में मेडिकल टेंट जलाए गए (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:12 PM IST

कांगो में एक मशहूर फुटबॉलर की मौत हुई. अधिकारियों ने कहा उसे इबोला था. परिवार ने कहा नहीं. इस एक झगड़े ने ऐसा बवाल मचाया कि मरीजों के टेंट जला दिए गए, पुलिस को गोलियां चलानी पड़ीं, और एक जलते टेंट में एक शव भी अंदर रह गया. कांगो के इतूरी प्रांत की यह घटना बताती है कि किसी बीमारी को रोकना सिर्फ दवा से नहीं, लोगों के भरोसे से भी होता है.

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रवांपारा शहर में एली मुनोंगो वांगू नाम के फुटबॉलर को अस्पताल में भर्ती किया गया था. वह इलाके में काफी मशहूर थे, कई स्थानीय टीमों के लिए खेल चुके थे. एक डॉक्टर ने बताया कि उन्हें इबोला का संदिग्ध मामला मानकर टेस्ट के लिए सैंपल लिए गए थे.

गुरुवार को मौत हो गई

उनकी मां का कहना था कि उनके बेटे को इबोला नहीं, टाइफाइड बुखार था. परिवार, दोस्त और पड़ोसी अस्पताल के बाहर जमा हो गए. उन्होंने मांग की कि शव उन्हें दिया जाए ताकि वे खुद उन्हें दफना सकें. हालांकि, अधिकारियों ने मना कर दिया.

आगे क्या हुआ?

पहले सेना ने माहौल शांत करने की कोशिश की, लेकिन भीड़ नहीं मानी. फिर पुलिस आई, आंसू गैस के गोले छोड़े गए, हवाई फायरिंग की गई. लेकिन भीड़ तितर-बितर होने से पहले ALIMA नाम की एक मेडिकल संस्था के दो टेंट जला दिए, जिनमें आठ बेड थे और मरीज भर्ती थे.

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वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जां-क्लॉड मुकेंडी ने बताया कि टेंट पूरी तरह जलकर राख हो गए. इसी आग में एक और शव भी था जिसे उस दिन दफनाया जाना था. छह मरीज जो उन टेंट में थे, उन्हें किसी तरह अस्पताल में शिफ्ट कर लिया गया.

यह भी पढ़ें: अफ्रीका में इबोला से मची तबाही, भारत तक पहुंचा डर! दिल्ली में होने वाली मेगा-समिट टली

इस घटना के बाद बड़ी संख्या में सेना और पुलिस पहुंची और स्थिति काबू में आई. जिस फुटबॉलर के लिए यह सब हुआ, उन्हें परिवार के विरोध के बावजूद गुरुवार की रात को सुरक्षित तरीके से दफना दिया गया.

भागे हुए मरीजों को ढूंढने की कोशिश

स्थानीय प्रमुख बतकुरा जामुंडू मुगेनी ने बताया कि प्रशासन अब दो काम एक साथ कर रहा है. एक, जो मरीज इस अफरा-तफरी में भाग गए उन्हें ट्रेस करना. दो, जो लोग उन मरीजों के संपर्क में आए हैं उन्हें खोजकर क्वारंटाइन करना. इबोला में 'कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग' बेहद जरूरी है, यानी जो भी संक्रमित से मिला हो उसकी निगरानी करना.

इबोला में मौत के बाद शव क्यों इतना खतरनाक होता है?

इबोला में मरने के बाद इंसान का शव बेहद संक्रामक हो जाता है. अगर परिवार वाले बिना सुरक्षा उपकरण (PPE) के शव को छूते हैं, तो वे खुद संक्रमित हो सकते हैं. इसीलिए इबोला में 'सेफ बरियल' यानी सुरक्षित तरीके से दफनाना बेहद जरूरी है. इसे सिर्फ प्रशिक्षित दल ही करता है, जो सुरक्षात्मक कपड़े पहनकर शव को दफनाते हैं. परिवार को शव नहीं सौंपा जाता. यही नियम उस फुटबॉलर के मामले में टकराव की जड़ बना.

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इबोला की वजह से अब तक कांगो में 160 लोगों की मौत हो चुकी है. सरकार ने इसे शुक्रवार को आधिकारिक रूप से प्रकोप घोषित किया. गुरुवार तक 670 संदिग्ध मामले सामने आए हैं. 

इनपुट: रॉयटर्स

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