ईरान में हिंसा के बीच चीन की दोटूक, विदेशी हस्तक्षेप को बताया गलत

ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच चीन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कड़ा संदेश दिया है. बीजिंग ने ईरान की संप्रभुता की रक्षा की वकालत करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य हस्तक्षेप की धमकी का विरोध किया है.

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चीन ने सैन्य हस्तक्षेप की धमकी का विरोध किया है. (Photo: Reuters) चीन ने सैन्य हस्तक्षेप की धमकी का विरोध किया है. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:15 PM IST

चीन ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों पर अपना रुख साफ किया है. चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि चीन को उम्मीद है कि ईरान की सरकार और वहां की जनता मौजूदा कठिनाइयों को दूर कर देश में स्थिरता बनाए रखने में सफल होगी. 

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बल के प्रयोग या सैन्य धमकी का कड़ा विरोध करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी देश की संप्रभुता और सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सुरक्षित रहनी चाहिए. यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रदर्शनकारियों के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप की धमकी के जवाब में आया है. 

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प्रवक्ता ने बीजिंग में नियमित ब्रीफिंग के दौरान दोहराया कि चीन हमेशा अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के खिलाफ रहा है.

सैन्य हस्तक्षेप की धमकी का विरोध...

चीन ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मिलिट्री पॉवर के इस्तेमाल को गलत बताया है. प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि बीजिंग बाहरी हस्तक्षेप के बजाय बातचीत और संप्रभुता के सम्मान का पक्षधर है. अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकी का जिक्र करते हुए चीन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून हर देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है. चीन का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मुताबिक ही देशों के बीच संबंधों का प्रबंधन होना चाहिए.

यह भी पढ़ें: ईरान की क्रांति में खामेनेई के खिलाफ लड़कर जान दे रहे लोग कौन हैं?

ईरान की स्थिरता और मुश्किलों का हल

ईरान एक तेल समृद्ध देश है. ऐसे में देश के अंदर पैदा हुई अशांति पर चीन ने चिंता जाहिर करते हुए वहां की सरकार और लोगों पर भरोसा जताया है. चीन का मानना है कि मौजूदा संकट का समाधान ईरान की आंतरिक कोशिशों से ही मुमकिन है. इसके साथ ही, चीन ने ग्रीनलैंड मुद्दे पर भी अमेरिका को घेरा और कहा कि आर्कटिक पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के हित का विषय है और किसी देश को अपने स्वार्थ के लिए दूसरे देश का बहाना नहीं बनाना चाहिए.

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